आजमगढ में बाटला हाउस मुठभेड़ में चुनावी मुद्दा नहीं ( उर्दू अख़बारों से )

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इंकलाब ने 10 फरवरी के अंक मे अकं में तीन समाचार छापें हैं जिनमें कहा गया हैं कि बाटला हाउस. इनकाउंटर के मुद्दे को भले ही सारे उत्तर प्रदेश में उछाला जा रहा हो मगर आजमगढ़ जिले में यह कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। इस रिपोर्ट के अनुसार इस जिले में उलेमा काउंसिल के उम्मीदवारों की हालत पतली है। क्योंकि आम मुसलमानों को यह शिकायत है कि उलेमा काउंसिल ने इस मुठभेड़ को चुनावी मुद्दा बना लिया है और इससे भाजपा को लाभ हो सकता है। आजमगढ़ सदर सीट पर उलेमा काउंसिल का उम्मीदवार रविन्द त्यागी नामक व्यक्ति है, जिसे मुसलमान अपना वोट देने के लिए तैयार नहीं हैं। एक अन्य समाचार में बाटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आरिफ और साजिद के पैतृक गांव संजरपुर के मुसलमानों का कहना है कि हमारे बच्चों की मौत पर राजनीति न की जाए। उनका यह भी कहना है कि उलेमा काउंसिल के नेता आमिर रष्दी ने तो इस मामले में बहुत अच्छा काम किया था मगर बाद में उन्होंने उलेमा काउंसिल को राजनीतिक दल बनाकर सारा खेल ही बिगाड़ दिया है।

अब वे मुस्लिम एकता की बात कर रहे हैं। जिससे बीजेपी को लाभ हो रहा है। आतिफ और साजिद के परिवारजनों का कहना है कि मुसलमानों की बजाय हमारे हिन्दू पड़ोसियों ने इस संकट की घड़ी में जिस तरह से हमारा साथ दिया है उसका जवाब नहीं है। मुस्लिम लीडरों ने तो सिर्फ मामले को बिगाड़ा ही है।

ब्रिटेन की जेलों में इस्लाम का प्रचार

britain_jailहिंदुस्तान एक्सप्रेस ( १८ फरबरी २०१२) के अनुसार ब्रिटेन की गृहमंत्रालय की एक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश की जेलों में इस्लाम का तेजी से प्रचार हो रहा है। लंदन की जेल में 20 प्रतिशत मुसलमान हैं। बलमारिच नामक इस जेल में एक आतंकवादी मुसलमान अबु हमजा, अल मिसरी भी शामिल है जो कि जेल में बंद कैदियों को उग्रवाद का प्रषिक्षण देता है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्रिसमस के अवसर पर लंदन स्टाक एक्सचेंज को बमों से उड़ाने के आरोप में जब चार युवकों को गिरफ्तार किया गया तो उनमें से एक आतंकवादी अब्दुल मियाद ने पूछताछ के दौरान बताया कि जेल में बंद कुछ कट्टर इस्लामी उग्रवादियों ने उसे स्टॉक एक्सचेंज को बमों से उड़ाने के लिए उकसाया था। इन लोगों ने उनके गिरोह को बम भी उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया था।

बंगाल में उर्दू को दूसरी भाषा का दर्जा

urdu_What-Urdu-Isरोजनामा राष्ट्रीय सहारा 4 फरवरी 2012 के अनसुार पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य

के उन सभी क्षेत्रों में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा देने का फैसला किया है। जिनमें उर्दू भाषियों की संख्या 10 प्रतिषत से अधिक है। यह फैसला मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने अल्पसंख्यकों की मांग को सामने रखकर किया है। राज्य के मंत्री पार्थो चटर्जी ने संवाददाताओं को बताया कि जिन नए क्षेत्रों में उर्दू भाषा को दूसरी राजभाषा का दर्जा दिया गया है उनमें इस्लामपुर, ग्वालतोड़, टीटागढ़,गरौलिया, कुमार हट्टी, जामोडि़या, हुगली, बांस भेडिया, बदरेष्वर, रसड़ा, बेदिया आदि शामिल हैं।

इस सरकारी घोषणा का स्वागत करते हुए राज्य के मंत्री फरियाद हकीम ने कहा है कि राज्य में उर्दू भाषा की शिक्षा के लिए स्कूल और कॉलेज भारी संख्या में खोले जाएंगे।

साभार : उर्दू  अनुवाद डेस्क ,भारत नीति प्रतिष्ठान

 

 

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