सम्पादक उवाच|Shortlink: 2009/10/15 3:16 pm

राजनीतिक वेश्यावृत्ति की शुरुआत तो सन 90 में ही हो गयी

6 Comments

  • जयराम जी बिलकुल सटीक और सुन्दर विश्लेषण किया है आपने |

    आज की इस विकट स्थिति के लिए गलत लोगों की अपेक्षा सही लोग ज्यादा दोषी हैं | देखिये जब तक अच्छे लोग राजनीति या अन्य क्षेत्रों मैं आगे नहीं आयेंगे तब तक बुरे लोग ही अच्छे लोगों पे साशन करते रहेंगे |

    नेताओं से अच्छाई की आशा अब बेमानी लगती है, जब जनता ही अपने वोट का गलत स्तेमाल कर रही है तो स्थिति तो ख़राब होगी ही …

  • जयराम जी,

    हिन्दी विकि पर आपने लिखना शुरू किया है; आपका स्वागत है। आपसे आग्रह है कि कुछ सामाजिक राजनैतिक विषयों पर लेख लिखें तो हिन्दी का हित हो। ऐसे विषयों पर लिखें जो किसी विश्वकोश में सामान्यतया होते हैं या होने चाहिये।

  • जयराम "विप्लव"

    आपकी प्रतिक्रिया और उत्साहवर्धन हेतु शुक्रिया । शायद , आपको भी इस विषय से परहेज है ! सेक्स और समाज जैसे मुद्दे पर सामग्रि विश्वकोश के लिये जरुरी है ऐसा मैं मानता हूं । क्या आप सेक्स को सामाजिक मुद्दा नहि मानते है? और मैने जो लिखा है उस में कोइ मस्तराम की कहानी नही लिखि है !
    और दुसरी बात कि आपने शायद देखा नही वहां मेरे दो और आलेख है अन्य विषयों पर । और आगे और भी लिखना है अभि तो शुरुआत है ।http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B5_%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF

    is link ko bhi dekhiyega

  • साधुवाद, पर हल किया है

  • Hindi typing me fluent nahi hu so sorry….. but HAMARE 'JANOKTI" KE LIYE AAPKO HARDIK SUVKAMNAE… Aaj bahoot dino ke baad mai waapas hindi me paagal hu.jaise high school life me hua karta tha… YOUR ALL THINKING ON DIFFERENT BUT IMPORTANT TOPIC ARE REALLY INNOVATIVE.  PLEASE WRITE SOMETHING ABOUT ENGINEERING LIFE YAAR……..
    PATA NAHI AAJ KAL KE ENGINEER APNI EK ALAG HI LIFE JEETE HAI………

  • जयराम जी आप का लेख सचमुच सराहनीय है…..पढ़ कर खुशी हुई की अब भी समुदाय मे ऐसे लोग है जो अपनी बात को सहज ढंग से समझा सकते है…. राजनीति अपने आपमे एक उलझा हुआ विषय है …. और राजनेता अपने ही जाल मे उलझी हुई मकड़ी समान है….. किसी को शायद पता ही नही की वो क्या चाहता है…. कभी उदेश्यो के लिए लड़ते है तो कभी धन के लिए ..तो कभी पार्टी के लिए…और हद तो तब करते है जब उस पार्टी के खिलाफ ही लड़ते है जिसको वो कुछ ही दिन पहले इस देश की एक मात्र हितेशी पार्टी का ढिंढोरा पिट रहे होते है…….वैसे मे इन सब के लिए हम सब को दोषी मानता हूँ …क्योंकि जब ये राजनेता वोट माँगने आते है तब तो हम इनसे कोई सवाल नही करते …की ये देश को किस किस दायरे मे बाँट रखा है…… ???हम केवल बोलते है …लिखते है ….और सुनते है…….. लकिन कुछ करते नही ….और शायद कभी कुछ करेंगे भी नही……

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