जाति आधारित जनगणना को लेकर बुद्धिजीवी वर्ग भले ही दो भागों में बंट गया हो लेकिन हमारे नेता लगभग एकजुट ही हैं | और मंत्रिमंडल की हरी झंडी भी मिल चुकी है | हालाँकि इस बात की किसी को चिंता नहीं कि देश का युवा , देश के शिक्षक क्या चाहते हैं और उनकी क्या राय है ? प्रस्तुत है दिल्ली विश्वविद्यालय पत्रकारिता विभाग के कुछ छात्राओं और शिक्षिकाओं के विचार : -
डॉ तृप्ता शर्मा, ” जाति आधारित जनगणना नहीं होनी चहिये ,यदि जाति आधारित जनगणना होगी तो भारत की मूल छवि छिप जाएगी ,जातिगत आधार के कारण हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान नहीं बन सकती | यदि हमारा समाज जाति के खेमो में बट जायेगा तो हमारा विकास नहीं होगा साथ ही युवा सोच को बदलने का सपना भी कभी पूरा नहीं हो सकता” |
डॉ.मधु लोमेश , “२१ वि सदी में भारत में जाति आधारीत जनगणना मान्य नहीं होने चहिये .यदि भारत में जाति आधारीत जनगणना होगी तो विभेद संकीर्ण सोच विकसित कर समस्याओं को जन्म दगी और इसका लाभ राजनितिक रोटियां सकने में अधिक होगा |इसलिए जाति आधारीत जनगणना के मापदंड लागू नहीं होने चहिये |”
डॉ माला मिश्र, -“वर्ष २०१० में जो जनगणना की जा रही है उसका आधार जातिगत विवरण को बनाया जा रहा है जो की गलत है और पुर्णतः देश को विनाश के पथ पर ले जाने की सोची समझी साजिश है |”
नंदिनी , – जाति एक सामाजिक सच्चाई है। इससे इंकार करके इससे बचा नहीं जा सकता। हम देख चुके हैं कि हमारे समाज में जाति प्रथा का कितना बुरा प्रभाव पड़ा है। 1931 की जनगणना के आधार पर यह अनुमान लगाया गया था कि ये अन्य पिछड़े वर्ग, ओबीसी करीब 52 प्रतिशत हैं। उन्हें 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया ताकि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत को पार न कर जाये। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जातिगत आंकड़ों को जानने के लिए यह जाति आधारित जनगणना जरुर होनी चाहिए |
प्रियंका झा , - लोगों का एक बड़ा हिस्सा है जो जाति या यहां तक कि धर्म के आधार पर अपनी पहचान नहीं कराना चाहता। जनगणना के दौरान इन लोगों को अधिकार है कि वे अपनी जाति या धर्म बताने से इंकार कर सकते हैं। इस वर्ग की संख्या बढ़ रही है और इसे नोट किया जाना चाहिए। फ़िर जाति आधारित जनगणना क्यों ?
मृदुला,- जैसा कि मेरी दोस्त ने कहा जाति आधारित जनगणना क्यों तो मुझे लगता है शायद नेता लोग सही आंकड़ों के आधार पर अपनी-अपनी गोटी फिट करने के जुगाड़ में हैं |

जाति आधारित जनगणना के बारे में मेरा मानना है कि यह समाज को बांटने का काम करेगा . जनोक्ति में इस तरह का स्तम्भ अच्छा लगा . परन्तु इस तरह की चर्चा बड़े पैमाने पर हो तो अच्छा रहता .
जाति आधारित जनगणना भारत को उस गड्डे मे ले जाएगी जहाँ से निकल पाना असम्भव होगा ।
mai tripti sharma se ek question puchana chahata hu ..kya wo apane yuva beto ko ye aajadi deti hai ki wo kisi se sadi kare…kahi aysa to nahi ki aap apane ghar ki yuwa shoch per haath rakh baki ko badalne ka sapana dekh rahi hai……sorry mam buy i am not agree with u…
jati based census planning ke point of view se achha hai aur ye international level per bhi hota hai …chuki caste hamari sociaty ka ek specific element hai es liye other country me ye race, nrijatiya etc.aadharo per hota hai.mera manana ye hai ki ese negative perspective me nahi dekha jana chahiye.
Dear all dont take otherwise
if cast based census is not required then why most of you are wrting the title based on cast ?