सर्वश्रेष्ठ संतान प्राप्ति के लिए नियम
0प्राणियों की हिंसा ना करें , किसी को शाप न दें , झूठ न बोलें नख और रोम छेदन ना करें , जल में डूबकी लगाकर ना नहाएं , अपवित्र
मनुष्यों में पशु की भांति यथेच्छाचार न हो , इन्द्रियलालसा और भोगभाव मर्यादित रहें , भावों में शुद्धि रहे , धीरे धीरे संयम के द्वारा मनुष्य त्याग की ओर बढे
नागेन्द शर्मा आम तौर पर वासना का तात्पर्य ‘इच्छा’ समझा जाता है। इच्छा किसी भी रुप मे व्यक्त हो सकती है। अतः ‘वासना’ शब्द का प्रयोग हम किसी भी प्रकार
जब भारतीय मनोरंजन के आकाश में कलर्स चैनल का आगमन हुआ तब लगा कि यह इन्द्रधनुषी चैनल भविष्य में स्वस्थ और प्रेरक प्रसारण के क्षेत्र में अन्य चैनलों के लिए
प्राणियों की हिंसा ना करें , किसी को शाप न दें , झूठ न बोलें नख और रोम छेदन ना करें , जल में डूबकी लगाकर ना नहाएं , अपवित्र
मनुष्यों में पशु की भांति यथेच्छाचार न हो , इन्द्रियलालसा और भोगभाव मर्यादित रहें , भावों में शुद्धि रहे , धीरे धीरे संयम के द्वारा मनुष्य त्याग की ओर बढे
नागेन्द शर्मा आम तौर पर वासना का तात्पर्य ‘इच्छा’ समझा जाता है। इच्छा किसी भी रुप मे व्यक्त हो सकती है। अतः ‘वासना’ शब्द का प्रयोग हम किसी भी प्रकार
जब भारतीय मनोरंजन के आकाश में कलर्स चैनल का आगमन हुआ तब लगा कि यह इन्द्रधनुषी चैनल भविष्य में स्वस्थ और प्रेरक प्रसारण के क्षेत्र में अन्य चैनलों के लिए
मित्रों,कई साल पहले मेरा एक दूर का मित्र हुआ करता था,नाम मुझे याद है लेकिन अपना पत्रकारिता धर्म निभाते हुए मैं बताऊँगा नहीं.दूर का मित्र इसलिए क्योंकि वह मेरे अभिन्न
मित्रों,मानव ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना है यह आपको भी पता है.हम लोग बडभागी हैं जो हमें मानव-शरीर मिला है.शास्त्रों में कहा गया है कि शरीरमाद्यं धर्म खलुसाधनं यानि शरीर ही
अभी कुछ दिन पहले स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि होमोसेक्सुअलिटी एक बीमारी है जो पश्चिमी देशो से होती हुई अब भारत में भी आ रही है
मेरा पिछ्ला ही लेख सरकार द्वारा नाबालिक बालिकावो और बालको को सहमति सेक्स देने सम्बन्धी विचाराधीन बिल पर आक्रोस के रूप में था.. जब इस लेख पर लोग प्रतिक्रिया कर
आज सुबह उठा और जैसे ही पेपर हाथ में लिया तो हमारी देश नपुंसक केंद्र सरकार का एक और कला कारनामे पर मेरी नजर पड़ी वो लोग 12 साल के
प्रिय आत्मन ! सेक्स चिंतन की कड़ियाँ पिछले कुछ महीनों से जुड़ नहीं पा रही थी | आज थोड़ी फुरसत में कुछ मानवोपयोगी तथ्यों के आलोक में इस श्रृंखला को