Author: सुमित श्रीवास्तव
मूलतः पाटलिपुत्र के निवासी हैं| पत्रकारिता और सामाजिक जीवन में गहरी रूचि होने के कारण छात्र जीवन से हीं दोनों क्षेत्रों में सामान रूप से सक्रीय हैं| इंजीनियरिंग करने के बाद दिल्ली आकर एनीमेशन की पढाई करने के बाद, गो इंडिया फौंडेशन, तथा आवाज़ दो प्रोग्राम बाई युनिशेफ़ , में अपना योगदान दिया | फिलवक्त , जनोक्ति इंडिया फ़ौंडेशन से जुड़े हैं और जनोक्ति.कॉम में कार्यकारी संपादक की भूमिका निभा रहे हैं| ई-मेल- sumeet.srivastava2@gmail.com, संपर्क सूत्र- 9013515629
मीडिया हाइप का जमाना है ! नरेगा से लेकर आरटीआई को इस तरह बढा-चढ़ा कर पेश किया गया जैसे मानों सारे दुःख दूर हो जायेंगे ? ना जाने कितनी योजनायें बनती है और फाइलों के माध्यम से चलाई जाति है जब ज्यादा पोल-पट्टी खुलने लगे तो एक समिति बना कर उसके सिफारिशों का हवाला देते हुए एक नई योजना बना दी जाती है जिसके मद में प्रदत्त राशि का ढिंढोरा पीट कर सत्ता का सफ़र दुबारा तय किया जाता है . आज तक कभी किसी तरह की स्वच्छ और निष्पक्ष समीक्षा नहीं की गयी . हर पान साल बाद नई पंचवर्षीय योजना आती है पैसों का बन्दर-बात होता है लेकिन आज तक कोई भी पंचवर्षीय योजना अपने लक्ष्यों को ५० फीसदी भी पूरा नहीं कर पायी , इस पर कोई जबाब है नेताओं के पास खास कर कांग्रेस के पास जिसने अधिकतम समय इस देश पर राज किया है ?
गौर से देखा जाए तो हमारे यहाँ योजनाओं को लागू करने से पूर्व व्यावहारिक परिक्षण करने के बजाय प्रयोग को हीं योजनाओं का रूप दे दिया जाता है . और यही अब तक की सबसे बड़ी भूल है . रही बात भ्रष्टाचार की तो वह पूरे समाज की जिम्मेदारी है . खुद इस पर गौर कीजिये कि ये अफसरशाह ये मंत्री -विधायक सब कहाँ से आते हैं ? किस समाज से इनकी उपज हुई है ? सच तो ये है कि सब अपने अपने औकात के हिसाब से भ्रष्ट हैं . कोई सौ -पचास में काम चलता है तो कोई लाखो-करोड़ों में खेलता है ………….. इस पूरे भ्रष्ट कहे जाने वाले व्यवस्था में हम भी एक अंग हैं और अपनी-अपनी कड़ी को अपनी जगह रखकर ठीक करना हीं हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए ? अब , ये बताइए इतना सब कुछ होने के बाबजूद भी जनता खामोश क्यों है आखिर क्या हो गया उसे जो कभी प्याज के दाम बढ़ने पर सरकार गिराया करती थी और कभी छात्रों के हॉस्टल का बिल ज्यादा आने से संपूर्ण क्रांति का माहौल खड़ा हो जाता था ? आज भोजन-पानी,शिक्षा ,स्वास्थ्य सबका बुरा हाल है ऐसा लगता है यहाँ महज कुछ लोग इसको पाने के लिए आरक्षित हैं ! fir