| लिमटी खरे,नई दिल्ली (साई) । अण्णा और बाबा से सिब्बल का गुप्त समझौता ! अहंकारी, घमंडी छवि वाले केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल इन दिनों खासे नरम दिखाई पड़ रहे हैं। उनके व्यवहार के कारण कांग्रेस में ही
शारीरिक अक्षमता के कारण अनेको औरतें सहज रूप से गर्भधारण और सन्तानोत्पत्ति में असमर्थ रहती हैं। सन्तान के अभाव को लोग गोद लेकर पूरी करते रहे हैं। पर उनमें अकसर अपने जीन्स को धारण करनेवाली सन्तान न होने की कसक रह ही जाती है। जैव-प्रोद्यौगिकी के विकास ने टेस्ट-ट्यूब बेबी और सर्रोगेट मातृत्व की तकनीक के जरिए इनके सामने नए आयाम उद्घाटित किए हैं।
इन उपलब्धियों में हमारे मौजूदा वैयक्तिक,पारिवारिक और सामाजिक सरोकारों को गड्डमगड़ करने का खतरा है। मातृत्व की परम्परागत अवधारणा को अस्तित्व के संकट से जूझना पड़ेगा। ‘’मैंने तुम्हें नौ महीने अपने भीतर महसूस किया है, गढ़ा है’’ –जैसी अनुभूतियों की अभिव्यक्ति साहित्य की सम्पदा हुआ करती है। इनका क्या होगा? नवजातक पर अधिकार बोध के प्रसंग में कानून के साथ नैतिकता का द्वन्द्व तो नहीं होगा ?
इनके अलावे भी दिलचस्प समीकरण उभड़ रहे हैं। अखबार में एक खबर छपी है । चौवन वर्षीय रूबी नाम की एक महिला के गर्भ में उसका नाती है । वह सर्रोगेट माँ है । सपना, उसकी बेटी, को ल्युपस नामक रोग है, यह एक प्रतिरोधक असमर्थता है जिसमें शरीर ऊतकों एवम् कोशिकाओं के ऊपर हमला करता है एवम् रक्त की गड़बड़ी हो जाया करती है । सपना को दो वर्षों के अन्तराल में चार हृदयविदारक गर्भपातों से गुजरना पड़ा , यह मान लेने के पहले , जो डॉक्टरों ने हमेशा से कहा था कि ‘’वह कभी भी गर्भ धारण नहीं कर सकती ।” मैंने गोद लेने के विकल्प पर विचार किया किन्तु अपनी जैव सन्तान की कामना बहुत तीव्र थी । साथ ही मैं सर्रोगेट के रूप मे अपरिचित औरत के बारे में सोच भी नहीं सकती थी। इसलिए मैंने अपनी माँ रूबी को ही सर्रोगेट माँ की भूमिका के लिए चुना। उनकी रजो-निवृत्ति हो चुकी थी. जिसे हॉर्मोन्स की सूइयों के द्वारा उलटा गया। उनको डॉक्टरी रूप से पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। ” इस साल फरवरी में सपना एवम् उसके पति से लिए गए डिम्ब और शुक्राणु से निर्मित दो भ्रूण रूबी की कोख में रोपे गए ।
सिजेरियन ऑपरेशन द्वारा प्रसव होने के बाद आशा की जाती है कि वह नवजातक को अपनी बेटी और दामाद के सुपुर्द कर देगी और स्वयम् अपना लिए बहुप्रत्याशित नानी की भूमिका में सरक जाएगी ।
” मैंने अपने बेटे, सायरस, से बताना तय किया है कि उसकी नानी उसके लिए हमेशा अनोखी, एवम् विशिष्ट क्यों रहेगी । मेरे पति और मैं उसे बताएँगे कि हम उसे कितना अधिक चाहते थे और उसकी नानी ने उसे धारण किया क्योंकि मैं असमर्थ थी ।”
रूबी पूणे में जन्मी और बड़ी हुई है और सन् 1974 में बागू तेजवानी से विवाह के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका में बस गई है । सपना एवम् रूबी कैलिफॉर्निया में रहते हैं ।
अभी के भारतीय समाज में उनका रह पाना कदाचित सहज नहीं होता। हो सकता है, आनेवाले समय में हालात बदलें।
एक दूसरा उदाहरण गुजरात के आनन्द से कुछ साल पहले मिला है। रेखा नाम की महिला के शरीर में कोख नहीं था। इस रोग को मेडिकल शब्दकोष में रॉकिटान्स्की सिंड्रॉम कहा जाता है। , आशा पटेल,रेखा की माँ, ने अपनी बेटी की खातिर सर्रोगेट माँ की भूमिका ली और उसके जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया। पर आनन्द का समाज अब उनके लिए इतना प्रतिकूल हो गया कि आशा एवम् उसके पति को अन्ततोगत्वा सामाजिक वहिष्कार से बचने के लिए घर बदलना पड़ा। और रेखा अपने पति-पुत्र के साथ इंग्लैंड चली गई ।