चौथा खंभा|Shortlink: 2010/02/18 10:06 pm

सेक्स / यौन सर्वेक्षण के बहाने

6 Comments

  • जयराम "विप्लव"

    आपने सच कहा है इसका हम समर्थन करते हैं कि यह अच्छे समाज के लिया सही सन्देश नहीं है

  • आप इंडिया टुडे और आउटलुक कि बात कर रहे है, जो १५ दिनों में लोगो तक पहुचती है, लेकिन देश कि सबसे समृद्ध और बड़े लोगो कि अख़बार “टाइम्स ऑफ़ इंडिया” यही काम रोज कर रही है

  • भैया देश के लोगो में सेक्स कि भूक बढ़ गई है, इसलिए फिल्म से लेकर पोस्टरों तक अश्लीलता से रंगी पड़ी है, अब तो रोज देखने व पढने वाली जागरूकता कि पुस्तकों में भी सेक्स को डालकर इनका बाज़ार बढाया जा रहा है.

  • सेक्स, सेलेब्रिटी, स्पोर्ट्स और क्राइम के अलावा मीडिया को और आता भी क्या है.

  • अब इस जग में देखो ऐसा होगा, सब इंसा से बड़ा पैसा होगा…..,
    कोई मजबूरी में लाज उघारे, कोई लालच से लाचार होगा…..

  • मागज़ीने वाले सिर्फ पैसा कमान चाहते hain, उनको देश कि या फिर किसी भी समाज कि कोई परवाह नहीं होती है. अखबार वाले भी ऐसा ही करते हैं जब कि इन लोंगों को देश के लिए काम करना चाहिए

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