समाज में चारित्र्यगत् शिक्षा का अभाव

ब्रजेश कुमार शर्मा

समाजसमाज में तरह-तरह के हृदय-विदारक घटनाएँ घट रही हैं, किसी डाँक्टर द्वारा न पसंद आने पर अपनी पत्नी को मार डालना, इंजीनियर, आईएस द्वारा मामूली-सी बात पर अपनी पत्नी को मारकर टुकङे-टुकङे कर डालना, समाज में अनैतिकताएँ तेजी से अपना पाँव पसारती जा रही हैं, शीघ्रताशीघ्र अमीर होने के लिए शार्टकट तरीके के रूप में जो सार्वजनिक प्रतिष्ठानों (जैसे-बैंक,रेलवे इत्यादि) और अमीरों के घरों में चोरी, डकैती तथा राह में चलते राहगीरों से आग्नेयास्त्र या फिर चाकू के द्वारा जबरन लूट-पाट, या फिर फर्जी ई-मेल के जरिए ईनाम जीतने का लालच देकर ATM CARD की सारी जानकारियाँ लेकर खाते से पूरी रकम निकाल लेना इत्यादि कार्यों को न केवल निरक्षर या गरीब लोग अपितु ऊँची-ऊँची डिग्रियाँ हासिल करनेवाले और अमीर लोग भी अंजाम दे रहे हैं।
पहले भी और आज भी जब किसी के आलीशान महल में चोरी होने की बात आती हैं तो पुलिस हो या फिर मालिक सबसे पहले शक उसमें काम कर रहे नौकर पर ही जाता हैं। किसी धनाढ्य महिला के कीमती जेवर गुम हो जाए तो सबसे पहले शक नौकरानी पर ही जाता हैं। जबकि कई ऐसे मामले भी होते हैं जब उनकी सम्पत्ति या जेवर को चुरानेवाले उनके नौकर या नौकरानी की बजाय उनके ही रिश्तेदार निकल जाते हैं। मेरा कहने का मतलब यह हैं कि छोटे-मोटे अपराध को न तो गरीब व्यक्ति और न ही अमीर व्यक्ति और न ही शिक्षित व्यक्ति अंजाम देते हैं। समाज में आज जो घरेलू अपराध हो रहे हैं, महिलाओं के साथ सरेआम जो बलात्कार की घटनाएँ हो रहे हैं,जिन चोरों और डाकुओं के कारण शहरों के लोग रात को चैन से सो नहीं पाते,जिनके कारण अकेले रास्ते चलना किसी के लिए भी आसान नहीं रह गया हैं, ऐसे घिनौने कार्य को अंजाम दे रहे हैं रूपए-पैसे के लालची लोग, वासना को ही सर्वोपरि समझनेवाले व्यक्ति, जिनके पास संतोष व धैर्य नाम का कोई गुण नहीं हैं, जो कामचोर और परजीवी होते हैं, वही व्यक्ति समाज के लिए तेजी से सिरदर्द बन जाते हैं। इनमें सो कोई डाँक्टर या इंजीनियर या कोई भी कर्मचारी या अध्यापक या नेता या मजदूर या कोई भी गरीब व्यक्ति हो सकते हैं। यदि कोई गरीब या निरक्षर किसी भी अपराध को करने के लिए उतर जाए, तो हमें कोई आश्चर्य नहीं होता हैं। लेकिन वही अपराध शिक्षित,उच्च शिक्षित व्यक्ति या अमीर व्यक्ति करते हैं तो हमें घोर आश्चर्य होता हैं। अखबारों में अक्सर ये खबरें आती रहती हैं कि “किसी इंजीनियर ने कभी अपनी पत्नी का कत्ल कर दिया तो किसी आईएस ने अपनी पत्नी को मामूली बात के लिए मार दिया तो किसी अध्यापक ने अपनी ही छात्रा के साथ दुष्कर्म किया।“
मित्रों,ये सभी बातें हमें यह सोचने के लिए बाध्य करती हैं कि हमारी शिक्षा-व्यवस्था में अवश्य ही कोई बङा खोट रह गया हैं। हमारी आधुनिक शिक्षा प्रणाली नवयुवकों को अपने पैरों पर खङा होने के लिए तरह-तरह की स्कीमें ला रहा हैं, जोकि अच्छी बात हैं। लेकिन उनके जीवन के सबसे बङे पहलू यानि की चारित्र्यगत् विशेषताओं की अनदेखी की जा रही हैं, ये कतई अच्छी बात नहीं हैं। समाज एक भव्य आलीशान महल की तरह हैं लेकिन उसकी नींव तो व्यक्ति का चरित्र ही हैं। यहाँ ध्यान देनेवाली बात हैं यह हैं कि व्यक्ति से ही समाज का निर्माण होता हैं और समाज में ही व्यक्ति का विकास भी होता हैं। किसी व्यक्ति के आचरण का प्रभाव समाज पर पङता हैं और समाज भी अपना प्रभाव व्यक्ति पर छोङता हैं। समाज में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अहम् होती हैं आप किसी भी व्यक्ति की महत्ता को कम करके नहीं आक सकते। इसलिए समाज को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले व्यक्ति के चरित्र को सुदृढ-रूप देना होगा। यह समाज का उत्तरदायित्व बनता हैं कि वो व्यक्ति को न सिर्फ शिक्षित अपितु संस्कारवान् बनाने की दिशा में भी अग्रसर होना होगा।
जब हर व्यक्ति संस्कारवान् अर्थात् अपने मन से ईर्ष्या,लालच,अहंकार,क्रोध,आलस्यपन इत्यादि बुराईयों को त्याग देगा तब यही समाज भविष्य में बहुत सुंदर दीखेगा। तब शहर का रात डरावना नहीं होगा, तब व्यवसायों के मन में कोई खौफ नहीं रह जाएगा, सार्वजनिक प्रतिष्ठान सुरक्षित रहेंगे, नारियाँ सम्मान के साथ इस समाज में जी पाएगी, कमजोर व लाचार व्यक्ति को इस समाज में रहने में किसी भी प्रकार के दुःख को हँसते-हँसते झेल जाएँगे।

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