कलेजा ठंडा हुआ की नहीं ?

एक हफ्ते से भी ज्यादा समय तक चले हाई भोल्टेज फालतू के ड्रामे का अब पटाक्षेप हो चुका है | शोएब ने आएशा को तलाक दे दिया और अब आने वाले दिनों में सानिया के साथ उनकी शादी हो सकेगी | सानिया शोएब की दूसरी पत्नी कहलाएंगी और शोएब सानिया के पहले पति | हां… और शोएब ने आएशा को 15 हजार रुपये का जुर्माना भी दिया है | तो भाई …..कलेजा ठंडा हुआ की नहीं ? अरे मैं आपसे ही पूछ रहा हूँ मेरे भाई …….कलेजा ठंडा हुआ की नहीं ? की और भी कुछ कसर अभी बाकी रह गया है | बाप रे बाप ,…सानिया और शोएब से ज्यादा हल्ला तो आप लोगों ने मचा रखा था | आएशा से ज्यादा मानशिक कलेश और पीड़ा तो भाई आपलोगों को हो रही थी | तो …..अब सब बढ़िया है ना ?

आप लोगो को भी शोएब मल्लिक से हर्जाने में कुछ मांग ही लेना चाहिए था ,, आखिर इतनी फजीहत जो उठाई आपने | चलिए, आपने इतने बड़े सामाजिक कार्य में अपना योगदान दिया है की अब तो आपकी प्रशंसा भारत सरकार को विश्व स्तर पर करनी चाहिए | मेरी माने तो शांति प्रयास के क्षेत्र में नोबेल के लिए सामूहिक रूप से भारतीय मीडिया को इस बार नामांकन देना चाहिए | वाह.. वाह क्या बात है ! आज की भारतीय मीडिया अगर लैला-मजनू, हीर-रांझा, रोमियो-जूलियट, जैसे लोगों के काल में प्रभावी रहती तो निश्चित तौर पर उनके प्रेम की आज कुछ अलग कहानी होती | लैला-मजनू, हीर-रांझा, रोमियो-जूलियट और इनके जैसे जितने भी चर्चित प्रेमी जोड़े थे , उन सबो के नाती पोता या खानदान का अस्तित्व आज कही ना कही जरुर कायम रहता |

मैं अपने मीडिया भाइयों से एक सवाल जरुर पूछना चाहता हूँ की, अगर किसी बड़े हस्ती की शादी हो रही होती है तो इसमें आप इतना उछल-कूद क्यूँ मचाने लगते है ? और ऐसा भी देखा जाता है की आपके उछल-कूद मचाते ही कुछ ना कुछ बखेड़ा खड़ा हो ही जाता है | मुझे अभिषेक बच्चन की शादी की याद आती है…जहाँ जिस दिन बच्चन परिवार के मुह से शादी का “श” निकला था ,उसी पल उसी समय से आप सभी अपनी मंडली लिए उनके दरवाजे पर बैठ गये थे | शादी का इतना हल्ला मचाया की ना जाने रातो रात कहाँ से अभिषेक की एक प्रेमिका उडती हुई,  चली आई | और इसके बाद आपको तो शादी में अलग से खूब चटकारा लगाने का मौक़ा मिला था | क्या आपको याद है ..और ना जाने कितने ही सवालों और जवाबो का बौछार आप उस समय करते नजर आये थे क्या उसका कोई ऐसा असर हुआ जिसने भारतीय समाज की परिभाषा को बदल कर रख दिया ?

आपने जो कवरेज सानिया की शादी को लेके अब तक किया है , क्या वाकई ये इतना जरुरी था | आप तो येही कहेंगे की जो दर्शक देखना चाहते है , हम वही तो दिखाते है | तो भईया दर्शकों की इतनी बड़ी फीडबैक आपको कहाँ से मिल जाती है ? क्या सही में दर्शक येही देखना चाहते है या फिर ??? सानिया-शोएब और आएशा का मामला सुलझा तो मीडिया में इसकी चहक इतनी जबरदस्त दिखी की पूछिए मत | हमारे एक चैंनल के एंकर ख़ुशी में ऐसे फुले जा रहे थे की आधे घंटे के कार्यक्रम में उन्होंने शोएब मल्लिक की जगह बार बार शोएब अख्तर का नाम लेना शुरू कर दिया था ! अरे भाई शोएब अख्तर को तो बक्श दीजिये , वो तो बेचारे ऐसे ही ..! आप भी ना …एक मामला सुलझा नहीं की एक और बन्दे को लपेटने के चक्कर में लग गये |

तो..अब आगे का क्या प्रोग्राम है ? अब तो भोज-भात की तैयारी में लग गये होंगे ? शादी का डेट भी तो पड़ ही चुका है | अरे हाँ……….एक बात का तो जिक्र करना भूल ही गया था …पाकिस्तान से एक खबर आई इस मामले के सुलझने के बाद , वहां के जनसँख्या कल्याण मंत्री फिरदौस आशिक अवान ने सानिया और शोएब को फैमिली प्लानिंग किट देने की योजना बनाई है | वाह.. वाह….. आशिक साहब क्या योजना बनाई है …आप तो बधाई, दुआ, सलाम, आदाब, और इस्तकबाल के पात्र है | लगता है आप भी बस इस इंतज़ार में ही थे कब ये अधकपारी मामला सुलझे और कब आप अपनी जन्नत से आयातित उपहार सानिया और शोएब के हवाले करने की घोषणा करे | चलिए बड़े सही समय पर आपने इस उपहार को देने का एलान किया | अरे शादी विवाह तो अपने जगह पर है …पर पृथ्वी का संतुलन भी तो बनाए रखना मानवता का ही धर्म है | गुड |

तो भक्तजनों …मेरा मतलब मीडियाजनों अब दंतेवाड़ा के विषय में आपके क्या विचार है ? उन जवानो की विधवाओं से मिले की नहीं ? कहीं उनके आँसू की धार , किसी बड़ी हस्ती के विवाह समारोह में बह रहे पैसे की धार से कम तो नहीं हो गई ? कलेजे को चीर देने वाली उनकी चीत्कार कहीं , डीजे की झंकार में घुट कर तो नहीं रह जाएगी ? एक पाकिस्तानी भारत में आकर कर शादी करता है ,,इसका ढोल तो आप खूब जोर जोर से पिटते है , मगर एक हिन्दुस्तानी एक वक़्त की रोटी को तरसता है, तब आप क्यूँ नहीं नजर आते ? राम मनोहर लोहिया का जन्म शताब्दी नेताओं को भले ना याद रहे ,,आप तो कुछ इस दिशा में प्रयास करे | बाबू जगजीवन राम की जयंती मनी,,क्या आम लोगों तक ऐसी ख़बरों को पहुंचाना कोई प्रमुखता है की नहीं ?

याद रहे पपीते से गणेश जी निकले या फिर तरबूज से हनुमान जी , अगर येही ख़बरों की पहचान है तो निसंदेह पित्त पत्रकारिता अपनी पराकाष्ठा पर विधमान है | सानिया विवाह करे या अभिषेक ,आम आदमी की रत्ती भर भी परेशानी इससे कम नहीं होने वाली है | मीडिया और डाक्टरी इन दोनों विधा का सबसे बड़ा गुण और सबसे बड़ी समानता है, आम जन के दुःख, परेसानी, और मुसीबतों से उन्हें हर हाल में निजात दिलाना | मगर हम सभी मीडिया वाले अगर ऐसे ही खबरों का तमाशा बनाते फिरेंगे तो देश में एक ना एक दिन पत्रकारिता प्रायोजित अराजकता की शुरुआत हो ही जाएगी  | जो जरुरी है वहां तक तो हम पहुँच ही नहीं पाते और गैरजरूरी बातों को तेल-मसाला लगा कर दिन भर दर्शकों के आगे परोसते रहते है | चौथा खम्बा कहलाने का अगर हमें अधिकार मिला है तो हम इसका सम्मान कर अपने मूल धर्म को समझे | अन्यथा ये तो हम सभी जानते है की अति सर्वत्र  वर्जयेत |

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