Author: शशि सिन्घल
मैं शशि सिन्घल उत्तर प्रदेश के अपनी लाजवाब व सुन्दर धरोहर के लिए समूचे विश्व में प्रसिद्ध शहर आगरा में पली - बढ़ी हूं । यदि हम आज से पन्द्रह - सोलह बरस पीछे जाएं तो पाएंगे कि उस दुर में लड़कियों का घर से बाहर कदम रखना तो दूर उन्हें ज्यादा पढ़ने लिखने की इजाजत तक न थी । मगर इन विषम परिस्थितियों में मैंने आगरा कॉलेज आगरा से संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर की उपाधि ली । आगे मैंने प्रोफेसर बनने की चाहत में इसी विषय से पी एच डी करने की शुरूआत की । मगर भाग्य को कुछ और मंजूर था जो मैं अपने एक सहपाठी की सलाह पर पत्रकारिता के क्षेत्र में कूद पडी़ । उस समय इस क्षेत्र में आज जैसी कठिन प्रतियोगिता नहीं थी । आगरा में अखबार के दफ्तर में उप - सम्पादक के पद पर कार्य करने वाली पहली महिला थी । सन १९८९ में उस समय की प्रतिष्ठित साप्ताहिक पत्रिका ’ धर्मयुग ’ ने पत्रकार महिलाओं पर एक परिचर्चा की जिसमे अपने विचार लिखने के लिए मेरे पास भी एक पत्र आया । धर्मयुग में मेरे विचार क्या छपे कि मेरे पास बधाई पत्रों का अंबार लग गया । बस फिए क्या था तब से लेकर आज तक में पत्रकारिता के नशे में चूर हूं और इस्का खुमार उतरने की बजाए चड़ताही जा रहा है । वैवाहिक जीवन में प्रवेश करने के बाद काफी उतार चडा़व आये , कभी मेरी कलम लिख देती तो कभी ब्रेक लग जाता । इधर कुछ समय से ब्लॉगिंग का सुरूर भी छा गया है । समय व टॉपिक के हाथ लगते ही ब्लॉग पर टिपियाने आ जाती हूं ।