अंधेर नगरी|2010/03/16 9:51 pm

बरेली में प्रशासन की क्रूरता

पिछले चौदह दिनों से बरेली में सांप्रदायिक दंगे जारी है . माया प्रशासन नोटों की माला गूथने में व्यस्त है . घटना में प्रशासन की लापरवाही और कर्तव्यहीनता से जुड़ी एक हकीकत बयाँ कर रहे हैं  ” कृष्ण पहल

जिंदगी की आखिरी सीढ़ी पर बैठे हीरालाल के बूढे़ कंधों पर पूरे परिवार का बोझ है। रेलवे से मिलने वाली पेंशन इस परिवार की रोजी-रोटी का जुगाड़ है लेकिन आज की घटना से इस परिवार पर आर्थिक संकट के बादल खडे़ कर दिये है। गुस्से का इजहार कर रही भीड़ से इतर हीरालाल घर से कुछ दूर चक्की से आटा लेने जा रहे थे, लेकिन पुलिस की बंदूकसे निकली रबर की गोली का शिकार हो गये।

अब जिंदगी-मौत के बीच पैण्डुलम नब हीरालाल का परिवार गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। परिवार वालों का सिर्फ एक ही सवाल है कि आखिर इस 70 साल के बुजुर्ग से पुलिस को किस तरह का खतरा था।

शुक्रवार को जब संजय नगर में भीड़ मौलाना तौकीर रजा की रिहाई का विरोध कर रही थी, तब हीरालाल दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने के लिये आटा और जरूरी सामान लेने पास की एक चक्की पर जा रहे थे। अचानक दो अफसरों की अगुवाई में पुलिस धावा बोल देती है और देखते ही देखते राइफलें रबर की गोलियां बरसाने लगती हैं। भीड़ जान बचाने के लिये घरों में घुसने लगती है, लेकिन यह बुजुर्ग सड़क पर निढाल होकर गिर पड़ता है। परिवार वाले उसे बचाने के लिये दौड़ पड़ते है।

‘आखिर क्या कुसूर है मेरे मासूम बेटे का..?’ यह सवाल सात साल के अजय के पिता अरुण का है। संजय नगर की जोशी गली में घुसकर जब पुलिस लोगों को खदेड़ रही थी, तभी कक्षा एकका छात्र अजय अपने घर के दरवाजे केपास खेल रहा था। अचानक रबर की एक गोली उसके माथे से टकराती है और वह खून से लथपथ हो जमीन पर गिर जाता है। उसके माथे पर गहरा निशान बन जाता है।

दीन-दुनिया से बेखबर अस्पताल के बेड पर लेटे इस मासूम से जब घटना केबारे में पूछा गया तो इतना ही बोल सका कि गोली लगी है, पुलिस ने मारी है। माथे पर सात टांकों के निशान मासूम अजय को ताउम्र बरेली के इन हालात की याद दिलाते रहेंगे।

65 वर्षीय चक्की वाले राजाराम रबर बुलेट का जख्म दिखाते हुए पूछते हैं- ‘अब इन बूढ़ी हड्डियों से किसे खतरा है। क्या मैं दंगाई हूं?’ वह बताते हैं किजब भीड़ पर पुलिस टूटी तो वह घर जा रहे थे, अचानक एक बुलेट उनकी टांग पर आकर लगी। पुलिस के पास भले ही इन बुजुर्गो और मासूमों पर हमले का कोई जवाब न हो, लेकिन मुहल्ले में पुलिस की इस कार्रवाई से बेहद आक्रोश है। लोगों का कहना है कि एक पुलिस वाले ने उनसे सुरक्षा के तौर पर इकट्ठा होने का कहा था, लेकिन फिर खुद ही हमला बोल दिया। घरों में घुसकर मारपीट की गई। यह तो सीधा-सीधा अत्याचार है।

70 वर्षीय हीरालाल की लगातार बिगड़ती हालत ने पुलिस कार्रवाई पर सवालिया निशान खडे़ कर दिये हैं। हीरालाल के पेट से निकली रबर बुलेट इस बात की गवाह है कि गोली या तो सटाकर मारी गया या फिर बेहद करीब से।

जिला अस्पताल में हीरालाल को नाजुक स्थिति में लाया गया। यहां आनन-फानन में ऑपरेशन का फैसला लिया गया।

सीएमएस डा. शशिकांत सक्सेना की देखरेख में हीरालाल का आपरेशन किया गया। डाक्टरों की टीम के मुताबिक आपरेशन ठीक रहा, लेकिन डॉयबिटीज होने के कारण उसे हायर सेंटर भेजने का फैसला लिया गया। इसके लिये पहले एसआरएमएस से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने मरीज को लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद लखनऊ संपर्क किया गया। करीब दो घंटे बाद मरीज को एसआरएमएस में शिफ्ट करा दिया गया, जहां हीरालाल की हालत को देखकर उसे वेंटीलेटर पर लिया गया है। हालत स्थिर बतायी जा रही है।

अब सवाल यह कि आखिर रबर बुलेट हीरालाल के पेट में घुस कैसे गयी। सूत्र बताते हैं कि गोली दायीं तरफ से पेट में घुसी और बायी तरफ पहुंच गयी। जानकारों का कहना है कि रबर बुलेट में इतनी फोर्स नहीं होती कि वह शरीर घुस जाये। ऐसा सिर्फ तभी संभव है, जब गोली सटाकर या बेहद करीब से मारी जाये। जाहिर है कि गोली ‘प्वाइंट ब्लैंक रेंज’ से मारी गयी। इसमें कोई दो राय नहीं कि गोली पुलिस की बंदूक से ही निकली, क्योंकि रबर की गोली आम आदमी की पहुंच से दूर है, तो क्या यह मान लिया जाये कि पुलिस भी कुछ पल के लिये अपने होशो-हवाश खो चुकी थी। फिलहाल ऑपरेशन के बाद बुलेट को सीज कर दिया गया है।

1 Comment

  • BHEEMRAO .KASI JAHAN . DALIT DASHA BEHAL /
    RAJGURU TAHAN KOTI KI . NETA PAHINE MAAL//
    MAYA MAHANGI MALKIN . MALA MALA -MAAL/
    RAJGURU MARIYAL MARAN MADAI MILAN MUHAAL//
    MALA MELE MAL KI . MAAN MANOTATH MOOL /
    MAYA MARJI RAJGURU MAHAA FAND MAHSOOL//
    MAN MASOS MALI KAHE . AB BIRTHA A VYAPAAR /
    HAR GAYE HAM RAJGURU CHALE NOT KE HAAR//

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