स्वास्थ्य|2010/02/26 12:07 pm

चर्म रोग (ल्यूकोडर्म)

कई बार त्वचा में कई प्रकार के चर्म रोग भी खूबसूरती में दाग के समान होते है ।

सफेद दाग

यह दूधिया सफेद रंग का दाग होता है । इसे ल्यूकोडर्म कहते है इसका इलाज काफी लंबा चलता है इसके इलाज के लिए अल्ट्रावायलेट लैम्प का इस्तेमाल करते है ।


सोरिएसिस

सामान्य भाषा में इसे अपरस कहते है इसमें शरीर के किसी भी भाग में चमडी छिलके के रूप में निकलती है इसका इलाज भी अल्ट्रावायलेट लैम्प के द्वारा होता है ।


मस्से

ये 8 से 10 प्रकार के होते है । इसमें कुछ छूत के भी होते है इसका इलाज केमिकल कान्ट्री इलेक्ट्रोकान्ट्री मशीन द्वारा व काय कान्ट्री और रेडियोंकान्ट्री द्वारा किया जाता है


तिल

यह मस्से से अलग होते है यह काले रंग के छोटे-छोटे दाने के समान होते है इसका इलाज रेडियोंकान्ट्री व कास्मेटिक सर्जरी द्वारा किया जाता है । रेडियो कान्ट्री एक ऐसी आधुनिक मशीन है जो तिल व मस्सों मोल व वाटरस को जड से मिटा देती है । को भी बिना किसी परेशानी के न बेहोशी न पटटी और न ही भर्ती होने का झंझट यहॉं तक की छोटे मस्सों में तो लोकल एनथिसियॉं की जरूरत भी नही पडती ।


सनटैनिंग

 कुछ लोगों के चेहर व शरीर के खुले भाग में धूप में धूमने के कारण शरीर का वह भाग काला हो जाता है । यह दवाइयों के द्वारा ठीक किया जा सकता है ।


एलर्जी

 कई बार कुछ आर्टिफिशियल गहनों के उपयोग या सौंर्दय प्रसाधन से एलर्जी हो जाती है । कुछ लोगों में एलर्जी के कारण शरीर में लाल-लाल चकते निकल जाते है । जिन्‍हे अर्टीकेरिया कहते है ।


एक्‍जिमा

 यह भी चमडी में होने वाली एक प्रकार की एलर्जी है ।इसमें चमडी मोटी हो जती है व उसमें खुजली होती है ।


छीला

 यह शरीर में होने वाली विशेष प्रकार का फंगल इंफेकशन है जिसमें गर्दन, चेहरे व पीठ में हल्‍के पीले रंग के दाग हो जाते है ।


पसीने में बदबू

 कुछ व्‍यक्तियों के पसीने में बदबू होती है । पेट साफ नही होने, लहसुन, प्‍याज के ज्‍यादा सेवन से भी पसीने में बदबू आती है । बगल के बाल साफ रखे, नियमित व्‍यायाम करे, पानी ज्‍यादा पीयें ।


फोडे व फुंसियॉं

 यह छूत की बिमारी होती है साथ ही साथ ठीक होने पर त्‍वचा में दाग छोड जाती है ।


झॉंई

 चेहरे में भूरे रंग का दाग हो जाता है यह खून व विटामिन की कमी, धूप के कारण व चेहरे में सुगंधित क्रीम के प्रयोग से होता है । कई बार माहवारी की अनियमितता व हार्मोन की गडबडी के कारण भी झॉंई होती है । इसका एक धरेलू उपचार भी है एक चम्‍मच मलाई में दो पत्‍ती केसर एक धंटे तक रहने दे, जब उसका रंग संतरे के रंग के समान हो जाए तो उसको झॉंई वाले भाग में लगा कर एक धंटे तक रहने दे फिर सादे पानी से धो लें ।

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1 Comment

  • चर्म रोगों की सामान्य जानकारी के लिये आभार! डा.आलोक दयाराम ने भी सफ़ेद दाग,सोरियासिस , एक्जीमा रोगों की घरेलू पदार्थों से प्रभावशाली चिकित्सा लिखी है||

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