अंधेर नगरी|2010/03/24 10:23 pm

बिहार में हिन्दी की मौत

22 मार्च 2010 को बिहार में बिहार दिवस मनाया गया.  बिहार के स्थापना के 98 वीं वर्षगाँठ पर पहली बार मनाया जाने वाला इस बिहार दिवस का मुख्य कार्यक्रम बिहार सरकार की ओर से 22 , 23 व 24 मार्च 2010 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित किया गया.  24 .03 .2010 को बिहार दिवस के समापन समारोह में बिहार विधान परिषद के सभापति ताराकांत झा, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, मानव संसाधन विकास मंत्री हरी नारायण सिंह व माननीय राज्यपाल देवानंद कुमर ने उपस्थित लोगों के सामने अपने-अपने विचार व्यक्त किये.  बिहार विधान परिषद के सभापति ताराकांत झा, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी व मानव संसाधन विकास मंत्री हरी नारायण सिंह ने बिहार सरकार के कई योजनाओं का हवाला देते हुए स्पष्ट करना चाहा कि बिहार विकास कर रहा है.  माननीय राज्यपाल देवानंद कुमर ने भी स्पष्ट किया कि विश्व बैंक ने बिहार को सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य माना है.  2020 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनने की बात की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने 2015 तक बिहार को सबसे विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया.  राज्यपाल ने बिहार के इतिहास से कई महापुरुषों को याद कराया जो बिहार के ही थे.  बिहार विधान सभा के अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने स्पष्ट किया कि बिहार में व्यक्ति के जन्म से मरण तक के लिए योजनायें हैं.   बिहार विधान परिषद के सभापति ताराकांत झा ने जोर देकर कहा कि बिहार बदल रहा है और इसी कारण अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मुख्यमंत्री नितीश कुमार से मिलने की इच्छा जताए हैं और नितीश कुमार से मिलने वे बिहार आ रहे हैं.
बिहार कितनी प्रगति की है और कितनी प्रगति कर रही है यह तो अलग बात है पर इस पूरे कार्यक्रम से एक बात तो स्पष्ट है कि बिहार में बिहार की राजभाषा हिन्दी पतन की ओर जा रहा है.  उल्लेखनीय है कि पूरे कार्यक्रम में वक्ता के भाषण को छोड़कर उदघोषक के द्वारा जो भी घोषणाएं की गयी या जो भी कहा गया उसमें एक पंक्ति भी हिन्दी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया.  पूरा का पूरा उदघोषणा भोजपुरी भाषा में की गयी.  प्राप्त जानकारी के अनुसार तीनों दिन के कार्यक्रम में मुख्य मंच के कार्यक्रम में यही स्थिति थी और हिन्दी भाषा नदारद थी.  बिहार के स्थापना दिवस पर बिहार सरकार द्वारा मनाया जाने वाला इस बिहार दिवस के मुख्य कार्यक्रम के होने वाली घोषणाओं में बिहार के राजभाषा हिन्दी को स्थान न देने के पीछे सरकार की क्या सोच थी पता नहीं?  बिहार दिवस में बिहार के राजभाषा हिन्दी को स्थान न देना बिहार के लिए कलंक की ही बात है.  मैं बिहार सरकार से जानना चाहूँगा कि बिहार दिवस में बिहार के राजभाषा हिन्दी को स्थान न दिए जाने के पीछे आखिर उनकी क्या सोच थी?  क्या बिहार की राजभाषा हिन्दी की मौत हो गयी है?

– महेश कुमार वर्मा

2 Comments

  • हंसी भी आती है और गुस्सा भी
    वैसे इतना परेशान होने की ज़रूरत नहीं भोजपुरी हिंदी की ही एक बोली मात्र है सम्पूर्ण भाषा नहीं! आपने मात्रभाषा कहा तो याद आता है की स्नातक रचनात्मक हिंदी के लिए जामिया में मेरा साक्षात्कार हो रहा था सामने हिंदी के विद्वान् असगर वजाहत थे उन्होंने पूछा की हिंदी में ही क्यों करना चाहते हो मैंने जवाब दिया हिंदी मेरी मात्रभाषा है इसलिए उन्होंने कहा “नहीं तुम्हारी मात्रभाषा तो उर्दू है” मैंने भी काउंटर सवाल किया अच्छा मेरी अम्मा हिंदी बोलती हैं या फारसी आपको कैसे पता??????????
    मुझे इज्ज़त से बहार का रास्ता दिखा दिया गया ! दाखिला नहीं हुआ, भाषा को बटने के कई तरीके हैं कभी मजाक में कभी हंसी में कभी और कई तरीके से……हम उस देश में रहते है जहाँ हिंदी बोलने पर विधानसभा में थप्पड़ और सडकों पर लात पड़ती है सब चुप रहते हैं जैसे लकवा मार गया हो! सुनते सुनते कान पक गए की हमारा देश आइ टी का पुरोधा है मगर कम्प्यूटर और हिंदी की दुरी साफ़ दिखती है आजतक हिंदी में विन्दोव्स नहीं आ सका जापानी चीनी भाषाओँ में तो है ही अरबी फारसी में भी उपलब्ध है मगर हिंदी में नहीं ये मानसिक गुलामी है राजसत्ता की मगर हिंदी एक सर्वकालिक भाषा है ये राज प्रायोजित भाषा नहीं दरों और आम आदमियों की भाषा है और हिंदुस्तान में आम आदमी जब तक जिंदा है हिंदी जिंदा रहेगी कभी उर्दू बनके कभी भोजपुरी बनके कभी मैथली बनके कभी अवधी बनके
    बेहतरीन आलेख

  • आपका कहना गलत नहीं है. पर यह बात भी सही है कि भोजपुरी पूरे बिहार की स्थानीय भाषा नहीं है. बिहार के मात्र कुछ ही स्थानों पर भोजपुरी बोली जाती है. जबकि हिन्दी भाषा को लोग संपूर्ण बिहार में जानते व समझते है. और यह कार्यक्रम न तो भोजपुरी बोले जाने वाले स्थान की थी और न तो भोजपुरी भाषा से संबंधित थी. अतः वहाँ हिन्दी हो पूर्ण रूप से छोड़कर सिर्फ भोजपुरी का प्रयोग करना उचित नहीं था. हाँ, यह बिहार दिवस का कार्यक्रम था अतः बिहार के सभी भाषाओँ को स्थान दिया जाता तब कोई बात नहीं थी. क्यों?
    जहाँ तक आईटी में हिन्दी का इस्तेमाल की बात है तो इसके लिए क्या कहें लोग कंप्यूटर पर हिन्दी में काम ही नहीं करते हैं. बैंक में लिखा रहता है कि आप हिन्दी का प्रयोग करेंगे तो हमें प्रसन्नता होगी पर वहाँ भी कंप्यूटर पर हिन्दी में काम नहीं होता है. कुछ माह पहले की बात है में पंजाब नेशनल बैंक के एक ब्रांच में बैंक ड्राफ्ट बनवाने गया तो फॉर्म पर जिसके नाम से ड्राफ्ट बनवाना था उसका नाम मैं हिन्दी में लिखा तो उसे बैंक में नहीं लिया कहा कि यह नाम इंग्लिश में लिखों. फिर मुझे इंग्लिश में नाम लिखकर देना पड़ा तब वह लिया. तो यह है हमारी हिन्दी से साथ सरकारी बैंक का व्यवहार.

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