भारतीय सिनेमा में अपने आवाज़ से जीवनपर्यंत ही किवदंती बन चुके मन्ना डे को 2007 का दादा साहब फाल्के पुरूस्कार देने की घोषणा की गई है। सूचना व प्रसारण मंत्रालय के नज़दीकी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस हफ्ते पांच सदस्यों वाली एक समिति ने मन्ना दा का नाम इस पुरूस्कार के लिए सुनिश्चित किया।
मन्ना डे भारतीय सिनेमा के बेहतरीन प्लेयबैक गायकों में से एक है। मुकेश, रफी, हेमंत कुमार, तलत महमूद, किशोर कुमार जैसे पाश्र्व गायकों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाना बड़ा ही मुश्किल काम था। मगर मन्ना डे एक ऐसे अनूठे गायक थे जो किसी एक कलाकार की आवाज़ बनने के बजाए उन्होंने सबके लिए अपने अनूठे अंदाज में गाना गाया था। अपने इसी अनूठे अंदाज के कारण ही मन्ना डे संगीत के इन महान हस्तियों के दौर में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने में कामयाब रहें, और अपने आप को जीवित ही किवदंती बना डाला। बॉलीवुड़ संगीत में उनकी बादशाहत 1950 से 1970 तक रही थी। मन्ना डे ने कई सदाबहार गाने गाये हैं। इन गानों की फेहरिस्त तो काफी लम्बी हैं, क्योंकि मन्ना डे ने अभी तक 3500 गाने गाए हैं। मगर कुछ गाने ऐसे जो उनके नाम के साथ ही जु़बान पर चले आते हैं। इनमें ॔॔ऐ मेरी जोहरा जबी तुम्हें मालूम नहीं, तू अभी तक है हंसी और मैं जवान’’ और ॔मेरे साजन है उस पार’’ का नाम प्रमुख है।
जिस समय उन्हें दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित करने की घोषणा की गई उस समय में वे न्यू यॉर्क में एक कल्चरल शो में शिरकत करने गये थे। 90 वर्ष के आयु में भी मन्ना दा के अंदर एक अलग ही जोश है जो शायद संगीत साधना का ही नतीजा है। क्योंकि शास्त्रीय संगीत जीवन में आन्नद की अनूभूति करवाता है और मनुष्य को एक लम्बी आयु प्रदान करता है। जीवन के इस पायदान पर भी मन्ना डे प्रतिदिन क्लासीकल संगीत का रियाज करते हैं।
मन्ना डे को यह सम्मान मिलने से सिनेमा जगत में एक अलग ही चहलपहल देखने को मिली। फिल्म बिरादरी में खुशी और नाराज़गी का मिलाजुला माहौल देखने को मिला। लोगों में इस बात को लेकर नाराज़गी थी कि उन्हें यह सम्मान बहुत देर से दिया जा रहा है। मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांतप्यारेलाल के प्यारेलाल का कहना था कि ॔॔मुझे यह ख़बर सुनकर बहुत अच्छा लगा, लेकिन मेरे ख़्याल से उन्हें यह सम्मान बहुत देर से मिला है।’’ पाश्र्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति का कहना है कि ॔॔यह सम्मान उन्हें बहुत पहले मिल जाना चाहिए क्योंकि वे उन संगीताकारों में से एक है जिन्होंने आम जनता को क्लासिकल म्यूजिक का आनंद लेना सिखाया है। पाश्र्व गायक अभीजीत और म्यूजिक डायरेक्टर अन्नू मलिक ने भी कुछ ऐसा ही कहा। अभीजीत ने मन्ना डे को संगीत का द्रोणाचार्य बताया तो अन्नू मलिक ने उन्हें एक महान कलाकार और एक अच्छा इंसान बताया है। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि मन्ना दा ने मुझे और मेरे जैसे उभरते कई युवा संगीतकारों के हौसले अफ्जाई किये है।


आहा…. मन्ना डे को पे पुरस्कार बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था | उन्होंने कई ऐसे गीत गाये हैं जो उस समय कोई और गा ही नहीं सकता था :
* लगा चुनरी मैं दाग छुपाऊं कैसे
* इ भाई जरा देख के चलो
* सुर ना सजे क्या गाऊं मैं
* हरिवंस राय बच्चन की मधुशाला
…..