अक्सर हादसों दुर्घटनाओं के आंकड़े मीडिया में गलत आते रहते हैं। हालांकि अखबारों की मजबूरी होती है कि वे खबर को अपने सभी डाक संस्करण में समेटे और जल्दी में या यों कहें कि पहले खबर देने की आपाधापी के बीच प्रथमदृष्टा में जो भी सूचना मिली उसे खबर बना कर छाप दिया जाता है। हालांकि उस खबर के फालोअप पर ध्यान नहीं जाता है। नतीजन खबर के आंकडें में विरोधाभास अलग अलग समाचार पत्रों में साफ दिखने लगता है। वैसे में खबर की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है और सवाल उठने लगता है मीडिया के भरोसे का। मीडिया के टूटते भरोसे के पीछे बाजारवाद सबसे बड़ा कारण लगता है। साथ ही खबर को लेकर अखबार का गंभीर न होना भी एक कारण है। बाजार का मीडिया पर बढ़ता दबाव इतना ज्यादा हावी है कि इसने मीडिया के संवेदना को भी प्रभावित कर रखा है। खबर क्या है उस पर काम नहीं होता। बस खबर को जारी कर देना है। उसकी पुष्टि करने की जहमत आज के पत्रकार नहीं उठाते। ऐसे में गलत खबरों का प्रकाशन एवं प्रसारण होना आम बात है और खबर के प्रसारण प्रकाशन के बाद खबर के अपुष्ट होने पर खण्डन का छपना इस बात को दर्शाता है कि मीडिया खबर के मामले में गंभीर नहीं है
अक्सर हादसों दुर्घटनाओं के आंकड़े मीडिया में गलत आते रहते हैं। हालांकि अखबारों की मजबूरी होती है कि वे खबर को अपने सभी डाक संस्करण में समेटे और जल्दी में या यों कहें कि पहले खबर देने की आपाधापी के बीच प्रथमदृष्टा में जो भी सूचना मिली उसे खबर बना कर छाप दिया जाता है। हालांकि उस खबर के फालोअप पर ध्यान नहीं जाता है। नतीजन खबर के आंकडें में विरोधाभास अलग अलग समाचार पत्रों में साफ दिखने लगता है। वैसे में खबर की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है और सवाल उठने लगता है मीडिया के भरोसे का। मीडिया के टूटते भरोसे के पीछे बाजारवाद सबसे बड़ा कारण लगता है। साथ ही खबर को लेकर अखबार का गंभीर न होना भी एक कारण है। बाजार का मीडिया पर बढ़ता दबाव इतना ज्यादा हावी है कि इसने मीडिया के संवेदना को भी प्रभावित कर रखा है। खबर क्या है उस पर काम नहीं होता। बस खबर को जारी कर देना है। उसकी पुष्टि करने की जहमत आज के पत्रकार नहीं उठाते। ऐसे में गलत खबरों का प्रकाशन एवं प्रसारण होना आम बात है और खबर के प्रसारण प्रकाशन के बाद खबर के अपुष्ट होने पर खण्डन का छपना इस बात को दर्शाता है कि मीडिया खबर के मामले में गंभीर नहीं है


sir picture aacha dalwaya hai aapne.aisa hai ki mai to picture dekh ker hansh padi per a littel bit muskaan woh bhi apne liye nahi sabke liye.ish lekh ko mai jarur padh lungi.”sawal media ke bhrose ka hai.reply kijiyega