Featured|2012/02/07 11:06 pm

क्या होगा यदि भारत में ऐसे दो-चार स्वामी और पैदा हो जाएँ ?

: विनोद वर्मा

बात थोड़ी पुरानी है. एक दशक से थोड़ी ज़्यादा पुरानी. चर्चित वकील राम जेठमलानी उन दिनों अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल के सदस्य थे. उन्हीं दिनों सुब्रमण्यम स्वामी भी लोकसभा में चुनकर पहुँचे थे.

सुब्रमण्यम स्वामी ने खड़े होकर आरोप लगाया कि राम जेठमलानी और हथियारों के सौदागर अदनान खाशोगी में दोस्ती है. राम जेठमलानी ने तमतमाकर आपत्ति दर्ज की और कहा कि स्वामी झूठ बोल रहे हैं.

लेकिन स्वामी कहाँ चुप रहने वाले थे. उन्होंने पहले एक तारीख़ बताई कि किस दिन जेठमलानी और खाशोगी की मुलाक़ात हुई थी. फिर जगह का नाम बताया. फिर ये बताया कि वह एक याट (छोटी नौका) थी जहाँ दोनों मिले थे. स्वामी एक नई जानकारी देते और जेठमलानी तिलमिलाकर खड़े होकर उसे चुनौती देते.

फिर स्वामी ने बताया कि वह जेठमलानी की वकील बेटी रानी जेठमलानी का जन्मदिन था. जेठमलानी ने कहा कि वे स्वामी उनकी अवमानना कर रहे हैं और अध्यक्ष को उन्हें संरक्षण देना चाहिए. लेकिन स्वामी अनवरत जारी रहे. उन्होंने अपनी फ़ाइल से एक फ़ोटो निकाली और संसद को दिखाया. प्रेस गैलरी से फ़ोटो बहुत साफ़ नहीं दिख रही थी लेकिन ये सभी ने देखा कि उसके बाद जेठमलानी ने एक बार भी नहीं कहा कि स्वामी झूठ बोल रहे हैं.

उन्होंने दूसरा आरोप लगाया, “ये फ़ोटो मेरे घर से चोरी हुई है.” और स्वामी ने मुस्कुराकर कहा, “आप इस चोरी के लिए एफ़आईआर करवा सकते हैं.”

वही स्वामी चीख़-चीख़कर कह रहे थे कि 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में घोटाला हुआ और सरकार इसे स्वीकार करने की जगह कह रही थी कि स्वामी देश को गुमराह कर रहे हैं. अब सरकार ठीक उसी तरह से चुप हो गई है जिस तरह संसद के भीतर जेठमलानी हो गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने तस्वीर दिखा दी है.

सुब्रमण्यम स्वामी यूँ तो अर्थशास्त्री हैं. इस नाते वो आईआईटी और दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स से लेकर हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी तक पढ़ाते रहे हैं.

लेकिन चर्चा में वे अपने विचारों की वजह से रहे हैं. एक समय वे आर्थिक उदारता की वकालत कर रहे थे और तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनके विचारों को अवास्तविक बता रही थीं. लेकिन आख़िर वही बाद में वास्तविकता बनी. आर्थिक उदारीकरण ने देश का कितना भला किया, यह विवाद अभी जारी है लेकिन ये विवाद कब का ख़त्म हो गया कि इसके हीरो मनमोहन सिंह थे.

वे विदेश मामलों के जानकार हैं. भारत से चीन और इसराइल के संबंध सुधारने में उनकी भूमिका की चर्चा की जाती है.

स्वामी जनसंघ के सदस्य रहे हैं और इस समय वे हिंदूवादी पार्टी भाजपा के बहुतेरे सदस्यों से ज़्यादा कट्टर हिंदूवादी हैं. पिछले दिनों उन्होंने मुसलमानों के ख़िलाफ़ जो लिखा वह ज़ाहिर तौर पर इतना सांप्रदायिक था कि हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी ने उन्हें विज़िटिंग प्रोफ़ेसर के पद से हटा दिया.

कई बार लगता है कि सुब्रमण्यम स्वामी किसी अतिवादी की तरह सोचते हैं. वे राजनीति के मध्यमार्ग को नकारते चलते हैं.

चाहे वो एलटीटीई के विरोध का मामला हो या फिर सोनिया गांधी का.

वे जनता पार्टी के अध्यक्ष हैं. उनकी पार्टी की वेबसाइट पर सोनिया गांधी पर उनके जो लेख उपलब्ध हैं उनको पढ़कर कुछ लोगों को सिहरन होती है लेकिन ज़्यादातर लोग उसे हँसी में उड़ा देते हैं. लेकिन वही स्वामी जयललिता और सोनिया के बीच सेतु भी बन जाते हैं.

उनकी साफ़गोई अक्सर बद्तमीज़ी के हद तक चली जाती है और नतीजा मानहानि के मुक़दमे पर ख़त्म होता है. न जाने कितने मानहानि के मुक़दमे उन पर अब भी चल रहे हैं. हर मुक़दमे में वो अपने वकील ख़ुद होते हैं और अब तक वे ख़ासे सफल दिखते हैं.

स्वामी अब 72 वर्ष के हो गए हैं. लेकिन उनकी मुस्कान की कुटिलता अभी भी जवान सी है. पत्रकारों से लेकर राजनीतिज्ञों तक हर कोई उन्हें पहली फ़ुर्सत में ‘पागल’ क़रार देता है.

वे भारतीय राजनीति का एक ऐसा चरित्र है, जिसे अंग्रेज़ी में ‘मैवरिक’ कहा जाता है. इतने स्वतंत्र व्यक्तित्व और विचार कि अक्सर अराजक दिखता है. उनकी इस अराजकता की वजह से, सांप्रदायिकता की वजह से और अप्रत्याशित होने की वजह से कोई उनके क़रीब नहीं होना चाहता. कोई नहीं कहना चाहता कि वह स्वामी को पसंद करता है.

लेकिन उन्हें कोई अनदेखा भी कैसे कर सकता है?

क्या होगा यदि हमारे लोकतंत्र में ऐसे दो चार स्वामी और पैदा हो जाएँ?

 

बीबीसी ब्लॉग से साभार

 

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1 Comment

  • सुब्रमण्यम स्वामी भारत की जरूरत हैं.ऐसे दस और स्वामी जी हो जाये तो भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियो की सामत आ जाएगी.कपिल सिब्बल पहले खूब मीडिया के सामने अपनी सरकार को 2 -G मामले में पाक साफ बताते थे.अब क्या हुआ?वो तो पहले भी कैबिनेट मंत्री थे और अब भी हैं.सुब्रमण्यम स्वामी जी तो मंत्री भी नहीं हैं.तब भी एक सुब्रमण्यम स्वामी ने उनकी बोलती बंद कर दी, उनकी कैबिनेट मंत्री होने की चमक फीकी कर दी.तो सोचिये ऐसे दस स्वामी जी पैदा हो जाये तो देश किस हद तक भ्रष्टाचार से निपट सकता है.

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