चौथा खंभा|2008/11/19 2:52 pm

संचार जगत की नई विधा ब्लॉग्गिंग के सभी महारथियों और पाठको का अभिनंदन

नमस्कार, हिन्दी ब्लॉग्गिंग के इस चमत्कारिक विधा से
जुडकर काफी प्रसन्नता हुई । काफी दिनों की सोच विचार के बाद आज यह इच्छा पुरी हो सकी है। दरअसल , लिखने का यह कीडा ही मुझे यहाँ तक खीँच लाया । ब्लॉग की चर्चा अखबारों मे पढ़ते-पढ़ते , ब्लॉग पढने की इच्छा जगी और ब्लॉग मे अपने जैसे लोगों को पाकर ख़ुद भी लिखने का इरादा बुलंद किया । उसी बुलंद इरादे तथा देश के राजनीतिक हलकों मे चल रही उठा-पटक को लेकर मन मे हिलोरें लेते विचारों ने हमेशा प्रेरित किया । आज हमारे भारतवर्ष की जो राजनीतिक दुर्दशा है वैसी इतिहास मे शायद कभी न थी । विचारो का ये खोखलापन तो तभी से शुरू हो गया था जब हमने मौलिकता को त्याग कर , स्थानीय परिस्थितियों को नजरंदाज कर संविधान के धाराओं का विदेशीं से आयात किया था। राजनीति तब भी गन्दी थी और आज भी है। हालाँकि गंदगी का ये प्रतिशत कल कम था आज बढ़ गया है। सत्ता पाने की लालसा ने जहाँ बटवारे की स्थिति उत्पन्न की , तो वहीं आजादी दिलाने का श्रेय पाने की चाहत ने उसे अंजाम तक पहुचाया । सत्ता और लोकप्रियता का वही पुराना खेल आज हमारे महँ नेताओं के आदर्श बन चुका है । राजनीति के आलावा जिन अन्य खम्भों पर लोकतंत्र की नीव टिकी होती है वो स्तम्भ भी दिनों दिन जर्जर होते जारहे है। मिडिया मे भी अब भ्रष्टाचार का बोल बाला और पक्षपात पूर्ण रवैया बढ़ गया , ऐसे संक्रमण काल मे’” सच बोलना मना है” का निर्माण सच्चाई की आवाज बुलंद करने तू की गई है। आशा है आप पाठकगन इसे पसंद करेंगे ।

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