लुकस टेटॆ अब हमारे बीच नही हैं, लेकिन लुकस टेटॆ अब हर उस भारतीय के दिल मे है जिसने भारत को प्यार किया है । नक्सलियों की कायरता एवं बर्बरतापूर्ण कृत्यों ने लुकस टेटॆ की बलि ली । जरूरी नही है कि कोई साहस लेकर जन्मा हो , लेकिन हरेक शक्ति लेकर जन्मता है । लुकस टेटॆ शक्ति और साहस दोनो के प्रतीक बने और देश पर अपने प्राणों को न्यौछावर किया… लुकस टेटॆ अमर हो गये । पर कहीं न कही ये बात दिल मे टीस बनकर उभर रही है कि क्या लुकस टेटॆ को बचाया नही जा सकता था ? टेटॆ की जगह अगर कोई मंत्री या बडी हस्ती को नक्सलियों ने बंधक बनाया होता तो भी क्या ऐसी ही स्थिती रहती ? पर शायद टॆटॆ आज की उस राजनीति का भी शिकार बन गये जिसमे विपत्तियों को खोजने , उसे सर्वत्र प्राप्त करने ,गलत निदान करने और अनुपयुक्त चिकित्सा करने की कला होती है ।

