२१ वीं सदी में ऑनलाइन एक्टिविज्म का जोर

सोशल नेटवर्किंग का जोर शहरों से होता हुआ कस्बाई इलाकों तक जा पहुंचा है . कम -पढ़े लिखे लोगों में भी पी आर यानी पब्लिक रिलेशन का बड़ा क्रेज है .पब्लिक रिलेशन को बढ़ते संचार माध्यमों ने एक नई उंचाई और नए मायने दिए हैं . लोगों से मेल-जोल के व्यक्तिगत फायदे हैं और साथ ही यह वृहत पैमाने पर सामाजिक जागरूकता और सक्रियता को बढ़ावा दे रहा है . वर्तमान ई -काल में ब्लॉग ,वेबसाइट , फेसबुक ,ऑरकुट व ट्विटर जैसे ऑनलाइन माध्यम ,पारंपरिक मीडिया से आगे बढ़ कर सामाजिक आन्दोलनों को पोषित कर रहे हैं . बीता दशक ई-क्रांति का गवाह रहा है जिसने समाज में ना जाने कितनी परिवर्तनकारी मुहीम को पैदा किया .२१ वीं  सदी के शुरुआत में ऑनलाइन एक्टिविज्म का व्यापक प्रभाव दिखाई पड़ता है . जेसिका लाल ,प्रियदर्शन मट्टू ,नीतीश कटारा हत्याकांड हो या उपहार अग्निकांड, अपराधियों को सजा दिलाने में कानून व्यवस्था पर दबाव बनाने में ऑनलाइन मंच की भूमिका को भुला नहीं जा सकता . सोशल एक्टिविज्म के इस सशक्त मंच का सदुपयोग यहीं ख़त्म नहीं होता बल्कि ग्लोबल वार्मिंग ,वन्य जीव संरक्षण ,जल संरक्षण ,कन्या भ्रूण हत्या व सूचना के अधिकार जैसे अनेक सामाजिक मुद्दों को लेकर संघर्ष किया जा रहा है . हजारों गैर सरकारी संगठनों के साथ सरकारी मंत्रालय भी जनहित के कार्यक्रमों तथा अपने कामकाज की जानकारी देने के लिए ऑनलाइन मंच को प्राथमिकता दे रहे हैं .अब तो लोकसभा चुनाव से लेकर छात्रसंघ चुनावों में भी ऑरकुट ,फेसबुक व ब्लॉग की मदद ली जा रही है एल० के० आडवानी की ब्लोगिंग को या शशि थरूर की ट्वीटिंग ,ये एक बड़े बदलाव के द्योतक हैं . नए दशक में ऑनलाइन माध्यमों का प्रसार जितनी तेजी से बढेगा उतनी हीं तेजी से इस सामाजिक बदलाव के हथियार की धार भी तेज होगी . 

1 Comment

  • आपने एल के आडवानी के ब्लॉग का जिक्र किया है, कृपया उनके ब्लॉग का पता बताने का कष्ट करें। अग्रिम धन्यवाद!

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