जीवन|2011/08/08 2:24 pm

आदमी

आदमी रास्ता चलने में थोड़ा ढीला होकर इधर-उधर कहीं हो जाये तो उसका पैर मोच जाता है। दूसरा आदमी दीवाल में अपना पैर मार दे तो दीवाल ढह जाती है। आदमी थोड़ा धूप में निकल जाये तो उसे लपट-लू लग जाती है और सिर में गर्मी पैदा हो जाती है। दूसरा आदमी पूरे दिन तपती धूप में खेत में अपनी फसल काटता है और पशुओं को चराता है। फिर भी उसे कुछ नहीं होता धूप से पहले वाला  थोड़ी धूप में बीमार हो जाता है। आदमी को थोड़ी विपरीत परिस्थिति दिखी तनावग्रस्त होकर आत्म हत्या कर लेता है

। दूसरा आदमी जब पैदा हुआ तब से मरते तक विपरीत परिस्थितियां ही देखता है लेकिन संघर्ष करता है, पसीना बहाता है। हार नहीं मानता, जिन्दगी से लड़ता रहता है। आदमी अपने परिवेश के किसी व्यक्ति को सफल होते देखता है तो हताश हो जाता है जैसे सफल व्यक्ति ने उसके घर की तिजोरी में से उसकी बपौती वाली सफलता चुरा ली हो। दूसरा आदमी गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए सहयोग देता है, गरीब बच्चियों के लिए सिलाई सेन्टर निःशुल्क खुलवाता है और उनकी शादियों में भी सहयोग करता है। आदमी बड़े नाम वाले बाप के नाम से अपने को बड़ा नाम वाला कहलाना चाहता है।

दूसरा आदमी अपने अच्छे कामों से अपने बाप  को ‘धन्यवाद’ का अधिकारी बनवा देता है। आदमी को शैतान, हैवान, कुत्ता, कमीना, नालायक, नीच इत्यादि कहकर संबोधित किया जाता है। दूसरे आदमी को फरिश्ता, देवदूत, मसीहा, भगवान, महापुरुष, महात्मा, दिव्य-अलौकिक इत्यादि कहकर लोग दिल में उन्हें बसाते हैं। आदमी स्वतंत्र है उसे अपने आपको किस स्तर का बनना है उपर थोड़े से नमूने पेश किये आदमी की स्वनिर्धारित प्रवृतियों में जो उसे आदमी दूसरे आदमी को विलोम बनाने में सक्षम है।

लेखक  : अमित निरंजन

हरिद्वार- उत्तरांचल

मो0 नं0-07520222375

 

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