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	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज</title>
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	<description>Daily news analysis , Hindi samachar ,Hindi magazine,Hindi website,a6V3sbK3z0d4m7JTOT6OQOVo1jQ</description>
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		<title>कश्मीर बचाने की मुहिम !</title>
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		<pubDate>Mon, 06 Feb 2012 07:47:10 +0000</pubDate>
		<dc:creator>चाणक्य चिंतन</dc:creator>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[कश्मीर बचाने की मुहिम !]]></category>

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		<description><![CDATA[लेखक : Mann singh कश्मीर की मीरा कहलाने वाली संत कवयित्री ललद्यद का आज कुछ कहना भी खतरे से खाली नहीं होगा। 14वीं सदी की वह महान हस्ती आज उन जमातों में नहीं गिनी जातीं, जो सेकुलर कही जाती हैं। ललद्यद ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div style="text-align: justify;"><strong>लेखक : Mann singh</strong></div>
<div style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/jammu-kashmir-hindu-muslim.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-26262" title="jammu-kashmir-hindu-muslim" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/jammu-kashmir-hindu-muslim.jpg" alt="कश्मीर बचाने की मुहिम !"width="400" height="282" /></a>कश्मीर की मीरा कहलाने वाली संत कवयित्री ललद्यद का आज कुछ कहना भी खतरे से खाली नहीं होगा। 14वीं सदी की वह महान हस्ती आज उन जमातों में नहीं गिनी जातीं, जो सेकुलर कही जाती हैं। ललद्यद भी कम्युनल हो गई। 19 जनवरी को असंख्य कश्मीरी हिंदुओं को घाटी से निकले 22 वर्ष हो गए। इन निर्वासित हिंदुओं ने कहीं बम नहीं फोड़े, किसी गांव में जाकर आग नहीं लगाई और किसी के घर रात के दो बजे दस्तक देकर गोलियों से सारे परिवार को मारकर गाजी जैसा कोई खिताब नहीं ओढ़ा। क्या इसीलिए उनकी व्यथा पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया?</div>
<div style="text-align: justify;">ईश्वर में मगन रहने वाली कश्मीर की भक्त कवयित्री ललद्यद (जिन्हें लल्लेश्वरी नाम से भी जाना जाता है) ने कहा था, ईश्वर ने सब बंदों को एक जैसा पैदा किया है। वह यह नहीं मानती थीं कि जो मस्जिद में जाए वह आबाद हो और जो शिव भक्त हो, उसके धर्मस्थल तोड़ दिए जाएं। अल्लाह और राम में फर्क ललद्यद के चरित्र में था ही नहीं। वे जो ढूंढ़ते हैं कि जो भी मंदिर वाला मिले, माथे पर तिलक लगाए मिले या जो भी तिरंगे की शान के लिए जान देने वाला मिले, फिर चाहे वह मुसलमान ही क्यों न हो,उसको मार दिया जाए। वे लल द्यद को नहीं समझ सकते। छोटे-छोटे दूध पीते बच्चों को भी मां से जुदा कर मार देने में उनको कोई गुरेज नहीं होता, क्योंकि वे एक कथित &#8220;महान मिशन&#8221; पर काम कर रहे होते हैं। उन लोगों को किस तरह समझाया जाए कि वाजवान और समोवार का सही मतलब क्या होता है? घर-बार, दरख्त, बगीचे और कश्मीर की सर्दी, बरफ और कांगड़ी छोड़ने का दर्द क्या होता है?</div>
<div style="text-align: justify;">रोज की तहर 19 जनवरी के दिन भी दिल्ली व्यस्त है सरकार बनाने, दलित घरों में एक रात बिताने, रैन बसेरे पर बुलडोजर चलाने, पैसे के लेन-देन और पेज-थ्री पार्टियों के वृत्त लिखने में। &#8220;पेड न्यूज&#8221; का जमाना है। कश्मीरी हिंदुओं के बारे में लिखने से क्या फायदा? कौन &#8220;वोट बैंक&#8221; है भाई इन सब लोगन का? इतिहास गवाह है, 19 जनवरी 1990 को कश्मीर घाटी में लाउड स्पीकरों पर कैसी खतरनाक और भड़काऊ घोषणाएं हो रही थीं। जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट और हिजबुल मुजाहिदीन के गाजी घूम-घूमकर हिन्दू घरों पर लिख रहे थे, &#8220;हिन्दुओं, तुम भाग जाओ,&#8230;&#8221; किसने गुहार सुनी पीड़ितों की? किसने कहा कि जब तक ये हिंदुस्तानी वापस अपने घरों को नहीं लौटते, तब तक मैं सिर्फ एक वक्त खाना खाऊंगा?</div>
<div style="text-align: justify;">घर के उजड़ने का दर्द क्या होता है, यह किसने समझा? दुनिया के इतिहास में ऐसा उदाहरण और कहां मिलेगा कि अपने ही देश में अपने ही नागरिक, देशभक्ति और धर्मनिष्ठा के लिए मारे जाते रहे, उजाड़े जाते रहे और फिर भी देश में चुनाव और संसद के कामकाज बदस्तूर चलते रहें? कश्मीर में कश्मीरी हिन्दुओं को पूरी तरह से संदर्भहीन कर दिया गया है। सब इस पाप के भागीदारी हैं। वहां अभी तक दो झंडे हैं। दो तरह की संवैधानिक व्यवस्थाएं हैं, दो तरह के निजाम हैं। वहां की समस्या के समाधान के लिए किसी भी वार्ता से कश्मीरी पंडितों को पूरी तरह निकाल दिया जाता है। वहां वे कब वापस लौटेंगे, यह विषय किसी भी राजनीतिक पार्टी के चुनावी घोषणा-पत्र का हिस्सा नहीं बनता है।</div>
<div style="text-align: justify;">सरकार को प्रवासियों के घर वापसी की तो चिंता है, लेकिन जो लोग देश में ही निर्वासित हैं, उनके बारे में वह कुछ नहीं सोच रही है। घर से उजाड़कर बाबुओं के रहम पर, छोटे-छोटे फ्लैटों और शिविरों में रहकर कितने ही कश्मीरी पागल हो गए, एक पूरी कौम ही तितर-बितर हो गई। इसका हिसाब कौन रखेगा? <strong>भारत की संस्कृति और सभ्यता की एक अद्भुत कथा रचने वाला समाज ही जड़ों से उखाड़ दिया गया और भारत के भक्त निवासियों ने इसे कितनी गंभीरता से लिया</strong><strong>?</strong><strong> </strong><strong>श्री संस्कृति की परंपरा</strong><strong>,</strong><strong> </strong><strong>शारदा लिपि</strong><strong>,</strong><strong> </strong><strong>शारदा मठ</strong><strong>,</strong><strong>ऋषि कश्यप द्वारा कश्मीर बसाए जाने का इतिहास</strong><strong>,</strong><strong> </strong><strong>ललितादित्य का महान शासन</strong><strong>,</strong><strong> </strong><strong>राजतरंगिनी के पृष्ठ</strong><strong>,</strong><strong>सब कैसे</strong><strong> </strong><strong>‘</strong><strong>वितस्ता</strong><strong>’</strong><strong> </strong><strong>में बहा दिए जाएंगे</strong><strong>?</strong></div>
<div style="text-align: justify;">अब उन्होंने कश्मीर में शहरों के नाम भी बदलने शुरू कर दिए हैं। अनंतनाग को इस्लामाबाद लिखा जाता है। शंकराचार्य पहाड़ी को सुलेमान पहाड़ी कहा जाता है। कश्मीर में से कश्मीरियत को उखाड़ देने की साजिश को नाम दिया गया है, &#8220;कश्मीर बचाने की मुहिम!&#8221; जिहादियों ने अपने उदार धर्मावलंबियों पर भी कोई रहम नहीं किया है। उन पर भी ज्यादतियां होती रही हैं। हम किस तिरंगे की शान में 26 जनवरी मनाते हैं, जरा सोचा जाए। 19 जनवरी, 26 जनवरी से पहले आती है।</div>
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		<title>अंग्रेजी पट्टे का निशान है क्रिकेट</title>
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		<pubDate>Mon, 06 Feb 2012 05:11:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयदीप शेखर</dc:creator>
				<category><![CDATA[दो-टूक]]></category>
		<category><![CDATA[क्रिकेट]]></category>
		<category><![CDATA[दो टूक]]></category>

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		<description><![CDATA[बँगला के क्रान्तिकारी कवि सुकान्तो भट्टाचार्य अपनी एक कविता में आशा व्यक्त करते हैं कि गुलामी का पट्टा खुलने के बाद हमारी गर्दन पर बब्बर शेर की तरह &#8216;अयाल&#8217; उग आयें, जिसके नीचे पट्टे के निशान छुप जाये, ढक जाये। ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Cricket_india.png"><img class="alignright size-full wp-image-26260" title="Cricket_india" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Cricket_india.png" alt="" width="300" height="300" /></a>बँगला के क्रान्तिकारी कवि सुकान्तो भट्टाचार्य अपनी एक कविता में आशा व्यक्त करते हैं कि <strong>गुलामी का पट्टा खुलने के बाद हमारी गर्दन पर बब्बर शेर की तरह &#8216;अयाल&#8217; उग आयें, जिसके नीचे पट्टे के निशान छुप जाये, ढक जाये।</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पराधीन भारत के ये कवि अपनी युवावस्था में ही दुनिया छोड़ गये थे। बाद में गुलामी का पट्टा तो खुला, मगर अफसोस, कि कवि की आशा पूरी नहीं हुई। हमारी गर्दन पर सिंह के समान लम्बे, लहराते, रेशमी, स्वर्णिम बाल नहीं उगे&#8230; और पट्टे के निशान आज भी सारी दुनिया को दिखायी दे रहे हैं: एक- 1935 के अधिनियम के रुप में (जिसपर हमारा संविधान आधारित है); दो- राष्ट्रमण्डल के सदस्य के रुप में (जिसका प्रधान ब्रिटेन का &#8216;राजमुकुट&#8217; है); तीन- अँग्रेजी भाषा के &#8220;प्रभुत्व&#8221; के रुप में, और चार- क्रिकेट के &#8220;नशे&#8221; रुप में।</p>
<p style="text-align: justify;">जी हाँ, मैं क्रिकेट को भी गुलामी की एक निशानी मानता हूँ, क्योंकि यह सिर्फ उन्हीं देशों में खेला जाता है, जो कभी अँग्रेजों के पक्के गुलाम रहे थे! आजाद ख्यालों वाले शायद ही किसी देश में इसे खेला जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">अगर इसे एक &#8220;खेल&#8221; के रुप में भी अपनाया जाता, तो ठीक था, मगर क्रिकेट को तो यहाँ अब &#8220;धर्म&#8221; बताये जाने का फैशन है। हालाँकि &#8220;धर्म&#8221; यह &#8220;प्रशंसकों&#8221; के लिए है; आयोजकों-प्रायोजकों-क्रिकेटरों के लिए यह &#8220;विशुद्ध व्यवसाय&#8221; बन चुका है। इसकी चकाचौंध ने अन्यान्य खेलों की चमक को फीका कर दिया है। इसमें &#8220;खेल&#8221; या &#8220;खेल-भावना&#8221; तो अब खोजे नहीं मिलेगी। अभी-अभी &#8216;आई.पी.एल.-5&#8242; के लिए क्रिकेटर बिके- जैसे सामानों की नीलामी होती है, उसी तर्ज पर!</p>
<p style="text-align: justify;">&#8220;धर्म&#8221; या &#8220;व्यवसाय&#8221; की भावना को भी सहा जा सकता था, मगर आम जनता- खासकर, युवा पीढ़ी के लिए- यह क्रिकेट &#8220;अफीम&#8221; का काम करने लगा है।</p>
<p style="text-align: justify;">याद कीजिये- मार्क्स या लेनिन ने &#8220;धर्म&#8221; को (भारत के सन्दर्भ में) &#8220;अफीम&#8221; क्यों कहा था? क्योंकि यहाँ का शोषित वर्ग अपनी अवस्था के लिए सत्ताधारियों की नीतियों या व्यवस्था को दोषी नहीं मानता था, बल्कि &#8220;पिछले जन्मों&#8221; के कर्मों को दोषी ठहराता था। इस प्रकार, धर्म यहाँ के दबे-कुचले लोगों को क्रान्ति करने से रोकता था और उन्हें एक प्रकार से नीन्द में रखता था।</p>
<p style="text-align: justify;">वही काम आज क्रिकेट कर रहा है। यहाँ के आम लोगों (खासकर युवा पीढ़ी) का ध्यान यह देश-समाज के ज्वलन्त मुद्दों से हटाता है। यहाँ तक कि त्यौहारों को मनाने से भी यह उन्हें विरक्त करता है, क्योंकि क्रिकेट होली-दीवाली-रमजान में भी जारी रहता है!</p>
<p style="text-align: justify;">मगर &#8220;उम्मीद&#8221; है कि अब भी कायम है, और इसकी झलक मिली थी- पिछले वर्ष अन्ना के अनशन के दौरान। कँधों पर तिरंगा लिए &#8220;भारत माता की जय&#8221; से दिशाओं को गुंजायमान करते हुए देश की जो युवा पीढ़ी सड़कों पर उतरी थी, बेशक वह क्रिकेट को धर्म मानने वाली पीढ़ी ही थी!</p>
<p style="text-align: justify;">अर्थात्, सुकान्तो भट्टाचार्य की आशा अब भी कायम है&#8230; एक दिन हमारी गर्दन पर सिंह के समान लहराते अयाल उगेंगे&#8230; और गुलामी के पट्टे के सारे निशान उसके नीचे छुपेंगे&#8230;   नौजवानों के दिलों में देशभक्ति की चिंगारियाँ आज भी सुलग रही हैं&#8230; एक दिन &#8220;बदलाव&#8221; की ज्वाला भड़केगी जरूर&#8230;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
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		<title>मैं पुराना जनसंघी हूँ:सुब्रमण्यम स्वामी</title>
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		<pubDate>Sun, 05 Feb 2012 12:25:23 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[2G स्पेक्ट्रम]]></category>
		<category><![CDATA[कानून और संविधान]]></category>
		<category><![CDATA[मैं पुराना जनसंघी हूँ]]></category>
		<category><![CDATA[राज्यसभा और लोकसभा]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[विहिप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]]></category>
		<category><![CDATA[सुब्रमण्यम स्वामी]]></category>

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		<description><![CDATA[सन 74 से पांच बार देश की संसद के दोनों सदन राज्यसभा और लोकसभा में पहुँचने वाले सुब्रमण्यम स्वामी &#8216;वन मेन आर्मी&#8217; कहे जाते हैं &#124; छात्र जीवन से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून और संविधान के दायरे में रहकर ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="color: #000000;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Dr.-subramanyam-swami_rss_jantaparty_2g-spectrum.jpg"><img class="alignright size-full wp-image-26242" title="Dr. subramanyam swami_rss_jantaparty_2g spectrum" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Dr.-subramanyam-swami_rss_jantaparty_2g-spectrum.jpg" alt="मैं पुराना जनसंघी हूँ:सुब्रमण्यम स्वामी"width="358" height="634" /></a>सन 74 से पांच बार देश की संसद के दोनों सदन राज्यसभा और लोकसभा में पहुँचने वाले <strong>सुब्रमण्यम स्वामी </strong> &#8216;वन मेन आर्मी&#8217; कहे जाते हैं | छात्र जीवन से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून और संविधान के दायरे में रहकर अपनी जंग लड़ने वाले <strong>73 वर्षीय स्वामी </strong>जनता पार्टी के कार्यकर्त्ता और नेता दोनों ही हैं | पिछले <strong>42 सालों से</strong> राष्ट्रीय परिदृश्य में सामाजिक और राजनीतिक योगदान देते आ रहे स्वामी ने <strong>2G स्पेक्ट्रम</strong> के आवंटित सभी <strong>122 लाइसेंस को रद्द </strong>करवा कर देश भर में अपने चाहने वालों और समर्थकों की तादाद सौ गुनी कर दी है | आज हर किसी की जुबान पर स्वामी का ही नाम है | स्वामी की लोकप्रियता और कर्मठता को देखते हुए राष्ट्रीय राजनीति में उनकी स्वीकार्यता बढ़ गयी है |</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="color: #000000;">ऐसे में जनता भी चाहती है कि स्वामी किसी बड़े राजनीतिक दल या गठबंधन से जुडकर काम करें |खुद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी <a href="http://epaper.patrika.com/c/55466" target="_blank">पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार </a>में इस ओर संकेत दिए हैं |</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="color: #000000;">अपनी आगामी राजनीतिक योजना के बारे में पूछे जाने पर स्वामी ने कहा</span> &#8221; <strong>मैं पुराना जनसंघी हूँ | मैं कभी भाजपा में विलय के पक्ष में नहीं था | जब वह बनी तो मैंने सोचा यह क्या हुआ | गांधीवाद और समाजवाद की बात हो रही है ? समाजवाद तो दुनिया भर में असफल रहा है | शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती की गिरफ्तारी के बाद मैं उनके पक्ष में खड़ा हुआ ,उन्हें छुडवाया | इसके बाद संत समाज ने मुझे काफी पसंद किया और मैंने पाया कि </strong><strong> शंकराचार्य </strong>की गिरफ्तारी में सोनिया गाँधी का हाथ था | मैंने तथ्य जुटाए और हिंदुत्व पर किताब लिखी ,जिसका सर्वत्र स्वागत हुआ | आज मैं समझता हूँ<span style="color: #ff6600;"> विहिप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ </span>से इतनी निकटता हो गयी है ,वे चाहते हैं कि मुझे भाजपा के साथ मिलकर काम करना चाहिए | मुझे मालुम नहीं कि भाजपा को कहाँ संकोच है ,पर बातचीत चल रही है और इस बात की सम्भावना ज्यादा  है कि जनता पार्टी एनडीए का एक घटक बनेगी | सगाई हो चुकी है ,देखें विवाह कब होता है | &#8220;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
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		<title>जिन्हें नाज़ है भोजपुरी पे वो कहाँ हैं ?</title>
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		<pubDate>Sun, 05 Feb 2012 08:18:39 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[साहित्य-सिनेमा]]></category>
		<category><![CDATA[सिनेमा-संसार]]></category>
		<category><![CDATA[जिन्हें नाज़ है भोजपुरी पे वो कहाँ हैं ?]]></category>

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		<description><![CDATA[भोजपुरी सिनेमा अपने पचासवे पायदान पर आ चुका है और हालात कुछ ऐसे हैं जैसे पुरे भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को मुंह छिपाने की जगह ना मिल रही हो &#124; सब एक दुसरे की शक्ल देख रहे हैं लेकिन कौन पूछे ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">भोजपुरी सिनेमा अपने पचासवे पायदान पर आ चुका है और हालात कुछ ऐसे हैं जैसे पुरे भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को मुंह छिपाने की जगह ना मिल रही हो | सब एक दुसरे की शक्ल देख रहे हैं लेकिन कौन पूछे कौन बताए, इस रग पर हाँथ कैसे रखे जहां का खून काला हो गया हो | इतनी उदासीनता इतना झेप इतना डर ? क्या कह कर जश्ने &#8211; पचासा मनाएं ? की हमने कितनी सफलता पा ली ? या आज हमने जो सम्मान प्राप्त किया उसके लिए फलां-फलां लोगों ने महत्वपूर्ण कार्य किया ? या पिछले पचास सालों में भोजपुरी सिनेमा ने जो दर्जा पाया उसके लिए हमें गर्व है ? जो इस सिनेमा का दर्शक है, उन बेचारों को तो पता भी नहीं है कि पचास सावन पार कर चुका उनकी भाषा का सिनेमा उम्र के इस दहलीज़ पर कितना जलील हो रहा है, उन्हें तो ये भी नहीं पता होगा कि पचास साल हो रहे हैं | अरे कोइ है सुध लेने वाला ? बिहार की जनता को शायद ही कोइ दरकार हो या शायद ही पता हो इसके बारे में | कोइ तो कुछ बोलो |</p>
<p style="text-align: justify;">जिन्हें नाज़ है भोजपुरी पे वो कहाँ हैं ?                                                                      {  भोजपुरी सिनेमा 1962 &#8211; 2012 }</p>
<p style="text-align: justify;"><strong> भोजपुरी भाषाप्रेमी  : <a href="http://www.facebook.com/champarantalkies?sk=info" target="_blank">नितिन चंद्रा</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Shiva-Bhojpuri-Movie-Poster-Designs.jpg"><img class="aligncenter size-large wp-image-26238" title="Shiva-Bhojpuri-Movie-Poster-Designs" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Shiva-Bhojpuri-Movie-Poster-Designs-500x250.jpg" alt="जिन्हें नाज़ है भोजपुरी पे वो कहाँ हैं ?"width="500" height="250" /></a>भोजपुरी सिनेमा अब ५० साल के प्रौढ़ होखे वाला बा. लेकिन उम्र के एह पडाव पर भी एकरा में प्रौढावस्था वाली गंभीरता नइखे.जस -जस उमिर बढ़ल बा. लड़कपन बढ़त गइल बा आ अइसन लड़कपन जवना के समय आ इतिहास कबो माफ़ ना कर पाई .अब त जवना डाली पर बानी ओही डाली के काटे वाली कहावत चरितार्थ हो रहल बा. हम भोजपुरी सिनेमा पर पीछला डेढ़ दशक से लिख रहल बानी. १९६१ से लेके अब तक के ५०-६० गो फिल्म के कई-कई बार देखला के बाद फेर कुछ लिखे के मन करत बा. हाल हीं में २६ दिसंबर २०१० के एयर पोर्ट अथारिटी ऑफ़ इंडिया के आफिसर्स क्लब में भोजपुरी सिनेमा के ५० साल के सफ़र के बारे में एह दौर के सुपर स्टार मनोज तिवारी से विस्तार से बात चीत कइले रहनी ,जवना के प्रसारण कई-कई बार हमार टी वी पर भइल. मनोज जी भी भोजपुरी सिनेमा के वर्त्तमान स्थिति से संतुष्ट नइखन . आज से एक दशक पहिले २००२ में हम भोजपुरी सिनेमा खातिर चुनौती , संभावना आ एकरा भविष्य पर सदी के महानायक अमिताभ बच्चन , भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार सुजीत कुमार, राकेश पाण्डेय, कुणाल सिंह, रवि किशन , वरिष्ठ निर्माता मोहन जी प्रसाद, अशोक चंद जैन , संजय राय, विनय सिन्हा,किरण कान्त वर्मा, मुक्ति नारायण पाठक आ फिल्म समीक्षक आलोक रंजन समेत लगभग तीन दर्जन फिल्मी हस्तियन के साक्षात्कार कइले रहनी जवन भोजपुरी-हिन्दी के कई गो पत्र-पत्रिकन में प्रकाशित भइल. हमरा ओह शोध पत्र के नाम रहे भोजपुरी सिनेमा के विकास-यात्रा. ओह में हम भोजपुरी सीरियल आ टेलीफिल्म के भी बात कइले रहनी. ………अब वर्ष २०११ आ गइल . आईं भोजपुरी सिनेमा के एह सफरनामा पर विचार कइल जाय कि आज हमनी के कहाँ बानी सन आ आज से ५० साल पहिले कहाँ रहनी सन.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>लेखक व् पत्रकार : मनोज भावुक </strong></p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
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		<title>सजग,सतर्क और जागरूक नागरिक बनें:डॉ.मीणा</title>
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		<pubDate>Sun, 05 Feb 2012 07:35:39 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[विविध]]></category>

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		<description><![CDATA[सोमवार 30 जनवरी को लायंस क्लब जयपुर मधुरम के विशेष आमन्त्रण पर भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ने क्लब के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए सजग, सतर्क और जागरूक नागरिक बनने के लिये ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div id=":1bd">
<div id=":1aq"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/DSCN0956-1.jpg"><img class="alignright size-full wp-image-26230" title="DSCN0956-1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/DSCN0956-1.jpg" alt="" width="333" height="456" /></a>सोमवार 30 जनवरी को लायंस क्लब जयपुर मधुरम के विशेष आमन्त्रण पर भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ने क्लब के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए सजग, सतर्क और जागरूक नागरिक बनने के लिये प्रेरित किया|</p>
<p>लायंस क्लब जयपुर मधुरम की ओर से डॉ. मीणा को मोटीवेटर (प्रणेता) के रूप में क्लब की बैठक में विशेष अतिथि के रूप में आमन्त्रित किया गया|</p>
<p>जयुपर के महारानी पैलेस होटल में आयोजित क्लब की बैठक में विशेष अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए डॉ. मीणा ने लायंस क्लब जयपुर मधुरम के कार्यों की प्रशंसा की और क्लब द्वारा मानव सेवा के हित में किये जा रहे कार्यों के लिये शुभकामनाएँ भी दी|</p>
<p>डॉ. मीणा ने कहा कि लायंस क्लब में जयपुर से अधिकतर सम्पन्न और सम्मानित लोग जुड़े हुए हैं, जिनके द्वारा मानव सेवा के लिये कार्य किया जाना तो प्रशंसनीय है ही लेकिन इसके साथ-साथ क्लब को चाहिये कि अपने सभी सदस्यों को दैनिक जीवन में उपयोगी कानूनी एवं संवैधानिक अधिकारों तथा कर्त्तव्यों के बारे में भी जरूरी जानकारी प्रदान की जावे| इससे सदस्यों के आत्मविश्‍वास में वृद्धि होगी और सदस्यगण निर्भीकतापूर्वक अपने सभी अधिकारों और कर्त्तव्यों का निर्वाह कर सकेंगे|</p>
<p>डॉ. मीणा ने दैनिक जीवन से जुड़े अनेक संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ नागरिकों के कर्त्तव्यों और सूचना के अधिकार (आरटीआई) के बारे में भी उपयोगी जानकारी प्रदान की| उपस्थित सदस्यों को कानूनी जानकारी प्राप्त करना सुखद लगा और आगे भी डॉ. मीणा को जानकारी प्रदान करते रहने के लिये आग्रह किया गया|</p>
<p>लायंस क्लब जयपुर मधुरम की बैठक में रीजनल चेयर पर्सन वीना पारख मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थी| कार्यक्रम के प्रारम्भ में लायंस क्लब जयपुर मधुरम की ओर से उपस्थित सभी अतिथियों का माल्यार्पण करके स्वागत किया और कार्यक्रम के अन्त में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किये गये|</p></div>
</div>
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		<title>नेताओं को चाहिए   &#8216;अशिक्षित&#8217; मतदाता</title>
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		<pubDate>Sun, 05 Feb 2012 07:23:12 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयदीप शेखर</dc:creator>
				<category><![CDATA[दो-टूक]]></category>
		<category><![CDATA[इण्टरनेट शिक्षित समाज का दर्पण]]></category>
		<category><![CDATA[देश के शिक्षित समाज]]></category>
		<category><![CDATA[नेताओं को चाहिए 'अशिक्षित' मतदाता]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य समाज का दर्पण है]]></category>

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		<description><![CDATA[हमें पढ़ाया जाता था कि &#8216;साहित्य, समाज का दर्पण है।&#8217; इसी तर्ज पर आज कहा जा सकता है कि &#8216;इण्टरनेट, शिक्षित समाज का दर्पण है।&#8217; देश के शिक्षित समाज का बड़ा हिस्सा क्या सोचता है, समकालीन राजनीति के प्रति उसका ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">हमें पढ़ाया जाता था कि &#8216;साहित्य, समाज का दर्पण है।&#8217; इसी तर्ज पर आज कहा जा सकता है कि &#8216;इण्टरनेट, शिक्षित समाज का दर्पण है।&#8217; देश के शिक्षित समाज का बड़ा हिस्सा क्या सोचता है, समकालीन राजनीति के प्रति उसका दृषिकोण क्या है, इनका अनुमान सोशल नेटवर्किंग साइट्स, ब्लॉग्स, वेब-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाली सामग्रियों तथा उनपर की जाने वाली टिप्पणियों से लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<div id="attachment_26227" class="wp-caption aligncenter" style="width: 470px"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Indian-elections-villager-001.jpg"><img class="size-full wp-image-26227" title="Indian-elections-villager-001" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Indian-elections-villager-001.jpg" alt="नेताओं को चाहिए 'अशिक्षित' मतदाता"width="460" height="276" /></a><p class="wp-caption-text">Indian voters</p></div>
<p>आज की तारीख में अगर हम काँग्रेस पार्टी, सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, कपिल सिब्बल, दिग्विजय सिंह, डॉ. मनमोहन सिंह, इत्यादि की प्रशंसा में लिखी गयी सामग्री इण्टरनेट पर खोजना चाहें, तो शायद ही कुछ हाथ लगे। कम-से-कम, नागरिकों की ओर से प्रस्तुत की गयी ऐसी सामग्री नहीं मिलेगी।</p>
<p style="text-align: justify;">अगर उक्त तथ्य को &#8220;नमूना&#8221; माना जाय, तो अनुमान यही कहता है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में काँग्रेस को सफलता नहीं मिलने वाली और 2014 में प्रधानमंत्री बनने का राहुल गाँधी का सपना चूर हो जायेगा। मगर भारत के लोकतंत्र में &#8220;कुछ भी&#8221; सम्भव हो जाता है! काँग्रेस न केवल उ.प्र. में जीत दर्ज करा सकती है, बल्कि राहुल 2014 में प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं। इसके पीछे कारण यह है कि देश में शिक्षित मतदाताओं की संख्या मुट्ठीभर है- अधिकांश मतदाता सीधे-सादे, भोले एवं ग्रामीण हैं, जो मूलभूत शिक्षा से भी दूर हैं- इण्टरनेट तो उनके लिए रहस्य या जादू है।</p>
<p style="text-align: justify;">सीधे-सरल मतदाताओं का यह विशाल वर्ग दिल से, यानि भावुक होकर मतदान करता है। कभी यह राजीव गाँधी को &#8220;टूअर&#8221; समझकर काँग्रेस को भारी मतों से जिताता है, तो कभी &#8220;रामलला&#8221; के मन्दिर की आस में भाजपा के लिए भारी मतदान करता है। यह कभी-कभी आक्रोशित भी होता है, जैसे- नागरिकों के अधिकार छीनने वाले &#8220;आपात्काल&#8221; से क्रोधित होकर इसने काँग्रेस का पत्ता साफ कर दिया था, तो भूखे पेट खुशी महसूस कराने वाले अँग्रेजी नारे &#8220;फील गुड&#8221; की धज्जियाँ उड़ाते हुए भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया था।</p>
<p style="text-align: justify;">फिर भी, सच्चाई यही है कि &#8220;इस मतदाता वर्ग की जरूरत काँग्रेस व भाजपा दोनों को है&#8221;, ताकि वे चुनाव के समय इनकी भावनाओं का दोहन कर सकें, इनमें एक &#8216;लहर&#8217; पैदा कर सकें। &#8230;और इस वर्ग को &#8220;बनाये रखने&#8221; के लिए ही 1947 से लेकर आज तक हमारे &#8220;बजट&#8221; में &#8220;शिक्षा&#8221; पर पर्याप्त खर्च नहीं किया जाता! (यह खर्च बमुश्किल 5 प्रतिशत है, जबकि भारत-जैसे देश में यह खर्च 15 से 20 प्रतिशत होना चाहिए- कम-से-कम 10 वर्षॉं के लिए!)</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
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		<title>वायुसेना के हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में</title>
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		<pubDate>Sun, 05 Feb 2012 07:12:14 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जितेन्द्र प्रताप सिंह</dc:creator>
				<category><![CDATA[Featured]]></category>

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		<description><![CDATA[क्या एक सांसद जब चाहे तब मनमाने ढंग से वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों का अपने निजी काम या अपने पार्टी के प्रचार के लिए कर सकता है ?  कल ही मैंने वायुसेना को एक पत्र लिखकर पूछा है कि ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">क्या एक सांसद जब चाहे तब मनमाने ढंग से वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों का अपने निजी काम या अपने पार्टी के प्रचार के लिए कर सकता है ?  कल ही मैंने वायुसेना को एक पत्र लिखकर पूछा है कि आखिर सोनिया गाँधी अपने हर दौरे पर चाहे वो निजी हों या उनकी पार्टी का चुनाव प्रचार हों वो किस हैसियत से हमारे सेना के महगे विमान और हेलीकाप्टरों का इस्तेमाल करती है ?  पत्र इसलिए कि सुचना का अधिकार कानून सेना पर निष्प्रभावी है |</p>
<p style="text-align: justify;">भारत मे सोनिया गाँधी किसी भी संवैधानिक पद पर नहीं है |  प्रोटोकाल के अनुसार सिर्फ पांच गैर सेना के लोग ही वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर सकते है ..</p>
<p style="text-align: justify;">१- भारत के राष्ट्रपति जो भारत के सेनाओं के पदेन चीफ होते है</p>
<p style="text-align: justify;">२- भारत का प्रधानमंत्री</p>
<p style="text-align: justify;">३- गृहमंत्री</p>
<p style="text-align: justify;">४- उपराष्ट्रपति</p>
<p style="text-align: justify;">५- रक्षा मंत्री</p>
<p style="text-align: justify;">किसी विशेष और आपात परिस्थिति में राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस्तेमाल कर सकते है|लेकिन सोनिया गाँधी चुनाव प्रचार में वायुसेना के विमान का इस्तेमाल करती हैं |</p>
<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/images.jpeg"><img class="alignright size-full wp-image-26224" title="images" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/images.jpeg" alt="" width="275" height="183" /></a>सेना के हेलीकाप्टर चूँकि लड़ाई के लिए बने होते है इसलिए इनको बहुत ही दुर्गम परिस्थितियों के लिए बनाया जाता है . इनमे चार इंजन होते है . इसलिए इनको उड़ाना बहुत ही खर्चीला होता है ..</p>
<p style="text-align: justify;">मै ही नही पूरा देश टीवी पर हर रोज देखता है कि सोनिया गाँधी जहाँ भी जाती है सेना का सबसे बड़ा और सबसे खर्चीला अपाचे हेरिसन हेलीकाप्टर या फिर सेना का बोम्बार्डियर लीनियर जेट ६५७ लेकर ही जाती है .. अपाचे हेलीकाप्टर एक घंटे मे दो हज़ार लीटर जेट फ्यूल लेता है . यानी पाइलट और दूसरे स्टाफ का खर्च छोडकर ही सिर्फ तेल मे ही करीब पांच लाख रूपये हर घंटे | और बोम्बार्डियर लीनियर सेना अपने लिए चार इंजन वाला बनवाती है जबकि निजी इस्तेमाल के लिए दो इंजन वाला बनाये जाते है |  इसको उड़ाना एक लड़ाकू जेट से पांच गुणा महँगा होता है  | क्योकि इसे वायुसेना के कई अधिकारियों को एक साथ किसी जगह आने जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है | इसमें कुल पचीस लोग बैठ सकते है |</p>
<p style="text-align: justify;">आखिर एक सांसद पिछले आठ सालो से किस हैसियत से इस देश के सेना के विमानों का इस्तेमाल कर रहा है ? कितनी अजीब बात है कि बिना किसी पात्रता के सोनिया गाँधी सेना के विमान से किसी चुनावी सभा मे जाती है और वहाँ भ्रष्टाचार से लड़ने की खोखली बात करती है जबकि वायुसेना के विमान सम्बन्धी प्रोटोकोल का खुलेआम उल्लंघन खुद एक तरह का  भ्रष्टाचार  है  !</p>
]]></content:encoded>
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		<title>ईदमिलादुन्नबी</title>
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		<pubDate>Sun, 05 Feb 2012 03:25:33 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अब्दुल रशीद</dc:creator>
				<category><![CDATA[पर्व-त्यौहार]]></category>
		<category><![CDATA[विविध]]></category>

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		<description><![CDATA[अब्दुल रशीद सिंगरौली मध्य प्रदेश ईदमिलादुन्नबी यानी पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. की पैदाईश का दिन, आज ही के दिन अल्लाह के महबूब और अव्वल व आखिर पैगम्बर ह. मुहम्मद सल्ल. का दुनिया में आमद हुआ। पैगम्बर ह. मुहम्मद सल्ल. के बारे ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>अब्दुल रशीद सिंगरौली मध्य प्रदेश<br />
ईदमिलादुन्नबी यानी पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. की पैदाईश का दिन, आज ही के दिन अल्लाह के महबूब और अव्वल व आखिर पैगम्बर ह. मुहम्मद सल्ल. का दुनिया में आमद हुआ। पैगम्बर ह. मुहम्मद सल्ल. के बारे में 15 जुलाई 1974 के अंक में अमेरिकी पत्रिका टाईम्स मैंगजीन ने इतिहास के महानायक कौन-कौन थे? विषय पर विभिन्न अति विशिष्टि व्यक्तियों के संबंध में विचार छापे थे। अमेरिकी यहुदी  मनोवैज्ञानिक जूल्स माजरमैन ने अपने मत के तीन आधार बनाए कि-<br />
1-जनता के लिए रहन सहन का अच्छा प्रबंध करने वाला होना चाहिए<br />
2-एक ऐसी समाजिक अर्थव्यवस्था का स्थापक होना चाहिए जिसमें लोग अपने को सुरक्षित समझे<br />
3-एक ही मान्यता पर आधारित मत पर लोगों को चला सकने वाला हो।<br />
माजरमैन ने निर्णय लिया कि पाश्चर और साक जैसे लीडर केवल पहली शर्त पूरी करते हैं। गांधी एवं कन्फ्यूशियस जैसे लोग एक ओर हैं तथा सिकन्दर, कैशर और हिटलर जैसे लीडर दुसरी ओर हैं जो दुसरी या तीसरी शर्त ही पूरी करते हैं। सभी युगों के महानायक  पैगम्बर ह. मुहम्मद सल्ल. को माना,जिनमें तीनों श्रेणी की सभी विशेषताएँ थी। अमेरिका के माईकल एच हार्ट ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक द-हंड्रेड में इतिहास के सबसे महान 100 व्यक्तियों में मानव जाति को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले पैगम्बर ह. मुहम्मद सल्ल. को प्रथम स्थान पर रखा खुद इन-साईक्लोपीडिया आफ ब्रिटानिका ने पैगम्बर ह. मुहम्मद सल्ल. को संसार की तमाम महान विभूतियों में सर्वाधिकार संसारिक व धार्मिक स्तर पर सबसे सफल विभूति घोषित किया है।<br />
पैगम्बर ह. मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया कि &#8211; ईश्वर एक है इसीलिए वह एकता को पसंद करता है। वह व्यक्ति हम में से नहीं जो साम्प्रदायिकता की ओर बुलाए और उसके आधार पर युद्ध  करे। समस्त  मानवजाति बराबर है। सारा विश्व एक ही ईश्वर का परिवार है और ईश्वर का सबसे प्रिय वह है जो उसके परिवार के साथ अच्छा व्यवहार करें। हम ऐसे व्यक्ति को शासक नहीं बनाते जो पद का भूखा और लालची हो। वह व्यक्ति इमान वाला नहीं जो खुद पेट भर खाये और उसका पड़ोसी भूखा रह जाये। मां के कदमों में जन्नत है। बेटी नर्क से बचाव का माध्यम है। फ्रांस के विद्वान नेपोलियन बोनापार्ट के अनुसार समस्या ग्रस्त दुनियाँ पैगम्बरे इस्लाम ह. मुहम्मद सल्ल.  की शिक्षाओं व चरित्र पर अमल कर ही हल और सुकून व शांति प्राप्त कर सकता है। </p>
]]></content:encoded>
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		<title>कलमाड़ी के स्वागत से खुली कांग्रेस की पोल</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2012 19:58:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[दो-टूक]]></category>
		<category><![CDATA[कलमाड़ी के स्वागत से खुली कांग्रेस की पोल]]></category>

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		<description><![CDATA[पुणे में राष्ट्रमंडल खेल भ्रष्टाचार के आरोप में जेल हो आये कलमाड़ी का कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं द्वारा स्वागत किया जाना वर्तमान राजनीति में भ्रष्ट लोगों की स्वीकार्यता का प्रमाण है &#124; 9 महीने जेल में रहने के बाद जमानत ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/kalmadi.-happy_kalmadi-scam.jpg"><img class="alignright size-full wp-image-26215" title="kalmadi.-happy_kalmadi scam" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/kalmadi.-happy_kalmadi-scam.jpg" alt="कलमाड़ी के स्वागत से खुली कांग्रेस की पोल"width="310" height="298" /></a>पुणे में राष्ट्रमंडल खेल <span style="color: #000000;"><strong>भ्रष्टाचार के आरोप में</strong></span> जेल हो आये <strong><span style="color: #333333;">कलमाड़ी</span></strong> का कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं द्वारा स्वागत किया जाना वर्तमान <strong>राजनीति में भ्रष्ट लोगों की स्वीकार्यता</strong> का प्रमाण है | 9 महीने जेल में रहने के बाद जमानत पर छूटे <strong>सुरेश कलमाड़ी </strong>का पुणे एयरपोर्ट पर आगमन हुआ तो उसके स्वागत में कांग्रेसियों ने सैकड़ों की संख्या में उपस्तिथि दिखाई और गरमजोशी से कलमाड़ी का स्वागत करते हुए शहर में जुलुस निकाला |</p>
<p style="text-align: justify;">एक ओर भ्रष्टाचार के सवाल पर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता बड़े-बड़े भाषण देते हुए कहते है कि कांग्रेस पार्टी में कोई भ्रष्टाचारी नहीं ,तो इस तरह का कलमाड़ी के स्वागत में जुलुस निकालना यह साबित करता है कि कांग्रेस में ऊपर से दिखावा और अन्दर से <strong>भ्रष्टाचार की खुली छूट</strong> है | वैसे तो आजादी के बाद से ही कांग्रेस के भ्रष्टाचार को सभी जानते हैं चाहे वो नेहरु के शासनकाल में <strong>जीप घोटाला </strong>हो या फिर राजीव गाँधी के समय में <strong>बोफोर्स </strong>और अब मनमोहनकाल में <strong>2G महाघोटाला </strong>|</p>
<p style="text-align: justify;">ध्यान रहे पुणे शहर में कभी राष्ट्रीय कांग्रेस का नेतृत्व <strong>बाल गंगाधर तिलक ,गोपालकृष्ण गोखले ,अगरकर ,महात्मा फुले</strong> जैसे महान नेताओ ने किया था | आज उसी पुणे में एक भ्रष्टाचारी का राष्ट्रीय नायक की तरह स्वागत किया जाना बेहद शर्मनाक है |</p>
<p style="text-align: justify;">यूपी में <strong>बाबु सिंह कुशवाहा </strong>को लेकर भाजपा पर हमला बोलने वाली कांग्रेस की असलियत पुणे की घटना ने सामने ला दिया है | आज राजनीति के हमाम में सभी नंगे ही नजर आते हैं लेकिन कांग्रेस <strong>नंगई के साथ बेशर्मी </strong>पर भी उतर आई है | शायद इसी तरह की सीनाजोरी को लेकर <span style="color: #008000;"><strong>बाबा रामदेव </strong></span>आजकल एक चुटकुला सुनाते घूम रहे हैं | “ <strong>एक बार गांव वालों ने एक व्यक्ति को उसकी नीचता और भ्रष्ट आचरण के लिए मुंह काला करके गधे पर बिठा कर पूरा गांव घुमाया | शाम को वो आदमी फिर साफ़ कपडे पहन कर , चेहरा चमका कर घूमने निकला और पूछने पर किसी से कहता ; चलो किसी तरह बेइज्जती होते –होते रह गयी | </strong>“</p>
]]></content:encoded>
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		<title>प्रधानमंत्री जी क्या आम युवा बेकार हैं?</title>
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		<pubDate>Sat, 04 Feb 2012 17:18:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रोहित कश्यप</dc:creator>
				<category><![CDATA[दो-टूक]]></category>

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		<description><![CDATA[मनमोहन जी ने बहुत दिनों के बाद देश के युवाओं से कुछ अपील की है. उन्होंने युवाओं को देश की राजनीति से जुड़ने को कहा है. बकौल मनमोहन जी युवा ही राजनीति की दशा और दिशा बदल सकते हैं . ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Indian-youth.jpg"><img class="aligncenter size-full wp-image-26207" title="Indian youth" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2012/02/Indian-youth.jpg" alt="" width="450" height="295" /></a>मनमोहन जी ने बहुत दिनों के बाद देश के युवाओं से कुछ अपील की है. उन्होंने युवाओं को देश की राजनीति से जुड़ने को कहा है. बकौल मनमोहन जी युवा ही राजनीति की दशा और दिशा बदल सकते हैं . सिर्फ मनमोहन जी ही नहीं देश के कई और लोग भी इस तरह की बातें कहते रहे हैं . गौर करने की बात है की उनकी कथनी और करनी में क्या किसी तरह की समानता है या फिर &#8216;हाथी के दांत खाने के कुछ और, और दिखाने के कुछ और&#8217; वाली ही बात है. आपको लगता होगा की मैं अपने मुद्दे से भटक रहा हूँ, तो चलिए सीधे अपनी बात ही कहता हूँ. सच कहूँ तो मुझे मनमोहन जी की बात से बहुत निराशा हुई है, अब आप कहेंगे जब उन्होंने इतनी अच्छी बात कही तो फिर निराशा काहे की. निराशा इसलिए होती है की इन बातों को सुनते-सुनते तंग आ गया हूँ. आज यह तो कल कोई और इसी तरह की बात करता है लेकिन युवाओं को राजनीति में सही तरीके से प्रवेश कराने की बात कोई नहीं करता ? ऐसे समय में सब के मुंह पर ताला लग जाता है.सिर्फ बात तक ही सीमित रह जाते हैं ये लोग जब बात कुछ करने की आती है तो गिरगिट भी रंग बदलने में इनके सामने शर्मा जाता है. अब आप ही कहिये की इस बात से निराशा नहीं होगी तो क्या होगी? युवाओं के नाम पर देश के कुछ घरानों के लोग ही नजर आते हैं, सिर्फ उनमे ही काबिलियत नजर आती है. आम युवा तो सब कुछ होते हुए भी मेहनत का फल नहीं खा पाता है. आखिर वह राजनीति में आकर करे तो करे क्या? जब मेहनत की बारी आती है तो उनको याद किया जाता है और जब फल खाने की बारी आती है तो युवराजों की राह देखी जाती है. वे आयेंगे और मीठे फल का रसास्वादन करेंगे. मकान बनाने में सारी मेहनत तो आम युवा ही करते हैं लेकिन उसका मालिकाना हक़ उनको नहीं मिलता है . चांदी की चम्मच लेकर पैदा होने वाली बात यहाँ चरितार्थ होने लगती है. मनमोहन जी या कोई और जी एक युवा होने के नाते यह कहना चाहूँगा की पहले सचमुच में कुछ करने की सोचिए तब किसी तरह की अपील किया कीजिए. दुःख होता है जब पता चलता है की फलां ने जी तोड़ मेहनत की लेकिन जब बारी आई तो किसी और का नाम सामने आ गया. ज्यादा लिखना तो नहीं चाहता हूँ सिर्फ एक बात युवाओं से कहना चाहता हूँ की क्या हम आम युवाओं को ऐसे ही उपयोग किया जाता रहेगा. आप अपने विचारों को जरुर बताएं.</p>
]]></content:encoded>
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