नारी|Shortlink: 2010/04/06 10:32 pm

नारी की आज़ादी

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  • आपका लेख पढ़कर बहुत दुःख हुआ जिसमें आपने ये लिखा है की नारी को केवल पुरुष के संरक्षण की आवश्यकता है .और वह शुरू से यही करता भी आ रहा है . अगर पुरुष ने नारी को संरक्षण दिया होता तो क्या आज वह अधिकारों की लडाई लड़ती आज बलात्कार होते भ्रूण हत्याएं होतीं ??? कहाँ सुरक्षित है वह .. घर में ? समाज में ? परिवार में ? कहाँ ? कोई एक जगह इस भूमंडल पर हों तो उस जगह का पता दे दीजिये .. किस कौम में सुरक्षित है .. आमतौर पर धार्मिक नियम हैं बहु विवाह के .. पुरूष कर सकता है स्त्री नहीं कर सकती है .!कुरआन में क्या लिखा है की किस तरह पुरुष १२ महीनों में चार विवाह कर सकता है . अरब देशों में इतना परदा है की केवल आँखों से देख सकती है स्त्री ..गर्भ धारण करनेवाली स्त्री को स्वयं पुरुष चुनने का अधिकार क्यों नहीं है.. पुरुष में ऐसा क्या है की वह चुनाव करता है और ऊब जाने पर छोड़ता है उसको .. क्या समय की ज़बर्दत विवशता यह नहीं कहती की स्त्रीको स्वावलंबी होना ही होगा और खुद में इतना शक्तिशाली होना होगा की पुरुष के शारीरिक बल के समक्ष खड़ी तो हों सके .. समाज में कम से कम कुछ संतुलन तो आये !!

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