<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
		>
<channel>
	<title>Comments for JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज</title>
	<atom:link href="http://www.janokti.com/comments/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://www.janokti.com</link>
	<description>राज-समाज और जन की आवाज</description>
	<lastBuildDate>Sat, 31 Jul 2010 17:09:16 +0000</lastBuildDate>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>http://wordpress.org/?v=3.0.1</generator>
<xhtml:meta xmlns:xhtml="http://www.w3.org/1999/xhtml" name="robots" content="noindex" />
	<item>
		<title>Comment on क्या हम सचमुच स्वतंत्र हैं? by rajivmonga</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%9a%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%9a-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%88/comment-page-1/#comment-2316</link>
		<dc:creator>rajivmonga</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jul 2010 17:09:16 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5424#comment-2316</guid>
		<description>it isa great effort and i personally feel that those who are interested in this field are highly benefitted with this</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>it isa great effort and i personally feel that those who are interested in this field are highly benefitted with this</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on बुद्धिमान, सुन्दर, स्वस्थ ऐसे बनो by prithvi raj sharma</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/30/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5/comment-page-1/#comment-2313</link>
		<dc:creator>prithvi raj sharma</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jul 2010 11:27:33 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5495#comment-2313</guid>
		<description>लेख अच्छा लगा</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>लेख अच्छा लगा</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on अगर सरकारें अप्रासंगिक हो गयीं हैं&#8230;तो by bhootnath</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/30/%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b9/comment-page-1/#comment-2311</link>
		<dc:creator>bhootnath</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jul 2010 08:02:24 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5485#comment-2311</guid>
		<description>jayram ji,mere is aalekh ko janokti par prakaashit karne ke liye aapka aabhari hoon...!! जयराम  जी ,मेरे इस  आलेख  को  जनोक्ति  पर  प्रकाशित  करने  के  लिए  आपका  आभारी  हूँ ...!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>jayram ji,mere is aalekh ko janokti par prakaashit karne ke liye aapka aabhari hoon&#8230;!! जयराम  जी ,मेरे इस  आलेख  को  जनोक्ति  पर  प्रकाशित  करने  के  लिए  आपका  आभारी  हूँ &#8230;!!</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on महँगाई के समर्थन में एक आन्दोलन by Dr. Rajesh Kapoor</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/05/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%81%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%86%e0%a4%a8/comment-page-1/#comment-2310</link>
		<dc:creator>Dr. Rajesh Kapoor</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jul 2010 04:26:29 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=4223#comment-2310</guid>
		<description>फुलारा जी! बहुत सुंदर. आपकी लेखनी में दम है, कोई शकनहीं. अनेक लेखों से बढ़कर एक व्यंग्य साबित होसकता है. वह क्षमता है आपके लेखन में. मेरी शुभकामनाएं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>फुलारा जी! बहुत सुंदर. आपकी लेखनी में दम है, कोई शकनहीं. अनेक लेखों से बढ़कर एक व्यंग्य साबित होसकता है. वह क्षमता है आपके लेखन में. मेरी शुभकामनाएं.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on ब्लॉग &#8211; संसद पर एक कविता by Dr. Rajesh Kapoor</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/28/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/comment-page-1/#comment-2309</link>
		<dc:creator>Dr. Rajesh Kapoor</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jul 2010 04:19:35 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5367#comment-2309</guid>
		<description>जीतू जी, आपकी टिप्पणियां पढ़ कर बहुत अच्छा लगा. कुछ तो लोग हैं जिनके पास पूर्वाग्रहों से मुक्त समझ है. कोई तो हैं जिनकी कलम, करनी और बुद्धी बिकी नहीं हुई नहीं है. वरना ऐसा लगने लगा है कि भारत में केवल भारत के दुश्मनों का ही बोलबाला है, हर मंच पर.  
 कुकर्मियों, कुमार्गियों, कुसंस्कारियों और चरित्रहीनों को मीडिया नें मान-सम्मान देने, उन्हें माडल-आदर्श बनाकर पेश करने के प्रयासों से साफ़ नज़र आता है कि दाल में कुछ काला नहीं,  सारी दल ही काली है. कुछ शक्तिशाली लोग,कोई शक्तिशाली ताकतें हैं जो जानबूझकर भारत को पतित, कमज़ोर बनाने के प्रयास में हैं.  भारत के लोगों को असली मुद्दों से दूर ले जाने, बहकाने का सुनियोजित प्रयास है.  हमें हमारे खिलाफ इस्तेमाल कर लेने की एक चालाकी से भरी कुटिल योजना अनेक आयामों में चल रही नज़र आती है. 
 हमें बेवकूफ और खोखला-कमज़ोर बनाने के लिए जो कुछ हमको दिखाया जा रहा है, सच उसके पीछे छुपा हुआ है. जो आप सरीखे पूर्वाग्रह रहित, इमानदार और बुधीमान हैं वे ही उस छुपे सच को देख-समझ पाते हैं व उसे उद्घाटित करते हैं. बड़ी मेहनत,बड़ी चालाकी बड़े खर्चे से बनी अपनी कुटिल योजनाओं का भेद खुलने से ये आसुरी लोग परेशान तो होंगे ही. तब आप सरीखों को, अपना भेद खोलने वालों को और समाज को जगानेवालों को अपना निशाना तो ये बनायेंगे ही बनायेंगे.  एक जुट होकर झूठ और बेईमानी का बिगुल बजायेंगे जिसमें सच की आवाज़ दब जाए, पर कब तक ? 
 अब इनके डूबने के दिन निकट आगये हैं . तभी आजकल अपनी पूरी ताकत का साथ जुटे हुए हैं. पर इनकी समस्या ये है कि इनके विदेशी आका स्वयं अपनी करनियों से बर्बादी, समाप्ती की और तेज़ी से बढ़ रहे हैं . उनके साथ इनकी समाप्ती भी सुनिश्चित होती जा रही है. ऊपर से आप सरीखे इमानदार और बुद्धिमान इनके भेद खोलकर इन्हें बेनकाब कर रहे हैं.
 ## इनकी सबसे बड़ी ताकत है झूठ, सच को सामने नहीं आने देना. इनकी समाप्ती का मंत्र है &#039;जनता के सामने सच को उजागर कर देना&#039; यही इस रावण की समाप्ती का अमोघ अस्त्र है.## 
वही आप और आपसरीखे लोग (  जयराम विप्लव जी के &#039;जनोक्ती&#039; जैसे प्रयास ) कर रहे हैं. मेरी शुभकामनाएं !</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जीतू जी, आपकी टिप्पणियां पढ़ कर बहुत अच्छा लगा. कुछ तो लोग हैं जिनके पास पूर्वाग्रहों से मुक्त समझ है. कोई तो हैं जिनकी कलम, करनी और बुद्धी बिकी नहीं हुई नहीं है. वरना ऐसा लगने लगा है कि भारत में केवल भारत के दुश्मनों का ही बोलबाला है, हर मंच पर.<br />
 कुकर्मियों, कुमार्गियों, कुसंस्कारियों और चरित्रहीनों को मीडिया नें मान-सम्मान देने, उन्हें माडल-आदर्श बनाकर पेश करने के प्रयासों से साफ़ नज़र आता है कि दाल में कुछ काला नहीं,  सारी दल ही काली है. कुछ शक्तिशाली लोग,कोई शक्तिशाली ताकतें हैं जो जानबूझकर भारत को पतित, कमज़ोर बनाने के प्रयास में हैं.  भारत के लोगों को असली मुद्दों से दूर ले जाने, बहकाने का सुनियोजित प्रयास है.  हमें हमारे खिलाफ इस्तेमाल कर लेने की एक चालाकी से भरी कुटिल योजना अनेक आयामों में चल रही नज़र आती है.<br />
 हमें बेवकूफ और खोखला-कमज़ोर बनाने के लिए जो कुछ हमको दिखाया जा रहा है, सच उसके पीछे छुपा हुआ है. जो आप सरीखे पूर्वाग्रह रहित, इमानदार और बुधीमान हैं वे ही उस छुपे सच को देख-समझ पाते हैं व उसे उद्घाटित करते हैं. बड़ी मेहनत,बड़ी चालाकी बड़े खर्चे से बनी अपनी कुटिल योजनाओं का भेद खुलने से ये आसुरी लोग परेशान तो होंगे ही. तब आप सरीखों को, अपना भेद खोलने वालों को और समाज को जगानेवालों को अपना निशाना तो ये बनायेंगे ही बनायेंगे.  एक जुट होकर झूठ और बेईमानी का बिगुल बजायेंगे जिसमें सच की आवाज़ दब जाए, पर कब तक ?<br />
 अब इनके डूबने के दिन निकट आगये हैं . तभी आजकल अपनी पूरी ताकत का साथ जुटे हुए हैं. पर इनकी समस्या ये है कि इनके विदेशी आका स्वयं अपनी करनियों से बर्बादी, समाप्ती की और तेज़ी से बढ़ रहे हैं . उनके साथ इनकी समाप्ती भी सुनिश्चित होती जा रही है. ऊपर से आप सरीखे इमानदार और बुद्धिमान इनके भेद खोलकर इन्हें बेनकाब कर रहे हैं.<br />
 ## इनकी सबसे बड़ी ताकत है झूठ, सच को सामने नहीं आने देना. इनकी समाप्ती का मंत्र है &#8216;जनता के सामने सच को उजागर कर देना&#8217; यही इस रावण की समाप्ती का अमोघ अस्त्र है.##<br />
वही आप और आपसरीखे लोग (  जयराम विप्लव जी के &#8216;जनोक्ती&#8217; जैसे प्रयास ) कर रहे हैं. मेरी शुभकामनाएं !</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on मुलायम-कल्याण मैत्री अध्याय का लाभ कांग्रेस को by Rakesh Singh</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/30/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%8d/comment-page-1/#comment-2308</link>
		<dc:creator>Rakesh Singh</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Jul 2010 20:59:04 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5490#comment-2308</guid>
		<description>सैधांतिक रूप से कांग्रेस के खिलाफ हूँ फिर भी एक बात कहना चाहता हूँ - कांग्रेस उत्तर प्रदेश में काफी मिहनत कर रही है और इस मिहनत का उसे फल भी मिल रहा है. 

कांग्रेस के मिहनत में फुट डालो और राज करो की निति भी सामिल है .... फिर भी ये मिहनत तो कर ही रहे हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सैधांतिक रूप से कांग्रेस के खिलाफ हूँ फिर भी एक बात कहना चाहता हूँ &#8211; कांग्रेस उत्तर प्रदेश में काफी मिहनत कर रही है और इस मिहनत का उसे फल भी मिल रहा है. </p>
<p>कांग्रेस के मिहनत में फुट डालो और राज करो की निति भी सामिल है &#8230;. फिर भी ये मिहनत तो कर ही रहे हैं.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on गुलाममंडल खेल और नेहरू स्टेडियम by Rakesh Singh</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%b2-%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a5%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8d/comment-page-1/#comment-2307</link>
		<dc:creator>Rakesh Singh</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Jul 2010 20:52:58 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5440#comment-2307</guid>
		<description>सहमत हूँ आपसे &#124; भारत की विडम्बना ही है की गुलामी वाली मानशिकता को अभी भी पूजा जा रहा है &#124;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सहमत हूँ आपसे | भारत की विडम्बना ही है की गुलामी वाली मानशिकता को अभी भी पूजा जा रहा है |</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on ब्लॉग &#8211; संसद पर एक कविता by mahak</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/28/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be/comment-page-1/#comment-2306</link>
		<dc:creator>mahak</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Jul 2010 17:37:58 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5367#comment-2306</guid>
		<description>@Jeetu Goyal 
अरे प्रभु हम तो मान रहें हैं , हम सबसे बड़े गलत हैं आप सबसे बड़े सही हैं ,हमारी सबसे बड़ी गलती ये है की हम किसी गरीब की ,हजारों वरसों से दबे कूचले लोगों की मदद ये देखकर नहीं करना चाहते की उसकी जाती या धर्म क्या है , हमारी सबसे बड़ी गलती ये है की हम किसी को भी अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक ना मानकर उसे भारतीय मानना चाहते हैं ,और हमारी एक और सबसे बड़ी गलती आपको बताऊँ मैं , सत्य गौतम नाम का खुद को दलित कहने वाला व्यक्ति हमारे ब्लॉग पर आये और हमें अपशब्द कहे और बदले में हम उसे प्रेमपूर्ण निमंत्रण दें ब्लॉग का सदस्य बनने का तो ये भी हमारी सबसे बड़ी गलती है ,अलोक मोहन नाम के दलित ब्लॉगर को हम सभी की तरह सादर निमंत्रित करें ब्लॉग का सदस्य बनने के लिए और बदले में वो हम पर हँसे और हम सबको फ़ालतू लोग बताए तो ये भी हमारी ही गलती है

भगवन हम तो मान रहें हैं की हम गलतियों के पुतले हैं ,सही इंसान तो आप जैसे लोग हैं जो किसी गरीब की मदद करने से पहले ये देखना चाहते हैं की वो दलित है या सवर्ण ?,अगड़ा है या पिछड़ा ?,हिंदू है या मुसलमान ?

सच में प्रभु आप धन्य हैं , शत-२ प्रणाम है आपको

महक</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@Jeetu Goyal<br />
अरे प्रभु हम तो मान रहें हैं , हम सबसे बड़े गलत हैं आप सबसे बड़े सही हैं ,हमारी सबसे बड़ी गलती ये है की हम किसी गरीब की ,हजारों वरसों से दबे कूचले लोगों की मदद ये देखकर नहीं करना चाहते की उसकी जाती या धर्म क्या है , हमारी सबसे बड़ी गलती ये है की हम किसी को भी अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक ना मानकर उसे भारतीय मानना चाहते हैं ,और हमारी एक और सबसे बड़ी गलती आपको बताऊँ मैं , सत्य गौतम नाम का खुद को दलित कहने वाला व्यक्ति हमारे ब्लॉग पर आये और हमें अपशब्द कहे और बदले में हम उसे प्रेमपूर्ण निमंत्रण दें ब्लॉग का सदस्य बनने का तो ये भी हमारी सबसे बड़ी गलती है ,अलोक मोहन नाम के दलित ब्लॉगर को हम सभी की तरह सादर निमंत्रित करें ब्लॉग का सदस्य बनने के लिए और बदले में वो हम पर हँसे और हम सबको फ़ालतू लोग बताए तो ये भी हमारी ही गलती है</p>
<p>भगवन हम तो मान रहें हैं की हम गलतियों के पुतले हैं ,सही इंसान तो आप जैसे लोग हैं जो किसी गरीब की मदद करने से पहले ये देखना चाहते हैं की वो दलित है या सवर्ण ?,अगड़ा है या पिछड़ा ?,हिंदू है या मुसलमान ?</p>
<p>सच में प्रभु आप धन्य हैं , शत-२ प्रणाम है आपको</p>
<p>महक</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on देश के दीमक भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्यवाही हो by Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/07/29/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%95-%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af/comment-page-1/#comment-2305</link>
		<dc:creator>Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Jul 2010 16:43:39 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5441#comment-2305</guid>
		<description>मायावती के गुणगान और मायावती के भ्रष्टाचार की अनदेखी करके लिखा गया आलेख शुरू में ठीक लगता है, लेकिन राहुल और माया की गैर जरूरी प्रंशंसा ने लेख का जयका बिगाड़ दिया!
कौन नहीं जानता की राहुल को अपनी पार्टी का भ्रष्टाचार नहीं दीखता और मायावती को खुद का भंडार?
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा &#039;निरंकुश&#039; जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक समाचार-पत्र प्रेसपालिका के सम्पादक, होम्योपैथ चिकित्सक, मानव व्यवहारशास्त्री, दाम्पत्य विवादों के सलाहकार, विविध विषयों के लेखक, टिप्पणीकार, कवि, शायर, चिन्तक, शोधार्थी, तनाव मुक्त जीवन, लोगों से काम लेने की कला, सकारात्मक जीवन पद्धति आदि विषय के व्याख्याता तथा समाज एवं प्रशासन में व्याप्त नाइंसाफी, भेदभाव, शोषण, भ्रष्टाचार, अत्याचार और गैर-बराबरी आदि के विरुद्ध 1993 में स्थापित एवं 1994 से राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली से पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) के मुख्य संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। जिसमें 4393 रजिस्टर्ड आजीवन कार्यकर्ता देश के 17 राज्यों में सेवारत हैं। इस संगठन ने आज तक किसी गैर-सदस्य, सरकार या अन्य किसी से एक पैसा भी अनुदान ग्रहण नहीं किया है। फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666
E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मायावती के गुणगान और मायावती के भ्रष्टाचार की अनदेखी करके लिखा गया आलेख शुरू में ठीक लगता है, लेकिन राहुल और माया की गैर जरूरी प्रंशंसा ने लेख का जयका बिगाड़ दिया!<br />
कौन नहीं जानता की राहुल को अपनी पार्टी का भ्रष्टाचार नहीं दीखता और मायावती को खुद का भंडार?<br />
-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा &#8216;निरंकुश&#8217; जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक समाचार-पत्र प्रेसपालिका के सम्पादक, होम्योपैथ चिकित्सक, मानव व्यवहारशास्त्री, दाम्पत्य विवादों के सलाहकार, विविध विषयों के लेखक, टिप्पणीकार, कवि, शायर, चिन्तक, शोधार्थी, तनाव मुक्त जीवन, लोगों से काम लेने की कला, सकारात्मक जीवन पद्धति आदि विषय के व्याख्याता तथा समाज एवं प्रशासन में व्याप्त नाइंसाफी, भेदभाव, शोषण, भ्रष्टाचार, अत्याचार और गैर-बराबरी आदि के विरुद्ध 1993 में स्थापित एवं 1994 से राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली से पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) के मुख्य संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। जिसमें 4393 रजिस्टर्ड आजीवन कार्यकर्ता देश के 17 राज्यों में सेवारत हैं। इस संगठन ने आज तक किसी गैर-सदस्य, सरकार या अन्य किसी से एक पैसा भी अनुदान ग्रहण नहीं किया है। फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से <img src='http://www.janokti.com/wp-includes/images/smilies/icon_cool.gif' alt='8)' class='wp-smiley' /> मो. 098285-02666<br />
E-mail : <a href="mailto:dr.purushottammeena@yahoo.in">dr.purushottammeena@yahoo.in</a></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on हिन्दू मन की खोज by Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'</title>
		<link>http://www.janokti.com/2010/02/03/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%ae%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%9c/comment-page-1/#comment-2302</link>
		<dc:creator>Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Jul 2010 12:00:49 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=1503#comment-2302</guid>
		<description>आदरणीय श्री कृष्ण कुमार जी आपके लेख को समझ सकने की समझ रखने वालों के लिये आपका आलेख निश्चय ही सोचने पर विवश करता है। हिन्दू धर्म एवं हिन्दू धर्म के अनुयाईयों की मानसिकता का आपने बहुत ही उम्दा विश्लेषण किया है।

लेख को ओपान्त (शुरू से अन्त तक) पढने पर लगता रहा, जैसे मैं आपका लेख नहीं पढ रहा, बल्कि आपके मुख से ही एक एक शब्द सुन रहा हँू। आपकी लेखन शैली गजब की है। जिसके लिये मैं केवल आपका आभार ही प्रकट कर सकता हँू।
इसे या तो मेरी समझ की कमी कहँू या फिर कोई और बात लेकिन इस विश्लेषणात्मक लेख के माध्यम से मैं आम व्यक्ति को कोई एक लाईन का सन्देश देने में अपने आपको अक्षम पा रहा हँू। मुझे कोई निष्कर्ष समझ में नहीं आ रहा है। लेख में पाठक को बांधे रखने और उसके विचारतन्त्र को हिला देने की शक्ति है, लेकिन कहीं भी कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। शायद यह मेरी समझ की ही कमजोरी रही है। धन्यवाद।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आदरणीय श्री कृष्ण कुमार जी आपके लेख को समझ सकने की समझ रखने वालों के लिये आपका आलेख निश्चय ही सोचने पर विवश करता है। हिन्दू धर्म एवं हिन्दू धर्म के अनुयाईयों की मानसिकता का आपने बहुत ही उम्दा विश्लेषण किया है।</p>
<p>लेख को ओपान्त (शुरू से अन्त तक) पढने पर लगता रहा, जैसे मैं आपका लेख नहीं पढ रहा, बल्कि आपके मुख से ही एक एक शब्द सुन रहा हँू। आपकी लेखन शैली गजब की है। जिसके लिये मैं केवल आपका आभार ही प्रकट कर सकता हँू।<br />
इसे या तो मेरी समझ की कमी कहँू या फिर कोई और बात लेकिन इस विश्लेषणात्मक लेख के माध्यम से मैं आम व्यक्ति को कोई एक लाईन का सन्देश देने में अपने आपको अक्षम पा रहा हँू। मुझे कोई निष्कर्ष समझ में नहीं आ रहा है। लेख में पाठक को बांधे रखने और उसके विचारतन्त्र को हिला देने की शक्ति है, लेकिन कहीं भी कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। शायद यह मेरी समझ की ही कमजोरी रही है। धन्यवाद।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
</channel>
</rss>
