विनाशकारी ‘‘बीटी कॉटन ’’ बीज की निर्माता कम्पनी मौनसेण्टों ने हिमाचल में भी अपने पांव तेजी से पसारने शुरू कर दिये हैं। ‘‘डिकाल्ब’’ नामक मक्का बीज मण्डी, हमीरपुर के बाद अब प्रदेश के कई भागों में उगाने शुरू हो गए हैं। इन बीजों का मिट्टी, मनुष्यों और पर्यावरण पर कितना और कैसा बुरा प्रभाव होना है, यह तो आने वाला समय बतलाएगा। पर इस कम्पनी के पिछले कार्यों को देखकर ऐसी आंशका स्वाभाविक है कि ये बीज कई प्रकार से हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं। इस कम्पनी की कार्यशैली और प्रकृति की थोड़ी जानकारी भी इसके प्रति आशंकाओं और सन्देहों को पैदा करने के लिए काफी है।
अमेरिका के कहने पर विश्वभर में बदनाम इस कम्पनी ने वियतनामियों पर छिड़कने के लिए अजेण्ड औरेंज नामक हत्यारा रसायन बनाया था जिसे छिड़कर अमेरीका ने हजारों वियतनामियों की निर्गम हत्या की थी। जंगल के वृक्ष, पशु-पक्षी तक इस छिड़काव से समाप्त हो गए थे।
विषैले रसायन बनाने वाली अमेरिका की इस बहुराष्ट्रीय कम्पनी ने विश्व के बीज बाजार और आहार पर कब्जा करने का अभियान छेड़ा हुआ हैं। बीटी कॉटन जैसा हानिकारक कपास का बीज बनाने के पीछे ‘‘एजेण्ट आरेंज’ बनाने जैसा उद्देश्य होने की आशंकाओं को नकारा नहीं जा सकता। ये बीज और इसकी उपज इतनी जहरीली है कि अनेक कपास उगाने वाले प्रदेशों में ‘‘बीटी कपास’’ के खेतों में चरने से हजारों भेड़ों की मृत्यु हो गई। पंजाब के दर्जनों किसान ऐसे मिले जो इस कपास की टहनियां उठाने से बीमार पड़ गए। उनके शरीर सूज गए और जलन तथा खारिश होने लगी। इस कपास के बने वस्त्र कितने मारक प्रभाव वाले होंगे, इसका कुछ अनुमान लगाया जा सकता हैं।
विचारणीय बात यह है कि केवल कीट नियंत्रण के लिए ऐसी जहरीली कपास का बीज बनाया गया या निशाने कहीं और भी हैं? वियतनामियों को सीधे-सीधे मारने की क्रूरता से मिली बदनामी के बाद अब चुपके-चुपके चालाकी से हमें मारने की कोई योजना चल रही क्या? एक तीर, दो शिकार। विश्व बाजार में कपास के व्यापार में कब्जा करने के लिये भारत जैसे शक्तिशाली प्रतियोगी को पछाड़ने का उपाय तो नहीं? इस कपास में आम पर पैदा होने वाले वे कीट आ जाते हैं जो हजारों साल के इतिहास में नहीं आए थे।
ऐसी बदनाम कंम्पनी द्वारा बनाये मक्की के बीजें को बढावा देना खतरे से खाली नही। इस कंम्पनी की कारगुज़ारियों से अनजान हिमाचल सरकार पिछले कई साल से प्रदेश के किसानें को ‘डिकाल्ब डबल’ नामक मोनसेण्टो का बीज सब्सिडी पर बो रही है।
‘हैती’ जैसे निर्धन देश ने भी इस कंम्पनी का दान में मिला मक्की का बीज स्वीकार नहीं किया और जला दिया। फ्रांस में न्यायालय के आदेश से इस कम्पनी का खेतों में लगा मक्की का बीज नष्ट कर दिया गया। इस कंम्पनी के बनाए मकई को खाने से लीवर, गुर्दे, हृदय आदि अंग खराब होने के अनेकों शोध सामने आए हैं। स्वतंत्र शोधों यह बात भी सामने आई है कि इन तथाकथित समुन्नत बीजों से धीरे-धीरे या एकदम उपज घट जाती है। अतः उपज बढ़ने के दावे भी सही नहीं हैं।
सबसे बडा खतरा है हमारी पारम्परिक मक्के के विनाश का। मोनसेण्टो की मक्की के पोलन से परम्परिक बीज नष्ट होना सुनिश्चित होता है, पिछले अनेक अनुभव इसका प्रमाण हैं। सारे संसार के आहार और बीज संम्पदा पर कब्जा करने के लिये कुख्यात इस कंम्पनी का असली निशाना हमारे बीज ही हैं, आज के वैश्विक परिदृष्य को समझने वाला कोई भी व्यक्ति इस बात को आसानी से समझ सकता है। अतः इसे बढावा देना एक बड़े विनाश की भूमिका सिद्ध हो सकता है।

