अंधेर नगरी|2011/06/12 9:38 am

भारतीय बैंकों में जमा है अरबों का लावारिस काला धन

नौ साल में 4,725 अरब रुपयों की भारत से अवैध निकासी

देश में जब विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों के काले धन को वापस लाने की मांग राष्ट्रीय जनांदोलन का रूप ले रही है, देश से धन की अवैद्य निकासी के बारे में एक रिपोर्ट का उल्लेख जरूरी हो जाता है। अमेरिकी थिंक टैंक ‘ग्लोबल फाइनेंसियल इंटीग्रिटी’ ने यह रिपोर्ट जनवरी, 2011 में ही जारी कर दिया था |

  • साल 2000 से 2008 के बीच करीब 104 अरब डॉलर (यानी लगभग 4.725 अरब रुपये) के बराबर धन अवैद्य तरीके से भारत से बाहर गया है। अगर इस रकम की तुलना हम देश के बजट के संदर्भ में करें तो यह 2010-11 के शिक्षा बजट की तुलना में करीब दस गुना है।
  • नौ साल में धन की अवैद्य निकासी के मामले में एशिया के पांच अव्वल देशों में भारत का पांचवां नम्बर था, जबकि चीन पहले, मलेशिया दूसरे, फिलिपीन तीसरे और इंडोनेशिया चौथे स्थान पर है।
  • ग्लोबल फाइनेंसियल इंटीग्रिटी की रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए ‘सी-3’ यानी अपराध, भ्रष्टाचार और व्यापार में गलत कीमतें दिखाने जैसी प्रवृत्तियां जिम्मेदार हैं।
  • रिपोर्ट कहती है “भारत में ट्रेड मिसप्राइसिंग के कारण बड़े पैमाने पर काला धन भी आता है। भारत में आर्थिक वृद्धि के लिए आर्थिक सुधार जिम्मेदार है पर ज्यादातर जनता इनके फायदे से महरूम हैं। आय का सही बंटवारा नहीं है। सरकारी और कॉरपोरेट कार्यप्रणाली में कोई सुधार न होने से धनी लोगों के जरिये अवैद्य धन की निकासी होती है।

 

काले धन की देश से बाहर अवैध निकासी से जुडे उपरोक्त तथ्यों के आधार पर स्थिति की गंभीरता को आसानी से समझा जा सकता है | लेकिन एक बात ध्यान देने लायक है कि अब तक काले धन के मुद्दे पर हमारा धयन केवल स्वीस बैंक के खातों तक ही सिमट कर रह गया है जबकि ऐसा नहीं है स्वीस बैंक समेत दुनिया के कई बैंकों में जमा भारतीय काले धन के अलावा भारत के भीतर राष्ट्रीयकृत बैंकों में भी भ्रष्ट मंत्रियों ,अफसरों और कोर्पोरेट दलालों के पैसे पड़े हुए हैं और जिनपर पिछले 10 वर्षों में किसी ने भी दावा नहीं किया है |

भारत स्थित बैंकों में भी है भारी लावारिस धन

कुल अनक्लेम्ड राशि : 13 अरब, 60 करोड़, 31 लाख, 59 हजार, 646.89 रुपये

विदेशी बैंकों में : 47,31,67,698 रुपये

दूसरे प्राइवेट बैंकों में : 15,03,23,106 रुपये

बाकी के पब्लिक सेक्टर के बैंकों में

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया :10,47,223 खातों में 88,15,84,887 रुपये

स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एंड जयपुर : 75,261 खातों में 14,43,61,403 रुपये

स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद : 86,311 खातों में 8,59,66,644 रुपये

स्टेट बैंक ऑफ़ इंदौर : 40,114 खातों में 8,85,83,351 रुपये

स्टेट बैंक ऑफ़ मैसूर : 1,22,628, खातों में 30,03,40,111 रुपये

स्टेट बैंक ऑफ़ पटियाला : 532 खातों में 35,13,378 रुपये

एचडीएफसी बैंक : 2500 खातों में 1,89,94,831 रुपये

आईसीआईसीआई बैंक : 90,094 खातों में 28,19,25,887 रुपये

 

( यह स्थिति 31 दिसंबर, 2009 की है | वर्ष 2011 के शुरु में आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल की अर्जी का भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए गये जवाब से ऊपर डाटा दिया गया है ) साभार : हस्तक्षेप ,राष्ट्रीय सहारा

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