लखनऊ में शिया और सुन्नियों के बीच खूनी झड़पें (Urdu Media)

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुसलमानों के दो फिरकों, शिया और सुन्नी में जमकर खूनी झड़पें हुईं जो कि तीन दिन तक जारी रही। इन झड़पों में दोनों की ओर से गोलियां चलीं और जमकर पथराव हुआ, जिनमें एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। दंगों की शुरुआत शियाओं के जुलूस ”मदहै सहाबा“ और सुन्नियों की ओर से निकाले गए जुलूस ”मोहम्मदी“ के समाप्ति पर हुई। दैनिक इंकलाब ने अपने 7 फरवरी के अंक में इन दंगों की समाचार को मुख्य समाचार के रूप में प्रकाशित करते हुए कहा है कि दंगों की  शुरुआत लखनऊ के थाना स्यादत गंज मोहल्ला दरिवालान और दरगाह हजरत अब्बास के आसपास के क्षेत्र में हुई। दंगों की शुरुआत नारेबाजी से हुई। बाद में हुई झड़पों में पेट्रोल बमों, दस्ती बमों और बंदुकों का इस्तेमाल किया गया। समाचारपत्र के अनुसार पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और हवाई फायरिंग करके स्थिति पर काबू पाने का प्रयास किया। समाचारपत्र के अनुसार दंगाईयों ने एक दर्जन दूकानों को लूटने के बाद आग लगा दी और कई दर्जन मकानों में लूटपाट की। शरारती तत्वों ने दरगाह के पास स्थित शेरू, चन्नू, महमूद और अनीस की दुकानों को आग लगा कर जला दिया। पथराव और फायरिंग में जख्मी होने वालों में रियाजुद्दीन, राजु, बिलाल, मोहम्मद कलीम वगैरह शामिल हैं।
लखनऊ ईदगाह के ईमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा है कि ये दंगे किसी गहरी  साजिश  के नतीजे हैं।
शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना शैफ अब्बास ने आरोप लगाया है कि प्रशासन दंगे रोकने में पूर्णतः विफल रहा है और सुन्नियों की हिंसा का  शिया निशाना बने हैं। उन्होंने इन सारे दंगों की जांच करवाने की मांग की है। इंकलाब ने समाचार के साथ जलती हुई दुकानों के चित्र भी छापे हैं।
रोजनामा राष्ट्रीय सहारा ने (7 फरवरी) के अंक में इस समाचार को प्रमुख समाचार के रूप में मुख्य पृष्ठ पर छापा है। समाचारपत्र ने लिखा है कि अंजुमन उस्मानिया के सदस्यों पर पथराव के कारण ये दंगे भड़के थे।
दैनिक इंकलाब ने 7 फरवरी के अंक में प्रकाषित एक संपादकीय में मुसलमानों से होषियार रहने की अपील की है। समाचारपत्र ने आरोप लगाया है कि चुनाव से पूर्व कुछ शक्तियां मुसलमानों में विभाजन करने का प्रयास कर सकती हैं। समाचारपत्र के अनुसार अमरोहा में एसएमएस भेज कर शिया  और सुन्नियों में झड़पें करवाने का प्रयास किया गया था। मगर लखनऊ में  शिया  और सुन्नियों में दंगे भड़काने में इस्लाम दुष्मन कामयाब रहे। संपादकीय में कहा गया है कि लखनऊ के बारे में सब जानते हैं कि इस नगर के माथे पर  शिया -सुन्नी दंगों का कलंक गत एक शताब्दी से लगा हुआ है। पष्चिमी और मध्य लखनऊ की सीटों पर  शिया और सुन्नी काफी संख्या में हैं। अब तक जितने भी दंगे हुए हैं वे इन्हीं एसेम्बली सीटों के महल्लों में हुए हैं। इस बार के चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने सुन्नियों को टिकट दिए हैं। किसी भी मजबूत  शिया  उम्मीदवार के मैदान में न होने के कारण भारतीय जनता पार्टी की नजरें षियाओं के वोटों पर लगी है। बीजेपी के कई समर्थक षिया संप्रदाय में मौजूद हैं जो कि दोनों फिरकों में नफरत पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। लखनऊ के मुसलमानों को ऐसे तत्वों से सावधान रहने की जरूरत है।
हमारा समाज ने 7 फरवरी के 2012 अंक में मुख्य समाचार के रूप में एक समाचार छापा है जिसका शीर्षक है- ”लखनऊ दंगों की गूंज दिल्ली पहुंची“। समाचारपत्र के अनुसार ईमाम रजा कमेटी के संयोजक एस. हैदर ने इन दंगों की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है। दूसरी ओर आॅल इंडिया मिल्ली काउंसिल के महासचिव डाॅ. मोहम्मद मंजूर आलम ने इन दंगों की निंदा करते हुए कहा है कि सभी मुसलमान एक हैं और उन्हें इन दंगों से दूर रहना चाहिए।
दिल्ली से प्रकाशित हमारा समाज ने 8 फरवरी के अंक में लखनऊ के दंगों पर एक संपादकीय लिखा है जिसका शीर्षक है ”आस्तीन के सांपों से खबरदार“। संपादकीय में इन दंगों के लिए बहुजन समाज और मायावती को दोषी ठहराया गया है। संपादकीय में कहा गया है कि षिया उलेमा मौलाना कलब जवाद ने यह चेतावनी दी थी कि कुछ स्वार्थी तत्व मुसलमानों के विभिन्न फिरकों में दंगे करवाने की साजिष कर रहे हैं। संपादकीय में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिनलोगों ने पथराव करके ये दंगे भड़काए हैं वे मुसलमान नहीं थे। क्योंकि मस्जिदों में कई लोग नकली दाढ़ी और टोपी पहनकर नमाज में शामिल होते हैं और दंगे भड़काने के बाद भाग जाते हैं। समाचारपत्र ने मुसलमानों से अपील की है कि वे षिया सुन्नी के भेदभावों को भूलकर मुसलमान उम्मीदवारों को कामयाब बनाएं।
रोजनामा राष्ट्रीय सहारा 9 फरवरी के अंक में पांच काॅलम में इन दंगों के बारे में समाचार विष्लेषण प्रकाषित करते हुए यह मत व्यक्त किया है कि इन दंगों के पीछे राजनीतिक उद्देष्य है।  शिया नेता सैफ अब्बास नकवी एवं युसूफ अब्बास ने कहा है कि ये दंगे दो दिन से जारी है और प्रशासन इन पर नियंत्रण करने में विफल रहा है। ये दंगे ऐसे तत्वों ने करवाए हैं जो कि मुसलमानों के मतों में विभाजन चाहते हैं। सुन्नी बोर्ड आॅफ इंडिया के शहाबुद्दीन खान ने भी इन दंगों के पीछे राजनीतिक पार्टियों का हाथ बताया है। उन्होंने षिया सुन्नी दोनों संप्रदायों से अपील की है कि वे मुसलमान होने के नाते एकजुट हो जाएं।
उर्दू मीडिया डेस्क , भारत नीति प्रतिष्ठान

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  • अफगानिस्तान, पाकिस्तान, मिश्र और लीबिया में भी जांच कराई जाए, हो सकता है वहाँ भी हाथ हो…

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