कितनी अजीब बात है ,ऐय्याशी के लिए माँ की हत्या । घटना महानगर की है जब एक बेटी ने अपने प्रेमी के संग रंगरलियाँ मनाने में आई परेशानियों की वजह से अपनी माँ की हत्या करवाकर उसे लूट का अमलीजामा पहनाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की । तथाकथित प्रेमी जो बी.टेक का छात्र है और प्रेमिका एक प्राइवेट स्कूल की शिक्षिका । जो बच्चों को नैतिकता का पाठ पढाती थी आज व्यभिचार के दलदल में इस कदर गिरी की इससे निकलने का कोई रास्ता नजर नही आया । पहले तो ऐसा लगा की यह लूट के लिए की गई हत्या है पर जब परिणाम सामने आया तो स्पष्ट हो गया कि यह लूट नही वरन ऐय्याशी में बने कंटक का सफाया था। आज जब हम भारतीय उत्तर आधुनिकता की चाह में ऐसे कदम उठा रहे हैं जो जगह जगह मानवता को शर्मशार कर रहा है । जहाँ मानवीय मूल्यों की कोई जगह नही है । आत्म तृप्ति चाहे वो आर्थिक,सामाजिक या फिर शारीरिक हो अपना सुरसा मुख बाए चारो ओर खड़ी है । देश का सामाजिक ढांचा नर मांस लोलुप गिद्धों के विषही डैनों से क्षत -विक्षत हो गया है । हवा इनकी सडांध से दूषित हो गया है । ऐसे में अगर महानगरीय जीवन की स्थिति पर गौर किया जाए तो लोगो के जिन्दगी दो जून की रोटी के भागदौड में बीत जाती है ऐसे में ये ख़बर की फलां जगह इसकी हत्या ,उसके साथ लूटपाट न जाने क्या -क्या ?अर्थ की इस दुनिया में जो बातें आज ज्यादा खुलकर सामने आई है वो है शारीरिक आकर्षण । वो भी दौर था जब विवाहोपरांत ही पति अथवा पत्नी एक दुसरे का मुंह देखा करते थे । और आज प्रेम के नाम पर चादर कुशाई , यत्र – तत्र एक दुसरे से जोंक की तरह चिपके प्रेमी प्रेमिका आधुनिक प्रेम को परिभाषित करते नजर आयेंगे। ऐसे में यह कोई आर्श्चय नही है कि अनैतिक संबंधों की वजह से हत्या ,दीगर बात ये है की आज आप पार्क में खुली हवा खाने के साथ साथ ,प्रेम में उन्मत युगल जोडों के साथ ,ओर कई अन्य चीजो का भी मुफ्त आनंद उठा सकते है, बेटी की उम्र की लड़कियों के साथ मुखामुखम में व्यस्त बुजुर्ग हो या फ़िर अपने पुत्र के उम्र के बराबर लड़कों के साथ चिपटी अर्ध नग्न आंटियां की मस्ती देखकर आँखे सेंक सकते हैं । मामला बड़ते सेक्स रैकेटों का हो या जिगोलो की बढती मांग का , समाज का दोनों वर्ग इस देह की आग में बराबर जलते नजर आते है पर इन मामलों में गौर करने की बात ये है किकिसी भी स्थिति में दोषी पुरुषों को ही ठहराया जाता है चाहे मामला कोई भी हो इस बारे में लिखते हुए मैं अपने मित्र के साथ घटी एक घटना का जिक्र करना मुनासिब समझता हूँ हम दोनों बस स्टाप पर खड़े अपनी बस का इन्तजार कर रहे थे ओर सामने खड़ी एक बुजुर्ग औरत जो काफी देर से खड़ी थी शायद बस का ही इन्तजार कर रही थी ।हम लोगों के साथ ही बस में सवार हुयी । बस में काफी भीड़ थी । हम किसी तरह उसी महिला के बगल में महिला सीट की ओर मुंह किए खड़े थे । तभी मेरे मित्र ने मुझे चिकोटी काटी तो मैं उसकी ओर मुखातिब हुआ । मैं अवाक रह गया वो औरत जिसकी उम्र हम दोनों के उम्र से दोगुनी होगी , कि अंगुलिया उसके पैंट के उस भाग पर टिकी थी और हरकत करती गोचर हो रही थी ।थोडी देर बाद मेरा मित्र उस जगह से हट गया । आगे हमारा स्टाप था हम उतर गए । वो महिला जिसके कपड़े उसके सभ्रांत घर से होने की चुगली कर रहे थे को हम देखते रहे । जब बस चल पड़ी तो हम भी चल पड़े उस दिन की घटना ने मेरे दिलो दिमाग पर अपना अधिपत्य जमा लिया था । कल टी वी देखने के क्रम में देखा कि महिलाओं द्बारा सरे बाजार एक मनचले की पिटाई , मनचले पर विधवाओं के साथ छेड़छाड़ का आरोप । चैनलों पर यह साफ़ दिखाया गया कि महिलाये उस लड़के को बेहरहमी से पीट रही है और वो लड़का गिडगिडा रहा है । इस सुसंस्कृत सभ्यता का एक ओर बेहतरीन नजारा था । वहीँ उस लड़की द्वारा अपनी माँ की हत्या करवाने में अहम् भूमिका का निर्वाह करना स्वयं में एक उदाहरण है । ऐसे में उस लड़के के गुनाहगार होने की गारंटी कौन लेगा?


sach me aaj sari purani dharnayen galat saabit ho rahi hai…
सामाजिक अवमूल्यन का सटीक उदाहरण है यह घटना।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }