बड़बोलेपन पर मेहनत की विजय

भारत जीत गया. कई सालों के बाद ऐसी ऐतिहासिक विजय मिली है, वर्ल्ड कप के पहले मैच में 4-1 से विजय और वो भी पाकिस्तान से! वाह-वाह! हर भारतीय यही सोच रहा होगा. अचानक हॉकी पर सबकी नज़र आ गयी. फेसबुक और ट्विटर पर हॉकी को ले के कई सारी कोम्यूनीटीज़ बन गयी. मैंने भी हॉकी के सारे नियम न जानते हुए भी सारे मैच की रेकॉर्डिंग देखी और बार बार देखी. शायद एक जीत की ही देर थी, सारा देश हॉकी को जैसे अपने दिल में दबाये बैठा था. अचानक ये क्या हुआ कि एक फिसड्डी टीम इतनी सक्षम हो गयी? इसका जवाब शायद इस मैच के बारे में विभिन्न लोगों द्वारा कहे गए वक्तव्यों में है. गौर कीजिये, इन्ही विचारों में भारत की जीत का राज़ छुपा हुआ है:  

  • हम भारत को हराने के लिए कुछ भी करेंगे – पाकिस्तानी कोच शाहिद अली खान, २६ फ़रवरी को
  • हमारी टीम मैदान पे सारे हथियार चमकाते हुए आएगी - पाकिस्तानी कोच शाहिद अली खान, २६ फ़रवरी को
  • हमें यकीन है हम भारत पर भारी पड़ेंगे, क्योंकि हम उन्हें पिछले तीन मैचों में हरा चुके है – पाकिस्तानी कोच शाहिद अली खान, २७ फ़रवरी को
  • जो टीम प्रेशर बर्दाश्त कर लेगी, वही जीतेगी, और इसमें पाकिस्तान का कोई सानी नाहीं  – पाकिस्तानी कोच शाहिद अली खान, २७ फ़रवरी को
  • हमारी टीम में सीनियर खिलाडियों के अनुभव और जूनियर खिलाडियों के जोश क़ी कोई कमी नहीं, यह इस मैच में मददगार सिद्ध होगा – पाकिस्तानी कप्तान ज़ीशान अशरफ़, २७ फ़रवरी को
  • सोहेल अब्बास, वसीम अहमद और शकील अब्बासी जैसे सीनियर खिलाड़ी जूनियर खिलाडियों को प्रेशर में नहीं आने देंगे  – पाकिस्तानी कप्तान ज़ीशान अशरफ़, २७ फ़रवरी को
  • ये मेरे जीवन के सब से महत्तवपूर्ण मैचों में से एक है  – पाकिस्तानी कप्तान ज़ीशान अशरफ़, २७ फ़रवरी को
  • हम शायद दुनिया की सबसे बेहतर टीम नहीं है पर हम हर मैच में हमारी सबसे बेहतर हॉकी खेलेंगे – भारतीय कोच, जोस ब्रासा, २६ फ़रवरी को
  • जीत और हार बहुत सारी बातों पर निर्भर करती है, इसकी गारंटी कोई नहीं ले सकता. पर मैं इसकी गारंटी लेता हूँ कि हमारी टीम अपनी पूरी क़ाबलियत से खेलेगी- भारतीय कोच, जोस ब्रासा, २६ फ़रवरी को
  • हमारी टीम ने फिटनेस पर पूरी मेहनत की है, मैं मानता हूँ ख़राब फिटनेस इस टीम की सबसे बड़ी कमजोरी रही है. हर खिलाड़ी ने पुरजोर मेहनत करके अपनी फिटनेस को विश्व स्तर का बनाया है. यह टीम आज तक की सबसे फिट भारतीय टीम है – भारतीय कोच, जोस ब्रासा, २६ फ़रवरी को
  • हॉकी वेशेषज्ञों का खेल नहीं है, इसमें बेसिक सिद्धांतों का बड़ा महत्त्व है, हमारी टीम के बेसिक बहुत कमजोर थे और हमने उन्हें मजबूत बनाने की पूरी कोशिश की है – भारतीय कोच, जोस ब्रासा, २६ फ़रवरी को
  • खेल प्यार जगाने का बेहतरीन जरिया है, यह मैच भारत और पाकिस्तान के भीच कड़वाहट मिटाने का सबसे अच्छा मौका है – भारतीय कोच, जोस ब्रासा, २६ फ़रवरी को 
  • हम दिमाग से खेलेंगे, न कि भावुकता से – भारतीय कोच, जोस ब्रासा, मैच से ठीक पहले
  • हमें टीम की पाकिस्तान पर बेहतरीन विजय पर गर्व है, हम हर खिलाड़ी और कर्मचारी को एक-एक लाख रूपये देने का एलन करते है – सुरेश कलमाड़ी, प्रेसिडेंट, भारतीय ओलंपिक असोसिएशन
उपरोक्त से साफ है जोस ने हॉकी और मेहनत पर ध्यान दिया और पाकिस्तान ने प्रेशर (?) और इमोशंस पर. नतीजा आपके सामने है. यह मैच खेलभावना की नफरत पर, मेहनत की अनुभव पर और आज की कल पर विजय का अनूठा उदहारण है. मैच के नतीजों से कुछ कहावतें चरितार्थ होती है: 
  • शाहिद अली खान – थोथा चना, बजे घना
  • शाहिद अली खान – बाजुओं में दम नहीं, हम किसी से कम नहीं
  • जोस ब्रासा – सफलता का कोई शार्टकट नहीं
  • जोस ब्रासा – कर के दिखायेंगे
  • सुरेश कलमाड़ी – हम नहीं सुधरेंगे
उम्मीद करता हूँ, ये हौंसला और एटीट्यूड भारतीय टीम में बरक़रार रहेगा
जय हो

About राहुल चौधरी

मैं विज्ञान से स्नातक और प्रबंधन से स्नातकोत्तर हूँ. अपनी सारी शिक्षा मध्यप्रदेश में पूरी की है. आजकल अहमदाबाद में भारतीय बहुराष्ट्रीय दवाइयों की कंपनी, जायडस कैडिला में मार्केटिंग हेड के पद पर कार्यरत हूँ. बचपन से लिखने और अपने विचारों को व्यक्त करने, लिखने और संगीत का शौक रहा है. समय की कमीं की वजह से नियमित तो नहीं लिख पता, पर जब भी खाली समय मिलता है, कुछ ना लिखता-पढता या सुनता-बजता रहता हूँ. visit me on www.rahulzydus.com

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