अंधेर नगरी|Shortlink: 2009/07/02 9:12 pm

राष्ट्रगान साम्प्रदायिकता और संकीर्णता से भरा है :राजेन्द्र यादव

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2 Comments

  • भारत में कुछ बुद्धिजीवियों ने ऐसी स्थिति बना दी है कि जहाँ भी एकता की बात होती है, उसे साम्‍प्रदायिक नाम दे दिया जाता है। कारण स्‍पष्‍ट है कि ये लोग देश को एकजुट नहीं रहने देना चाहते। वन्‍देमातरम तो सारे ही देवी देवताओं का विरोध करता है और कहता है कि भारतमाता केवल तुम ही हो। तुम ही दुर्गा, तुम ही विद्या, तुम ही धर्म कहा है और साथ में यह भी कहा है कि तुम्‍हारी ही प्रतिमा गडि मन्दिरे मन्दिरे। अब भौगोलिक नाम है हिन्‍दु उसे धर्म का पर्याय बना दिया गया और भारत को बांटने का प्रयास किया जा रहा है। जातियों के आपत्ति नहीं है बस हिन्‍दुओं की समग्रता पर आपत्ति है। जनगणमन तो अंग्रेज अधिनायक की जय करता है, वह उचित है लेकिन भारतमाता की जय अनुचित है।

  • बिल्कुल सटीक आलेख है, इस घर को आग लग गई घर के चिराग से,, राजेन्द्र यादव जैसेछद्म धर्म निरपेक्ष लोग ही इस देश का बन्टाढार किये हुए हैं। ये अन्ग्रेज़ों के मानस पुत्र हैं। पूरे गीत में कहीं कोई आपत्तिज़नक बात नहीं है। हां!! भारत की बात ,करना ही आपत्तिज़नक है।
    और अधिक सटीक बात तो यह है कि इतने महत्व के विषय पर लोग टिप्पणी करने से भी कतरा रहे हैं,कौन कन्त्रोवर्सी में पडे? हद है डरने की, रोटी छिनने का डर है।

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