बाबा को बदनाम करने के लिए 5 दिन में 1700 करोड़ का विज्ञापन

बाबा रामदेव को बदनाम करने के लिए 5 दिनों में टेलीविजन मीडिया पर खर्च की गई राशि श्री बाबा रामदेव की 17 साल की संपूर्ण संपत्ति से भी अधिक है |

10 second TV ads charges = 10 lacs Rs.

10 hrs in a day for a channel = 35 crore

5 days for a channel = 175 crore

10 such channel for 5 days = 1750 crore

इलेक्ट्रोनिक मीडिया की ख़बरों के पीछे विज्ञापन का अंकगणित कितना प्रभावी है इसकी एक छोटी सी झलकी ऊपर की तालिका से स्पष्ट हो जाती है |

पिछले दो सालों में पेड न्यूज को लेकर देश भर में बड़ी बहस शुरू हुई थी | स्वर्गीय प्रभाष जोशी की पहल पर उनके कई साथी पत्रकारों ने इस पर काम भी किया , रिपोर्ट भी बनी लेकिन सरकारी स्तर पर इसको रोकने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये | ” पेड न्यूज “, एडवर्टोरियल , जैसे शब्द आज पत्रकारिता में अपनी स्वीकार्यता बना चुके हैं | सरकारी-गैरसरकारी विज्ञापन चैनलों और अख़बारों की जुबान पर ताला लगा चुके हैं और उनकी आँखों पर सरकारी चश्मा चढ़ चुका है | आज मीडिया वही दिखाती है जो सरकार दिखाना चाहती है | सरकारी विज्ञापन कब और किस उद्देश्य से जारी किये जा रहे हैं इस पर राष्ट्रीय बहस की जरुरत है |

सरकारी प्रचार और विज्ञापन को लेकर दिशा-निर्देश में चार केंद्रीय बिंदु हैं – यह सरकार की जिम्मेदारियों से जुड़े हुए हों, सीधे-सपाट तरीके से उद्देश्य की पूर्ति करते हों, वस्तुनिष्ठ हों और उन्हें प्रचारित किए जाने की वजह साफ हो, वे पक्षपातपूर्ण या विवादात्मक न हों, किसी पार्टी के राजनीतिक प्रचार का औजार न हों और ऐसी समझदारी से किए जाएं कि वे जनता के पैसों के इस खर्च की न्यायसंगत वजह पेश करते हों।*1

भारत में आज तक पाठकीय संप्रभुता बन ही नहीं पाई. आगे के समय में यह और भी संभव नहीं दिखाई देता है क्योंकि यह वित्तीय मुद्रा व मुद्रा के वर्चस्व का युग है | राजनीति और मुख्यधारा के मीडिया दोनों पर पूंजी का दबाव है | उन्होंने आगे कहा कि पहले जनाधार और कैडर आधारित पार्टियां मुख्यधारा के मीडिया को अपने लिहाज से महत्वहीन मानती थीं | लेकिन जैसे-जैसे समय बदला जनाधार कमजोर हुआ, पार्टियां कैडरविहीनता की स्थिति में आने लगीं, पार्टियां मीडिया के द्वारा छवि निर्माण करने लगीं | पार्टियां मुख्यधारा के मीडिया का इस्तेमाल कर उन पैसिव वोटरों को प्रभावित करने लगीं जो पाठक-दर्शक है | ऐसे में ही पार्टियों और मुख्यधारा के मीडिया का नापाक गठबंधन शुरू हुआ | पत्रकारिता तो नैसर्गिक प्रतिपक्ष है |*2

लेकिन वर्तमान हालात में पत्रकारिता / मीडिया जो लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहलाती है उसका चेहरा वही है लेकिन अन्दर का चरित्र बदल चुका है | मीडिया का नैसर्गिक प्रतिपक्ष होने की बात बार-बार बेमानी साबित हो रही है | सत्ता के इशारे पर शीर्षासन करने वाली मीडिया इमेज बनाने और बिगाड़ने के खेल में माहिर हो गयी है | बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के मामले में मीडिया यही तो कर रही है | केन्द्रीय सत्ता के इशारे पर मीडिया ने रामलीला मैदान में हुई पुलिसिया बर्बरता की गैर-लोकतांत्रिक कार्यवाई पर सरकार को घेरने के बजाय बाबा रामदेव , आचार्य बालकृष्ण और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सत्याग्रह से जुडे प्रमुख लोगों को ही निशाने पर ले लिया है | आखिर क्या वजह है कि एक तरफ इलेक्ट्रोनिक मीडिया बाबा रामदेव की जड़ें खोदने में लगी हुई है दूसरी तरफ हर चैनल पर “भारत निर्माण ” के विज्ञापन की बाढ़ आ गयी है ?

निश्चित रूप से यह विज्ञापन सरकारी घुस है जो सरकारी अजेंडे के मुताबिक खबरों के प्रसारण हेतु मीडिया को दिया गया है | बाबा रामदेव प्रकरण में मीडिया की भूमिका संदिग्ध और जांच का विषय है | यही मीडिया थी जिनके प्रसारण की सुबह बाबा रामदेव के योग क्लास से होती थी | बाबा रामदेव को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बनाने में इसी मीडिया ने सालों दिन-रात की मेहनत की है | आखिर क्या वजहें थी कि मीडिया को उस दौरान बाबा रामदेव की संपत्ति और उनके तथाकथित फर्जीवाड़े का पता नहीं चल पाया ? आखिर बाबा रामदेव से जुडे दर्जनों खुलासे, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर यूपीए सरकार और काले धन को लेकर कांग्रेस पर बाबा के सीधे प्रहार के बाद , ही सामने आने लगे ? बहरहाल , ऊपर दिए गये सरकारी विज्ञापन के आंकडें चीख-चीख सारे सवालों के जबाव दे रहे हैं |

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*1 सरकारी विज्ञापनों के बहाने ‘प्रचार’ , मीडियाखबर.कॉम

*2 वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र दुबे के विचार , हाशिया ब्लॉग

 


9 Comments

  • this is very useful information .

  • हमारे देश की मीडिया का कोई चरित्र नहीं है, यह केवल लाभ पाने की ओर ही दौड़ लगाती है।

  • मीडिया भी हमारी कहां है. अधिकतर बड़े चैनल तो विदेशी हैं.

  • ye tanashahi sashan hai par hum kar bhi kya sakte hai

  • काका हाथरसी बरसों पहले जो लिख गए वो लगता है अब भी ज्यों की त्यों है….
    “जय बोलो बईमान की !”
    —————————
    मन, मैला, तन ऊजरा, भाषण लच्छेदार,
    ऊपर सत्याचार है, भीतर भ्रष्टाचार।
    झूटों के घर पंडित बाँचें, कथा सत्य भगवान की,
    जय बोलो बेईमान की !

    प्रजातंत्र के पेड़ पर, कौआ करें किलोल,
    टेप-रिकार्डर में भरे, चमगादड़ के बोल।
    नित्य नई योजना बन रहीं, जन-जन के कल्याण की,
    जय बोल बेईमान की !

    महँगाई ने कर दिए, राशन-कारड फेस
    पंख लगाकर उड़ गए, चीनी-मिट्टी तेल।
    ‘क्यू’ में धक्का मार किवाड़ें बंद हुई दूकान की,
    जय बोल बेईमान की !

    डाक-तार संचार का ‘प्रगति’ कर रहा काम,
    कछुआ की गति चल रहे, लैटर-टेलीग्राम।
    धीरे काम करो, तब होगी उन्नति हिंदुस्तान की,
    जय बोलो बेईमान की !

    दिन-दिन बढ़ता जा रहा काले घन का जोर,
    डार-डार सरकार है, पात-पात करचोर।
    नहीं सफल होने दें कोई युक्ति चचा ईमान की,
    जय बोलो बेईमान की !

    चैक केश कर बैंक से, लाया ठेकेदार,
    आज बनाया पुल नया, कल पड़ गई दरार।
    बाँकी झाँकी कर लो काकी, फाइव ईयर प्लान की,
    जय बोलो बईमान की !

    वेतन लेने को खड़े प्रोफेसर जगदीश,
    छहसौ पर दस्तखत किए, मिले चार सौ बीस।
    मन ही मन कर रहे कल्पना शेष रकम के दान की,
    जय बोलो बईमान की !

    खड़े ट्रेन में चल रहे, कक्का धक्का खायँ,
    दस रुपए की भेंट में, थ्री टायर मिल जायँ।
    हर स्टेशन पर हो पूजा श्री टी.टी. भगवान की,
    जय बोलो बईमान की !

    बेकारी औ’ भुखमरी, महँगाई घनघोर,
    घिसे-पिटे ये शब्द हैं, बंद कीजिए शोर।
    अभी जरूरत है जनता के त्याग और बलिदान की,
    जय बोलो बईमान की !

    मिल-मालिक से मिल गए नेता नमकहलाल,
    मंत्र पढ़ दिया कान में, खत्म हुई हड़ताल।
    पत्र-पुष्प से पाकिट भर दी, श्रमिकों के शैतान की,
    जय बोलो बईमान की !

    न्याय और अन्याय का, नोट करो जिफरेंस,
    जिसकी लाठी बलवती, हाँक ले गया भैंस।
    निर्बल धक्के खाएँ, तूती होल रही बलवान की,
    जय बोलो बईमान की !

    पर-उपकारी भावना, पेशकार से सीख,
    दस रुपए के नोट में बदल गई तारीख।
    खाल खिंच रही न्यायालय में, सत्य-धर्म-ईमान की,
    जय बोलो बईमान की !

    नेता जी की कार से, कुचल गया मजदूर,
    बीच सड़कर पर मर गया, हुई गरीबी दूर।
    गाड़ी को ले गए भगाकर, जय हो कृपानिधान की,
    जय बोलो बईमान की !

  • 120 करोड़ लोगों को बेवकूफ बना रहे राजनीतिक दल से एक भारतीय का सवाल।
    यदि अन्ना हज़ारे या बाबा रामदेव जनता के चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हैं तो फिर क्या कांग्रेस ये जवाब दे सकती है कि स्वतंत्रता संग्राम में भारतीयों का नेतृत्व करने के लिए महात्मा गांधी का चयन किस चुनाव में हुआ था और किसने वोट किया था?

  • आर.ऍम.शर्मा "कौशिक"

    sara khel paise ka hai bhaya tabhi to khilaft karne walon ko katghre men aur brashtachar karne walon par parda dala jata hai….aam admi ko sach dikha diya to sarkar se kya milega. thenga ?

  • 2004 से भारत में इटालियन एडवीज एंटोनिया अलवीना माइनो उर्फ सोनिया गांधी की गुलाम एक ऐसी देशविरोधी सरकार सतासीन है जिसका एकमात्र शत्रु भारत और भारतीय संस्कृति है।
    देशहित में अबाज वाले क्रांतिवीरों को कुचलने के लिए ये चोरों और गद्दारों की सरकार किसी भी हद तक गिर सकती है।

  • sonia is desh ko barbad karne ke liye hi itali se aayi hue hai .. ye pop ki sajish hai is desh ko christian convert karna nahi to muslimo ke terrorism ka fayada uthakar desh ko barbad karne kaaa…

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