जयराम “विप्लव”
रायता फैलाने का एक और नया माध्यम मिल गया अविनाश जी को! मुबारक हो ब्लॉग से साईट तक का सफ़र! वैसे इस राह में चल कर यशवंत जैसे लोग भी अब पत्रकारों की श्रेणी में गिने जाते हैं और पैसा भी झाड़ ले रहे हैं। कोई बात नहीं यहां तो लूटने की होड़ है बड़ी-बड़ी लोकहित की बाते कर पाठकों को बरगलाने का काम आप लोग पहले भी कर रहे थे अब शायद और अच्छे तरीके से बाज़ार प्रायोजित विचारों को फैलाया जायेगा। बाज़ार का विरोध करने वाले ही आज सबसे बड़े बाजार के दलाल बने बैठे हैं। साम्प्रदायिकता और सेकुलरता के अलावा कुछ और मुद्दे तो आप लोगों के पास नहीं हैं। अरे इस साईट से किसी अच्छे देशहित की पहल की उम्मीद बेकार है। नाम ही इतना संकुचित हैं “मोहल्ला” ठीक उसी तरह जैसे इनकी जमात एक खास कुनबे को लक्ष्य कर हर एक शब्द परोसती है। पोस्ट में उकसावे का जिक्र खुद लेखक ने किया है। सारी बात स्पष्ट है फिर भी जो लोग आस लगाये बैठे हैं देखिये किसी के उकसाने पर लिया गया ये कदम क्या गुल खिलाता है। वैसे एक बात की गारंटी है कि टी आर पी को बढ़ानेका गुर अविनाश जी को बखूबी पता है । इलेक्ट्रोनिक मीडिया से लेकर ब्लॉग तक कि यात्रा में इतना अनुभव बटोर ही लिया है। सविता भाभी डॉट कॉम जैसे विवाद फैला कर तो कभी बलात्कार के झमेले में फंस कर लोकप्रियता बटोरना इनका पुराना धंधा है।
Posted by avinash at Thursday, May 28, 2009
Labels: असहमति का आलेख, चिठिया हो तो हर कोई बांचे
7 comments:
Anonymous said…
विप्लवजी…कृपया देशहित वाली साईटों का भी जिक्र कर दीजिए। वैसे आपका नाम ही ही विरोधाभाषी है…पहले जय(श्री सिर्फ नहीं है)राम…फिर विप्लव। ये दोनों शब्द कैसे मेल खाते हैं। या तो विप्लव कीजिए या फिर जयराम गाईये।
May 28, 2009 8:02 PM HYPERLINK “http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7667014610376854285&postID=1459015033142390942″
Anonymous said…
नाम के अनुरूप ही काम कर दिखाया है ………… आपने चलो कुछ खुलकर कहने का सहस तो हुआ वरना इन वाम लोगों सम ,दाम, दंड,भेद से सभी डरते हैं. अरे भाई राष्ट्रहित के बारे में ज्यादा कुछ कहा तो साम्प्रदायिक घोषित हो जाओगे . फिर तो आज की सूडो सेकुलर मीडिया में जगह पाना कठिन हो सकता है बच के भैया रास्ता जरा टेढा है ……………. पर तेवर से लगता है तुम्हे इस बात का डर नहीं शायद ……………….. बिलकुल सही कहा रायता ही फैलायेंगे ……………
May 29, 2009 8:37 AM HYPERLINK “http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7667014610376854285&postID=5059177655329014222″जयराम “विप्लव” said…
अरे भाई , बेनामी जी बस इतनी सी बात अपने नाम से कहने में डर गए . वैसे भी जब गाँधी की पूछ पकड़ कर चलने का दावा करने वाले उनके चेले राम नाम से घबराते हैं (गाँधी उसी राम का नाम लेकर मरे थे ) तो किसी का “{जयराम “}नाम रख लेना भी गलत हो सकता है .
May 29, 2009 9:51 AM HYPERLINK “http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7667014610376854285&postID=4495990901978112235″Desh Premi said…
राष्ट्रहित के लिए आइये आपका स्वागत है मेरे साईट पैर http://rashtravad.blogspot.com/ आपने सुझाओं और संवेदनाओं से हमें अनुग्रहित करे।
May 29, 2009 3:21 PM HYPERLINK “http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7667014610376854285&postID=3967722408094359105″anil yadav said…
जय जय राम….सबको सन्मति दे भगवान
May 29, 2009 6:44 PM HYPERLINK “http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7667014610376854285&postID=2197094952039794726″
Anonymous said…
खाकी चड्डी वालों को १००८ वरुण जी और १०००८ मोदी जी से फुर्सत मिलेगी तो कुछ बौद्धिक बात समझ में आएगी. दोयम दर्जे की मानसिकता वाले न्यूनतम दर्जे की बात ही कर सकते हैं. कुएं के मेढक जो हेडगेवार और गोलवरकर के आगे पढ़े ही न हों उनसे ऐसी ही उम्मीद है….जय श्री राम…हो गया काम
May 31, 2009 4:56 PM HYPERLINK “http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7667014610376854285&postID=631658661982938102″
Anonymous said…
जिन लोगों ने सिर्फ गोलवरकर या सावरकर को पढ़ा हो वो कुएं में जी रहे हैं ! लेकिन जो लोग माक्र्स को बिना पढ़ा ही माक्र्सवादी बने फिरते हैं उनके ऊपर तरस आता है। मोहल्ला के सभी विद्धान लेखकों से एक ही प्रश्न है कि मोहल्ला में कोई भी ऐसा व्यक्ति है जिसने दास कैपिटल पढ़ा हो ? बेनामी जी इस प्रश्न का जवाब हमें नहीं खुद को दें !! दास कैपीटल तो छोडिए जर्मन आइडियालॅजी,इकानाॅमिकल एण्ड फिलासिफकल मैनुस्क्रिप्ट, भी पढ़ा हो तो कोई बात हो !! थिासिस आॅन फायरबाख भी नहीं पढ़ने वाले दसरों को ज्ञान को कमतर बताते शर्म से गड़ भी नहीं जाते ! चवन्नी चवन्नी में छपकर बिकने वाले मैनीफेस्टो पढ कर मार्कसवादी बने मोहल्ला छाप लंपट माक्र्सवादियों ने ही पाप्युलर मीडियम में माक्र्सवादियों की छवि खराब की है। किसी खंाटी माक्र्सवादी अड़ी में ऐसे माक्र्सवादियों को भगवाधारियों से भी खतरनाक माना जाता है। सारा माक्र्सवाद अखबारों, बहस और गप्प से ही सीखकर माक्र्सवाद के प्रवक्ता बन जाने वाला यह वर्ग उस मजदूर नेता सा है जो मजदूरों के प्रतिनिधि होने के नाम पर मैनेजमेंट (पढं़े सत्ता ) से दलाली खाता है। आज के समय में जो भी पूंजीवाद विरोधी है वह एक हद तक वामपंथी माना जाता है। वास्तविकता भी यही है। पूंजीवाद का दैत्य ही सभी के लिए अजगर बना हुआ है। ऐसे समय में खांटी पूंजीवादी संस्थाओं में सुविधावाद, अवसरवाद, तिकड़मबाजी के सहारे फलते फूलते जान वालों को खुद को वामपंथी कहने वालों को जरा भी लाज नहीं आती। पूंजीवादी व्यवस्था में किसी समानांतर विचारधारा को कई बार समझौता करना पड़ता हैं। लेकिन मोहल्ला के सभी पोस्टरों से मैं पूछता हूं कि इनमें से किसने अपनी विचारधारा की वजह से कोई त्याग किया हो। पच्चीस हजार से एक लाख या उससे भी ज्यादा तनख्वाह पाने वाले जब तमाम शर्मनाक कारणों से नौकरी से निकाले जाने के बाद विचारधारा की दुहाई देते हैं। दूसरों की खाकी चडढी निहारने वाले अपनी गुलाबी चडढी को दिखाते जरा भी नहीं लजाते। अपने चुल्लूभर पानी में डूबने के बजाय तैरते रहने वाले दूसरों को कूपमण्डूक कहते शर्माते भी नहीं ! पूंजीवाद ने माक्र्सवाद की राह में जो गड्ढे किए हैं उन गड्ढों का पानी पी के दूसरों का कोसने वाले लंपट, रीढ़विहीन गुलाबी चड्ढी वाले माक्र्सवादी खुद एक अक्षर न पढ़ने के बावजूद दूसरों का ढीठाई से, बेहयाई से दूसरों का पढने कि राय देते है, शेम,शेम !!गुलाबी माक्र्सवाद छिपे तौर पर पूँजीवाद को लाभ पहुचाने वाला छद्म विपक्ष खड़ा करता है। जिससे वास्तविक विपक्ष को हिंसावादी,चरमपंथी आदि-इत्यादि घोषित किया जा सके। वास्तविकता यह है कि गुलाबी वामपंथी और दक्षिण पंथी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इनके भीतरी गठजोड़ की तूलना सिर्फ और सिर्फ दो मुँहे साँप से की जा सकती है।हे गुलाबी चड्ढी वालों तमने खुद माना है कि जयराम बगैरह ने हेडगेवार और गोलवरकर के आगे नहीं पढा है। लेकिन तुमने तो मार्कस को भी नहीं पढ़ा है। उसके आगे पीछे का तो छोड़िए !! दूसरों को दोयम दर्जे का कहने वालों अपने दर्जे के बारे में सोचो ! दृष्टिदोष जन्य श्रेष्ठता ग्रंथी से पीड़ित आत्ममुग्ध अहंकारियों तुम खुद को बौद्धिक समझते हो ?? अरे बौद्धिक हो तो मोहल्ला में कमेंटबाजी क्यों कर रहे हो ?? ईपीडब्ल्यू, फ्रंटलाईन या आलोचना, समयांतर, संधान, फिलहाल में अपने बौद्धिक जलवा क्यों नहीं दिखाते ?? तुम लोग सीधी और स्पष्ट आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर पाते ! जवाब में जूतम-पैजार पर उतर आते हो। तुम लोग जयराम के नाम का जिस तरह विखण्डन कर रहे हो उससे तुम लोगों के छिछले स्तर का पता चलता है। अरे पापियों भगत सिंह तो घोषित नास्तिक थे लेकिन उनका नाम भगत था !! राम प्रसाद बिस्मिल, राम मनोहर लोहिया,राजा राम मोहन राय, के नाम में जो “राम” है उसका बारे में तुम लोगों का क्या कहना है ??अपना स्तर नहीं सुधार सकते तो दूसरों का स्तर गिराने से तो बाज आओ।


भाई मै उन तमाम पत्रिकाओं (हिन्दी वालों ) का नियमित लेखक हूं चाहें तो संपादकों से पूछ लें। पढने वढने की जहां तक बात है तो ये किताबें तो अब पुरानी हो गयीं बीए करते करते पढ गया था। तो आपके अनुसार टिप्पणी का हक है मुझे।
भाई वहां जिस तरह एक सूचना पर आपने इतनी बडी प्रतिक्रिया दी है वह साफ बतात्ती है आपकी कुण्ठा को।
खैर मै इस तरह के टीआरपी जुटाऊ अभियानो से दूर रहना चाहता हूं तो कृपया इस ब्लाग के लिये लिखने वालों की सूची से मेरा नाम हटा दें। हिन्दुत्व के उद्घोसकों के बीच मैं असहज महसूस कर रहा हूं।
आपको ढेरों शुभकामनायें
हां गुलाबी चड्ढी वाले आरोप से मेरी असहमति नहीं है। यह सही है कि अपने यहां लाल दिखने वाले तमाम लोग अब गुलाबी ही हैं।
दास कैपीटल, जर्मन आइडियालॅजी ,इकानाॅमिकल एण्ड फिलासिफकल मैनुस्क्रिप्ट,थिासिस आॅन फायरबाख… ये किताबें तो अब पुरानी हो गयीं "बीए" करते करते पढ गया था !!!!!!!!!!!!!!
कोई बात नही अशोक जी ! बेनामी के अनुसार लाल से गुलाबी हो गए स्वघोषित छद्म वाम पंथियों की सूची में आखिर आप आ ही गए . आप जैसे छद्म विचारधारा का ढोल पीटने वालों की यही मुश्किल है विरोध सहन नही होता . खुद को सहज महसूस नही करने वाले मुकाबला क्या करेंगे ? हम तो सभी तरह के विचारों और विरोधों का सम्मान करते हैं और यही लोकतंत्र है पर माओ की वंदना करने वालों को तो विरोध पसंद नही आपने जो कहा वही ब्रह्मवाक्य है . आप सच्चे वामपंथी होते तो रंगनाथ जी की तरह बहस में भाग लेते न की पीठ दिखा कर भाग जाते . भारत में आप अकेले नही पूरा वाम, कुनबा लाल कुएं में ही विचरण करना चाहता है . अरे कुछ समय तालाब और नदियों में भी बिताएं . अपने विचारों को तटस्थ होकर रखें या तो हम लाल हो जायेंगे या आप अपना रंग छोड़ देंगे ………………………………………………… शुभकामनायें आपको भी . जय हिंद !
Mr. Jairam ,i appreciate ur erudition . u are definitely a well read person so don't waste ur time on these pinky fools !