| लिमटी खरे,नई दिल्ली (साई) । अण्णा और बाबा से सिब्बल का गुप्त समझौता ! अहंकारी, घमंडी छवि वाले केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल इन दिनों खासे नरम दिखाई पड़ रहे हैं। उनके व्यवहार के कारण कांग्रेस में ही
सुसंस्कारों को व्यवहार में लाना मानवता का पर्याय है , जिसे हम जिस स्तर पर जितनी अधिक मात्रा में विकसित कर सकें तो उतने ही अनुपात में हम देवत्व की ओर बढ़ सकेंगे | जब हम इस दिशा में विकसित होंगे तभी हमारा राष्ट्र भी विकसित होगा | जो बातें अब से हजारों साल पहले चलन में थीं , लोगों के आचरण में थी , यह सब सामान्य बातें हुआ करती थीं , वे अब असाधारण व असामान्य हो गयी हैं | इसका कारण यह है की हम इनसे दूर होते चले गए | अब भी कुछ नहीं बिगड़ा , यदि हम अब भी जाग जाएँ तो निश्चय ही हमारा भविष्य सुनहरा होगा | वातावरण का प्रभाव हमारे कदम गलत रास्ते पर चले जाते हैं | अच्छे लोगों के साथ रहने पर अच्छे विचारों का जन्म हमारे मष्तिष्क पर होगा और गलत लोगों के साथ रहने पर गलत विचारों का निर्माण होगा , जो हमारे आचरण को प्रभावित करेगा | अगर हमारा धैर्य और संयम सुदृढ़ है तो सफलता हमारे निकट होगी |हम अपनी संचित उर्जा रचनात्मक कार्यों में लगाएं , जिससे हम स्वयं के कल्याण के साथ-साथ परिवार और समाज का भी कल्याण कर सकें |
नकरात्मक विचार हमारी प्रगति को सदैव कमजोर करते रहते हैं | इनसे बचना ही हितकर होगा | धैर्य और संयम की जरुरत हमें अधिकतर नकारात्मक विचारों के ही परिणामस्वरूप पड़ती है , जिनसे बचा जा सकता है | जब हम अच्छा सोचेंगे तो अच्छा करेंगे भी | खुशहाल जीवन के लिए सुसंस्कारित होना अति आवश्यक है | जब हम अपने जीवन में सही गलत का भेद समझने की सामर्थ्य अर्जित कर लेंगे , तभी हमें अपने वास्तविक जीवन का बोध होगा और जीवन को सही दिशा एवं गति मिलेगी | संस्कारों से हमारा जीवन परिष्कृत एवं परिमार्जित होता है | कठिन समय में संस्कारों की शक्ति ही काम आती है | निकटता , आत्मीयता , अपनत्व जैसे सदगुण संस्कारों से ही पोषित होते हैं , जिनकी आज समाज को जरुरत है | संस्कारों की प्रथम पाठशाला हमारा परिवार ही होता है | संस्कार विहीन जीवन का कोई अर्थ नहीं | मानव जीवन के उज्जवल भविष्य की आधारशिला संस्कारों पर ही रखी है |