इस गणतंत्र तक ना गण बचा है ना तंत्र !
3लोक का स्थान स्वयं ने ले लिया और तंत्र का स्थान परिवादवाद ने, बची-खुची कसर जातिवाद के तंत्र ने कर दी। बढ़ते लम्पट तंत्र एवं गिरते राजनीतिक तंत्र से कहीं न
पढ़े लिखे रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को हटाकर इंटर पास मुकुल राय को उनके स्थान पर देश का नया रेल मंत्री बनाकर कांग्रेस को पटखनी दे दी हो पर कांग्रेस
यूपीए पार्ट 2 में जो कुछ गडबडझाला चल रहा है उसको लेकर राजनीतिक पंडे भिन्न-भिन्न अटकलें लगाते रहते हैं | सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह को लेकर जिन बातों की
अन्ना टीम का रविवार को ६ घण्टे का सांकेतिक अनशन जंतर मंतर दिल्ली में सम्पन्न होने के बाद वहां व्यक्त की गई क्रियाओं की प्रतिक्रिया में संसद में जो अन्ना
लोक का स्थान स्वयं ने ले लिया और तंत्र का स्थान परिवादवाद ने, बची-खुची कसर जातिवाद के तंत्र ने कर दी। बढ़ते लम्पट तंत्र एवं गिरते राजनीतिक तंत्र से कहीं न
देश में सबसे बड़ा राज्य का दर्जा उत्तर प्रदेश का प्राप्त है। पूरे प्रदेश में अब 75 जिले बन चुके हैं। जिसमें 403 सीटों पर चुनाव होना है। सबसे बड़ा
उत्तर प्रदेश में चुनावी दंगल ,राहुल -अखिलेश का युवा नेतृत्व ,चुनौतियाँ और संभावनाएं : उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का पारा दिन प्रति दिन तेज़ी से बढ़ता ही
उमा भारती अपनी तीसरी राजनीतिक पारी में उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय फलक पर छाने लगी हैं | उमा भारती आजकल पोस्टर से लेकर टीवी स्क्रीन पर शीर्ष नेतृत्व के साथ
अंततः जैसा अपेक्षित था, आगामी माह में होने चुनावों के प्रपंच अपनी चरम सीमा पर पहुंचने लगे हैं, और इन सभी प्रपंचो का एक मात्र लक्ष्य सत्ता पर पहुंचना है.
अपने देश में आजकल व्यापारी-नेताओं का ही बोलबाला है।शायद ऐसे बहुत कम नेता हैं जो किसी भी तरह के व्यापार में शामिल न हो।गृह मंत्री से लेकर कृषि मंत्री तक
पंजाब विधान सभा चुनावों में विदेशों में रहने वाले पंजाबी प्रवासी गहरी रुची ले रहे है। राज्य की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों कांग्रेस एवं अकाली दल के पक्ष में यह
अन्ना हजारे के जादुई दिमाग का ही एक फल है राईट टू रिकौल।इस कानून के तहत जनता को पाँच वर्षों के बीच में ही अपने द्वारा चुने गए सांसद को
मौसम विज्ञान के आंकड़ों पर अगर हम विश्वास करें तो भारत में सबसे ज्यादा ठंडा जनवरी का महीना होता है लेकिन अगर हम देश की राजनीतिक जलवायु की दृष्टि से
दोस्तों, आपके दिलो-दिमाग में आज से लगभग छ: साल पहले के बिहार के बारे में कुछ भी याद होगा तो वो होगा वहाँ का कुशासन जिसके मुखिया हुआ करते थे