सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवारों को ही वोट देने की अपील(उर्दू अखबारों से)

मुसलमान तथा ईसाई दलितों को भी हिंदू दलितों जैसी सुविधा देने की मांग

हैदराबाद से प्रकाशित दैनिक मुंसिफ (30 जनवरी 2012) के अनुसार अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह ने सरकार से मांग की है कि वे 1950 में राष्ट्रपति द्वारा जारी आदेष को रद्द किया जाना चाहिए। इस आदेष के अनुसार यदि कोई दलित हिंदू धर्म या सिख धर्म को छोड़ कर कोई अन्य धर्म स्वीकार करता है तो वह अनुसूचित जाति में प्राप्त होने वाली सभी सुविधाओं से वंचित हो जाएगी। हबीबुल्लाह ने कहा कि यह आदेष के भावना के अनुरूप नहीं है इसलिए उच्चतम न्यायालय को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए और सभी दलितों को चाहे उनका धर्म कोई भी हो उन्हें आरक्षण की सुविधाएं प्राप्त होनी चाहिए।

सऊदी अरब से 35 ईसाई निष्कासित

हैदराबाद से प्रकाशित दैनिक मुंसिफ (2 फरवरी 2012) के अनुसार सऊदी अरब की सरकार ने इथोपिया के 35 ईसाईयों को देष से निष्कासित करने का हुक्म दिया है। मानवाधिकार संरक्षण गुट के प्रवक्ता ने कहा है कि ये ईसाई एक घर में प्रार्थना कर रहे थे। उस घर पर जद्दा के सैनिक अधिकारियों ने छापा मारा। सेना ने इस प्रार्थना सभा का आयोजन करनेवाली तीन महिलाओं को गिरफ्तार करके जेल में बंद कर दिया है। इससे पूर्व सेना ने इस मकान की तलाषी ली। ज्ञातव्य है कि सऊदी अरब में मुसलमानों को छोड़कर किसी भी अन्य धर्मावलम्बी पर किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने या कोई धार्मिक पुस्तक रखने पर प्रतिबंध है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इन ईसाईयों से सेना ने जबर्दष्त मारपीट की और उन्हें जबरन सऊदी अरब से निष्कासित कर दिया गया।

 

उर्दू से मोहब्बत या उर्दू का कत्ल

 

रोजनामा राष्ट्रीय सहारा में 2 फरवरी 2012 के अंक में अजीज बर्नी ने षिकायत की है कि समाजवादी पार्टी का जो चुनावी घोषणापत्र उर्दू में प्रकाषित किया गया है उसकी लिपि तो उर्दू है मगर उसका उर्दू भाषा से कोई दूर-दूर का रिष्ता नहीं है। बर्नी का कहना है कि जिस वक्त चुनावी घोषणापत्र को जारी किया गया तो उस वक्त मुलायम सिंह के साथ कोई भी मुस्लिम नेता मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि इससे मुलायम सिंह का मुस्लिम प्रेम और उर्दू प्रेम का पर्दाफाष हो गया है।

मुसलमानों से सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवारों को ही वोट देने की अपील

हिंदुस्तान एक्सप्रेस ने 7 फरवरी 2012 के अनुसार आॅल इंडिया मुस्लिम मजलिष मिसरावात के अध्यक्ष डाॅ. जफर उल इस्लाम खां ने सभी मस्जिदों के ईमामों और इस्लामी संगठनों को यह निर्देष दिया है कि वे मुसलमान मतदाताओं को इस बात के लिए प्रेरित करें कि वे आने वाले चुनाव में सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवारों को ही अपने वोट दें। इस अपील में कहा गया है कि चुनावों में वोट डालना हर मुसलमान का मिल्ली कर्तव्य है। इसलिए उन्हें वोट डालने में कोताही नहीं करनी चाहिए। ताकि मुसलमानों को उनका हक मिले। अपील में यह भी कहा गया है कि जहां पर कोई मुसलमान उम्मीदवार नहीं खड़ा हुआ है। वहां पर सेकुलर और साफ छवि वाले उम्मीदवारों को वोट दिए जाएं।

पाकिस्तान में उग्रवादी संगठन सक्रिय

रोजनामा राष्ट्रीय सहारा (4 फरवरी 2012) के अनुसार पाकिस्तान के गुप्तचर संगठनों ने सरकार को सूचना दी है कि उग्रवादी इस्लामी संगठन देष में पुनः सक्रिय हो गए हैं। उन्हें विदेषी सूत्रों से भारी आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। गुप्तचर सूत्रों के अनुसार इन उग्रवादी संगठनों ने नए नामों से नए खाते खुलवा लिए हैं।

ज्ञातव्य है कि पाकिस्तान सरकार ने गत वर्ष जैश-ए-मोहम्मद, तहरीखे इस्लामी, मिल्लते इस्लामिया, गाजी फोर्स, हरब अल तहरीर, जमियते उल फकरान और खैरूल इंषा आदि संगठनों के खातों पर पाबंदी लगा दी थी। इसके अतिरिक्त पाकिस्तान सरकार ने जिन अन्य उग्रवादी संगठनों को अवैद्य घोषित किया था। उनमें लष्कर झंगवी, सपा मोहम्मद, लष्कर-ए- तोयबा, सपा ताइबा, तहरीख नफाद शरियत, मोहम्मदी, अलकायदा, तहरीख जाफरियाह, जमियते अल अंषार, बलुचिस्तान लिब्रेषन आर्मी, इंषार अल इस्लाम, इस्लामिक स्टूडेंट्स मुवमेंट आॅफ पाकिस्तान, तहरीख तुलबान-ए-पाकिस्तान शामिल हैं। इनके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र संघ के जिन इस्लामी संगठन ने पाबंदी लगाने के लिए पाकिस्तान सरकार को निर्देष दिया था उनमें जमात-उल-दावा, अल खतर ट्रस्ट, अल रषीद ट्रस्ट और हरकत अल जिहाद इस्लामी शामिल हैं।

मिस्त्र के फिल्म स्टार को इस्लाम के तौहीन के आरोप में सजा

रोजनाामा राष्ट्रीय सहारा (4 फरवरी 2012) के अनुसार अरब जगत के सबसे लोकप्रिय हास्य कलाकार आदिल ईमाम को इस्लाम की तौहीन करने के आरोप में तीन महीने कड़ी कैद की सजा दी गई है। इसके अतिरिक्त उनपर 166 डाॅलर जुर्माना भी लगाया गया है।

 

कुवैत के चुनावों में इस्लाम समर्थक कामयाब

रोजनामा राष्ट्रीय सहारा ने 4 फरवरी के अंक में यह दावा किया है कि कुवैत की संसद की 50 सीटों में से 34 सीटों पर कट्टरवादी इस्लामिक दलों ने विजय प्राप्त की है। विजय प्राप्त करनेवालों में 23 का संबंध अखवान उल मुसलमिन (इस्लामिक ब्रदरहुड) और शेष का संबंध सल्फी जमात से है। उदारवादियों को केवल दो सीटें ही प्राप्त हुई हैं। ज्ञातव्य है कि गत वर्ष दिसंबर महीने में कुवैत में 9 जवानों के उग्र विरोध प्रदर्षनों के बाद कुवैत के अमीर ने संसद को भंग कर दिया था। विजयी दलों का संबंध कट्टरपंथी सुन्नी मुसलमानों से है।

 

पाकिस्तानी महिलााओं में बढ़ती नषे की प्रवृति

हैदराबाद से प्रकाशित दैनिक सियासत (1 फरवरी 2012) के अनुसार एक सरकारी सर्वेक्षण में यह रहस्योदघाटन हुआ है कि पाकिस्तान में नषे का इस्तेमाल करनेवाली 68 प्रतिषत महिलाएं शिक्षित हैं। यह सर्वेक्षण पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद, लाहौर, कराची आदि महानगरों में करवाया था। इस सर्वेक्षण के अनुसार नषे का इस्तेमाल करनेवाली 47 प्रतिषत महिलाएं काॅलेज की षिक्षा प्राप्त की हैं जबकि शेष महिलाएं भी शिक्षित हैं। 43 प्रतिषत महिलाएं मादक पदार्थ सहेलियों और मर्द दोस्तों से प्राप्त करती हैं। जबकि 15 प्रतिषत महिलाओं को उनके पड़ोसी मादक पदार्थ उपलब्ध कराते हैं। सर्वेक्षण के अनुसार पाकिस्तानी महिलाएं तनाव और शारीरिक पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए नषे का सेवन करती हैं। जबकि कुछ महिलाओं को उनके पतियों ने जबर्दष्ती नषीले पदार्थों के सेवन की आदत डाली है।

 

साभार : उर्दू  अनुवाद डेस्क ,भारत नीति प्रतिष्ठान

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  • इस सब के बावजूद हिन्दू हितों की बात करने वाले को सांप्रदायिक और ऐसे लोगों को धर्म-निरपेक्ष कहा जाता है..

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