अंधेर नगरी|2010/08/18 4:53 pm

समस्याओं की जननी है भ्रष्टाचार

नक्सली नेता कोबाड गाँधी की गिरफतारी,आजाद की तथाकथित मुठभेठ में मौत नक्सलवाद के विस्तार के कारणों एवं उद्देश्यों को प्रचारित-प्रसारित करने में मील का पत्थर साबित हो चुकी है ।दिल्ली के तीसहजारी अदालत में ‘भगतसिंह जिन्दाबाद के नारे लगाने वाले कोबाड गाँधी प्रतीक हैं-भारतीय जनमानस में फैले असंतोष के।अपनी विद्वता एवं लगन समर्पण से अनेको समाजसेवी एवं विचारक गरीबों के बीच दुख निवारक के रूप में स्थापित हो चुके हैं ।वातानुकूलित कक्षों में बैठकर भारतीय जन की कल्याणपरक योजनाओं को बनाकर ,क्रियान्वित करने के नाम पर भ्रष्टाचार के खेल को सभी स्वीकार चुके हैं ।आरोपो-प्रत्यारोपों के दौर में गरीबों-मजलूमों को उनका अधिकार बताने और प्राप्ति के लिए हरसम्भव तरीके से अपना अधिकार लेने और सशस्त्र क्रान्ति का राही बनाने का कार्य बहुत लगन से पूरे भारत में सरकारी उपेक्षा व प्रशासनिक दमन के खाद पानी में पोषित-पल्लवित हो रहा है ।सिर्फ शासन सत्ता के जिम्मेदारों द्वारा इन आन्दोलनकारियों को डाकू कहने से काम नहीं चल सकता ।भ्रष्ट राजनेताओं-नौकरशाहों द्वारा विकास योजनाओं पर अनवरत् डाका डालना जारी है और कोई पुरसाहाल नहीं है ।बडे2 घोटालो के आरोपी खादी पहने बेशर्मी से भारतीय जनमानस को ठेंगा दिखाकर ऐश्वर्यपान कर रहें हैं।विधवा पेन्शन,मातृत्व योजना,कन्याविद्याधन योजना,विकलांगों के कल्याणार्थ योजनाओं,विकास कार्यों,सूखा राहत,प्राकृतिक आपदा,आवास आवण्टनो,मिड डे मील मनरेगा,सर्वशिक्षा अभियान आदि योजनाओं में भ्रष्ट राजनेताओं-भ्रष्ट नौकरशाहों-अपराधियों का समुच्चय जो डकैती डाल रहा है,उसको रोकने में शासन सत्ता के लोग विफल रहे हंै ।शासन यैसे आन्दोलन के पीछे पड जाता है जो वंचितों की अधिकार प्राप्ति के लिए आवाज उठाता है और जनता को लामबन्द करता है।यैसे आन्दोलन शासन की जनविरोधी नीतियों,सरकारी लूट,प्रशासनिक दमन और जन उपेक्षा की उपज होते हैं ।

दूरदराज गावों में फैली अव्यवस्थाओं एवं भ्रष्टाचार की बात छोडिए , कस्बों-शहरों की ही बात ले लें।विद्युत व्यवस्था की बदहाली की आवाज जिन जिन संगठनों,नौजवानों, नागरिकों ने बुलन्द की,घेराव किया,सडक जाम किया,जनमानस को एकत्र किया,अपनी समस्या पर सत्याग्रह किया,ऐसे सारे के सारे आन्दोलनकारी विभिन्न आरोपों में,शांतिभंग की आशंका में जेल भेजे गये ।गैंगस्टर तक की नौबत आयी ।भूमि अधिग्रहण के मामलों ने किसानों के सम्मुख एक नई समस्या उत्पन्न कर दी है।उ0प्र0 की राजधानी लखनउ के समीपवर्ती जनपद बाराबंकी के तहसील फतेहपुर में पचघरा के किसानों ने 1अप्रैल,2008 से 15मई,2008 तक 45 दिन लगातार अपनी भूमि के मनमानेपूर्ण अधिग्रहण के खिलाफ धरना दिया,प्रशासन ने आश्वासन देकर व एक समिति गठित कर के धरना समाप्त करा दिया था।किसान हित का कोई कदम न उठते देख पचघरा के किसान पुनः 27अगस्त,2009 से अपनी भूमि पर धरनारत् हो गये।इनका यह धरना अपने नेतृत्व व नौकरशाही के गठजोड के कारण 8अप्रैल,2010 को समाप्त करा दिया गया।किसानों ने हिम्मत न हारी तथा पचघरा भूमि अधिग्रहण विरोधी मोर्चा बना कर अपनी भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ आज भी सत्याग्रह जारी रखा है।

शासन कर रही सरकारों को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कुछ शिक्षा लेनी चाहिए।नीतीश कुमार ने जनसमस्या की जड में जाकर,समस्या को जड से मिटाने की दिशा में काम किया है ।जिसका फल यह है कि बिहार में जनाक्रोश की कमी ।नक्सली हमलों में पिछले चार वर्षों में बिहार में 70 फीसदी की कमी हुई है ।और यह सम्भव हुआ है किसानों-मजदूरों-मजलूमों की दिक्कतों को दूर करने की ईमानदार कोशिश के फलस्वरूप ।गरीबी-बेरोजगारी को दूर करने की सार्थक व अनवरत् प्रयास ने दृढ संकल्पित किया नीतीश कुमार को।देश के गृह मन्त्री पी0 चिदम्बर इन कारणों के निवारण में न जाकर, आन्दोलनकारियों को डकैत कहकर,उकसाने की कार्यवाही करके आग में घी डाल रहें हैं। केन्द्र सरकार को बिहार की नीतीश सरकार से शिक्षा लेनी चाहिए कि कैसे आम जनता के हकों को बहाल करके,उनको विश्वास में ले कर विकास व देश निर्माण की धारा में उन्हें लगाया जाये ।साधुवाद नीतीश कुमार को जो कोयले की खान में भी बेदाग-उज्जवल चरित्र के है।।

जनता को मूल सुविधायें न उपलब्ध करा पाने वाले राज्यों का अस्तित्व सदैव संकट में रहता है ।जनमानस के भावों को ्रउसकी पीडा को महसूस करें ।उसके घावों में मरहम लगायें ।दमन के,शासन सत्ता की ताकत के बल पर जनभावना कुचलने का प्रयास अलोकतांत्रिक है ।यह क्रांतिबीज हैं ,कुचलने से,दबाने से,स्फुटित होकर नयी पौध तैयार होती रहती है। रोटी-कपडा-मकान की सुव्यवस्था एक लोककल्याणकारी राज्य का कत्र्तव्य होता है,इस व्यवस्था को करने में नाकाम राज-सत्ता जनाक्रोश से अपना अस्तित्व खो देती है ,इतिहास साक्षी है।

1 Comment

  • वाह वाह ऐसे ही लिखते और सोचते रहिये और लोगों को ब्लॉग के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास कीजिये ,आप जैसा अगर हर ब्लोगर सोचने लगे औए मिडिया के आधे लोग भी भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दे तो बिना हिंसा के इस भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सकता है और भ्रष्ट मंत्रियों को गद्दी छोड़ने के लिए विवश किया जा सकता है ,लेकिन काश ऐसा हो पता …आशा अभी भी जिन्दा है …क्योकि कुछ इंसान अभी जिन्दा हैं …

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