अंधेर नगरी|2010/03/11 11:03 am

ये क्या हो रहा है ?

  • देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी पर पटना से “ अनिकेत प्रियदर्शी ” ने अपने विचार जनोक्ति को लिखा है जिन्हें हम यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं  :
बेरोजगारी स्वतंत्र भारत में एक ऐसी समस्या बन चुकी है जिसका सही हल शायद आज किसी भी भारतीय के पास नहीं है | एक प्रश्न जो निरंतर बना हुआ है पर निदान के अभाव में एक बीमारी की तरह बढ़ता चला जा रहा है. आज बेरोजगारी की बहुत सी वजह सामने आ रही है, पर उनका समाधान नहीं हो रहा है और साथ ही साथ बेरोजगारी की आड़ में बहुत से लोग अपनी दुकान से अच्छी कमाई जरुर कर ले रहे हैं. बेरोजगारी का यही पहलु आज सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है आम लोगों को. आईये आज कुछ इन दुकानों की बात करते हैं.एक युवक जो सबसे ज्यादा उर्जावान होता है वो कुछ करने की लालसा रखता है पर रोजगार न मिलना उसकी सारी उर्जा को ख़त्म कर जाता है. ऐसे में वो किसी भी तरह से कुछ हासिल करने के लिए कहाँ कहाँ नहीं जाता है, इन्ही जगहों में उसे बेरोजगारी दूर करने वाली दुकानों का भी सामना करना पड़ता है. ऐसे दुकान जो शायद उसकी बची हुई उर्जा भी ख़त्म कर दे.
अभी हाल ही में एक वाकया मेरे एक परम मित्र के साथ हुआ , घटना कुछ ऐसे थी की आज मैं उस पर कुछ लिख रहा हूँ. हमारे मित्र ने काफी पढाई की है , मगर नौकरी न मिलना उन्हें सताता रहता है काफी जगहों पर काम की तलाश में जाते रहते हैं . अपने लिए अच्छी जॉब की तलाश में एक दिन वो किसी N .G .O के पास भी गए, उन्हें वहां से कॉल लैटर आया था. interview हुआ और चुकी वो काफी पढ़े लिखे है इसलिए उन्हें अच्छे पद की पेशकश हुई. पद ग्रहण के लिए किसी निर्धारित तिथि को बुलाया गया . जब वो दुबारा वहां पहुँचते हैं तो उनसे एक फॉर्म भरने को कहा जाता है तथा साथ ही साथ एक बड़ी रकम भी जमा करने को कही जाती , ये कहकर की आपको इस N .G .O की सदस्यता ग्रहण करने के बाद ही कोई पद दी जाएगी . मेरे मित्र का तो बुरा हाल हो गया, खैर किसी तरह से उन्होंने अपने आप को संभाला और कुछ दिनों की मोहलत मांग कर वहां से निकल पड़े. आकर मुझे बताया की इस तरह की बात है.

एक घटना और भी है जो अभी कुछ दिन पहले मेरे एक रिश्तेदार के साथ घटी जिन्होंने राष्ट्रीय विज्ञानं केंद्र लखनऊ में PRO के पद के लिए आवेदन भेजा था . ये आवेदन पंजाब केशरी पेपर में छपा था तथा इसका फॉर्म बाजार में बिक रहा था . 250 रूपये का ड्राफ्ट और 50 रूपये और देकर तथा 50 रूपये पोस्टल चार्ज सब देकर उन्होंने अपना आवेदन भेजा पर कुछ ही दिनों में उनका आवेदन वापस आ गया और आवेदन पर लिखा था की इस नाम का कोई पता या ऑफिस नहीं है. मेरी समझ में नहीं आ रहा है की ये क्या हो रहा है जबकि राष्ट्रीय विज्ञानं केंद्र के वेबसाइट पर उसकी जानकारी और पता वही था जो जो आवेदन पर दिया गया गया है. अब इसे क्या कहेंगे? युवा पीढ़ी की बदकिस्मती या किसी संस्थान की जालसाजी. दोनों ही बात में नुक्सान तो युवा पीढ़ी का ही है.

इस तरह की घटना आये दिन बहुत से लोगों के साथ घटती रहती है. और बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो इन सबों के चुंगल में फँस कर काफी पैसा बर्बाद कर देते हैं. इन सारी बातों पर बहुत से लोग बहुत सारी बातें कह डालते हैं पर सवाल ये हैं की जो लोग ऐसी घटनाओ के शिकार होते हैं क्या वो वाकई ऐसा सोच कर आगे बड़ते हैं….नहीं ये बेरोजगारी का दंस ही ऐसा है जो एक आम आदमी को सब कुछ जानते हुए भी गलती करने को मजबूर करता है. मेरा सवाल उन सरकारी तंत्रों से है जो इनपर लगाम लगा सकते हैं क्यूंकि इनका विज्ञापन आये दिन पेपर में या फिर इन्टरनेट पर आते रहते हैं . तो क्या इस तरह से विज्ञापन निकाल कर बेरोजगार युवकों को झांसा देने वाली दुकानों की तरफ सरकार का कोई फ़र्ज़ नहीं बनता है?. क्या आज के समय में नौकरी की तलाश में दर दर भटकते युवा वर्ग की किस्मत मैं ठगा जाना ही लिखा है?. आज जहाँ एक बेरोजगार युवक के पास 500 रूपये बमुश्किल रहते हैं वो 15000 , 20000 रूपये देकर अगर ऐसे दुकानों से ठगा जाता है तो निसंदेह ही वो कल इन रूपये को प्राप्त करने के लिए किसी हद तक चला जा सकता है.

बेरोजगारी का हल निकलना जरुरी है तथा उसपर बहुत सारे काम चल रहे हैं ये सही बात है पर जहाँ तक इन दुकानों की बात है तो इनके खिलाफ कुछ ठोस कदम उठाना बहुत जरुरी बन गया है, क्यूंकि न जाने कितने बेरोजगार आगे भी इस तरह की ठगी के शिकार होंगे और मेरी मानिये अगर देश का युवा वर्ग ठगा जा रहा है तो निश्चित रूप से ये देश की भविष्य के लिए बहुत बुरा हो रहा है. हम सभी युवा वर्ग को इस तरफ धयान देने की जरुरत ज्यादा है की क्या हम वाकई ठगे जाने के लिए ही कहीं जाते हैं. बताते चलें की जिस NGO के पास मेरे मित्र गए थे उसने फिर अपना नाम बदल कर एक नया आवेदन निकाला है. ये क्या हो रहा है और क्यूँ हो रहा है के साथ मैं आपको भी सोचने के लिए कह रहा हूँ.!

1 Comment

  • bahut badhiya,isi tarah aaj bahut se berojgar tage jate hain. bahut achcha lekh hai.aise samajik jagrukta jaruri hai.aniket je ko badhai

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