वैलेंटाइन डे बनाम अन्य सभी दिवस!
1. दीवाली, होली, रक्षाबंधन और दशहरा के लिए हममें उतनी उत्सुकता नहीं होती जितनी कि वैलेंटाइन डे के लिए होती है।
2. गांधी जयन्ती, शास्त्री जयन्ती, इन्दिरा गांधी जयन्ती, अंबेडकर जयन्ती आदि की तिथि हमें ठीक से पता नहीं होती लेकिन 14 फरवरी की ये तारीख बोल लेने वाले बच्चे या बच्ची की जुबान पर दो के पहाड़े की तरह रटा होता है।
3. अपने पिता जी, मम्मी, बहन या भाई का जन्मदिन शायद एक दिन या दो दिन पहले याद आता है (आई रिपीट `शायद`)। लेकिन वैलेंटाइन डे की तैयारियां महीने भर पहले से शुरू हो जाती हैं।
4. मान्यताओं, परंपराओं और संस्कारों के मुताबिक वसन्त पंचमी (वसन्त के मौसम का एक अति महत्वपूर्ण दिवस) के दिन प्रत्येक व्यक्ति को मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए। वैसे भी सन्तों (चाहे वो किसी भी धर्म के हों) ने यह स्वीकार किया है कि मौसम का कोई मजहब नहीं होता और इस पर सबका समान अधिकार है। मां सरस्वती विद्या की देवी हैं। भले ही यह केवल हिन्दुओं की आराध्य हैं लेकिन अगर केवल विद्या से जोड़कर देखा जाए तो यह समस्त संसार के लिए आराध्य हैं। इस दिन अमूमन 15 प्रतिशत युवा ही मां सरस्वती की आराधना करते हैं। बाकियों को तो इस दिन के बारे में पता ही नहीं होता। जबकि वैलेंटाइन डे पूरे आंकड़ों के साथ युवाओं के पास उपलब्ध होता है।
5. रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों के लिए राखियां खरीदकर लाती हैं और उन्हें बांधती हैं। मैंने ये कभी नहीं सुना कि किसी भाई ने राखी लेकर बहन को दिया हो और कहा हो कि दीदी या बहन लो मेरी कलाई पर बांध दो। जबकि वैलेंटाइन डे के दिन लड़के और लड़कियां बड़ी मशक्कत करते हुए अपने डियर वन के लिए गुलाबों तथा अन्य प्रेम प्रचारक वस्तुओं का इन्तजाम करते हैं।
ऐसे ही कई महत्वपूर्ण दिवस हैं जब हम उनकी महत्ता को भूलकर अपनी मस्ती में मस्त रहते हैं। सबसे ज्यादा आश्चर्य तो तब होता है जब पता चलता है कि हममें से बहुतों को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का मतलब नहीं पता। इनकी स्थापना के दिन की जानकारी और यह भी नहीं पता कि इनके रचनाकार कौन हैं..।
मैं इन सब बातों का बखान करके यह नहीं कहना चाहता कि मैं बहुत बड़ा संस्कारी युवा हूं या िफर मैं महान हूं। जी नहीं! ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मैं बहुत ही सुशील हूं। सम्भव है कि मुझमे भी काफी विषमताएं हैं लेकिन एक बात की गारंटी मैं शत प्रतिशत दे सकता हूं कि जितनी भी चीजों का मैंने क्रमवार बखान किया है उनकी मुझे पूरी जानकारी है और मैं उन दिनों, लोगों और जगहों के बारे में काफी जानता हूं। मेरे इस लेख से किसी युवा (या अन्य कोई) का दिल दुखे तो क्षमा चाहूंगा। लेकिन मेरे क्षमा मांगने से भी ये बिडम्बना समाप्त नहीं होगी।
एक और खास बात बताना चाहूंगा कि अभी हाल में मैंने कुछ युवाओं पर सर्वे किया था कि `वैलेंटाइन` से क्या आशय है। लगभग 98 प्रतिशत युवाओं ने यही उत्तर दिया कि वह व्यक्ति (लड़का या लड़की) जिससे हम प्यार करते हैं या जो हमें प्यार करता है, वैलेंटाइन कहलाता है। उस वक्त मुझे शर्म आई कि मैं युवा क्यों हूं? काश मैं बच्चा या िफर बूढ़ा होता। ऐसा कतई नहीं है कि बॉयफ्रेण्ड या गर्लफ्रेंड ही `वैलेंटाइन` होते हैं। उन 98 प्रतिशत शिक्षित युवाओं से बेहतर तो मैं उस तीसरी क्लास के बच्चे को मानता हूं जो मेरे पड़ोस में रहता है और चिल्ला – चिल्लाकर कहता है `आई लव माई मॉम एण्ड माई मॉम इज माई गर्लफ्रेंड, माई मॉम इज माई वैलेंटाइन!`


क्या बात कही है जी आपने! बहुत शानदार लेख! शुभकामानाएं!
इसे कहते हैं एकदम परफेक्ट! कोई कसार नहीं छोड़ी भाई आपने! बधाई स्वीकारें!