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वास्तव में युवा शब्द एक खास आयु वर्ग को घोतक मात्र नहीं बल्कि अपने आप में उत्साह, उम्मीद और उर्जा का पर्याय हैं किसी बड़े या कठिन काम को करने के लिए इन तीन तत्वों का समुचित संतुलन लाज़िमी इनके साथ एक विडंबना भी है कि ये द्विआयामी होते हैं, जिसका एक हिस्सा तो रचनात्मक होता है पर वही दूसरा पहलू विध्वंसक भी होता है। यानी उत्साह, उम्मीद और उर्जा सही सोच के साथ सही समय पर एकत्रित हों तो आशातीत सफलता को जन्म देते हैं, पर अगर यही गलत मोड़ ले ले तो दुःखद परिणाम सामने लाता है। कहने का अर्थ है कि उम्र का यह दौर बड़ी संकरी गलियों से होकर गुजरता हैं, जिसके एक तरफ सफलता है, यश है तो वही दूसरी ओर गुमनामी और असफलता है और बीच का फासला बस एक कदम का। आज के दौर में युवा एक मनोवैज्ञानिक शब्द बन चला है, यह एक सोच है, जिसमें व्यक्ति हर जोखिम का सामना करने के जज़्बे से लवरेज कुछ भी कर गुजरता हो, बस जरूरत है सही दिशा को चुनने की। अब सवाल उठता है कि सही दिशा का चुनाव कैसे हो? इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हैं, मसलन, हमारा आत्मविश्वास, हमारा परिवेश और हमारी योग्यता। इनका सही जुड़ाव हमें फर्श से अर्श तक पहुचा सकता हैं। अगर गौर किया जाए तो आत्म विश्वास और परिवेश कुछ हद तक एक दूसरे से जुड़े होते है। स्वस्थ परिवेश में पला-बढ़ा एक आदमी आत्मविश्वासी का धनी होता है और इसके विपरीत आत्मविश्वास से परिपूर्ण व्यक्ति अपने इर्द-गिर्द एक स्वस्थ परिवेश गढ़ सकता हैं। अब अगर योग्यता की बात करें तो यह प्रतिभा, परिश्रम और शिक्षा का मिश्रित रूप होता हैं
आज भूमंडलीकरण के इस दौर में युवाओं को सफलता की मनचाही उड़ान भरने के लिए खुला आसमान सामने हैं, जहां नित नई बुलंदियों को छूने का अवसर है पर वहीं प्रतिस्पर्धाओ की गलाकाट जंग भी है। इंसानी जिन्दगी ने तरक्की की रफ्तार तो पकड़ ली है, पर हमसे सुस्ताने वाले फुर्सत के चंद लम्हे भी छीन लिये है। जागते हुए सोना और सोते हुए भी जागना आज की जीवन शैली हैं आम जिन्दगी के रास्ते इतने जद्दो जहद भरे हैं कि कदम-कदम पर रूकावटें हैं, बस खाली है तो सफलता की उंचाई वाली जगह, जिसे मापने का कोई पैमाना तो नहीं पर पाने का रसायनिक सूत्र है- अदम्य उत्साह, आत्मविश्वास और आवश्यक कौशल का सार्थक सम्मिश्रण या संक्षेप में कहे तो ‘युवा’।

