Archive for category: संसद मार्ग

इस गणतंत्र तक ना गण बचा है ना तंत्र !

इस गणतंत्र तक ना गण बचा है ना तंत्र !

3 डॉ. शशि तिवारी / 2012/01/26 11:30 am

लोक का स्थान स्वयं ने ले लिया और तंत्र का स्थान परिवादवाद ने, बची-खुची कसर जातिवाद के तंत्र ने कर दी। बढ़ते लम्पट तंत्र एवं गिरते राजनीतिक तंत्र से कहीं न

चुनावी पेंच… प्रदेश की राजनीति देश पर हावी

चुनावी पेंच… प्रदेश की राजनीति देश पर हावी

0 जितेन्द्र कुमार नामदेव / 2012/01/24 7:38 pm

देश में सबसे बड़ा राज्य का दर्जा उत्तर प्रदेश का प्राप्त है। पूरे प्रदेश में अब 75 जिले बन चुके हैं। जिसमें 403 सीटों पर चुनाव होना है। सबसे बड़ा

यूपी का चुनावी दंगल : चुनौतियाँ और संभावनाएं

यूपी का चुनावी दंगल : चुनौतियाँ और संभावनाएं

0 अरविन्द विद्रोही / 2012/01/23 5:44 pm

उत्तर प्रदेश में चुनावी दंगल ,राहुल -अखिलेश का युवा नेतृत्व ,चुनौतियाँ और संभावनाएं     : उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का पारा दिन प्रति दिन तेज़ी से बढ़ता ही

ऐसा क्या है उमा भारती के पास ? जानिये उमा से जुडी 11 बातें ..

ऐसा क्या है उमा भारती के पास ? जानिये उमा से जुडी 11 बातें ..

2 जनोक्ति डेस्क / 2012/01/20 7:23 pm

उमा भारती अपनी तीसरी राजनीतिक पारी में उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय फलक पर छाने लगी हैं | उमा भारती आजकल पोस्टर से लेकर टीवी स्क्रीन पर शीर्ष नेतृत्व के साथ

वर्तमान राजनीति का विकल्प कैसा हो ? आप भी सोचिये !

वर्तमान राजनीति का विकल्प कैसा हो ? आप भी सोचिये !

2 किशोर बडथ्वाल / 2012/01/19 5:12 pm

अंततः जैसा अपेक्षित था, आगामी माह में होने चुनावों के प्रपंच अपनी चरम सीमा पर पहुंचने लगे हैं, और इन सभी प्रपंचो का एक मात्र लक्ष्य सत्ता पर पहुंचना है.

राजनीति को अपने उद्देश्य से भटका रहे हैं व्यापारी-नेता।

राजनीति को अपने उद्देश्य से भटका रहे हैं व्यापारी-नेता।

2 कौशिक राज / 2012/01/18 9:30 pm

अपने देश में आजकल व्यापारी-नेताओं का ही बोलबाला है।शायद ऐसे बहुत कम नेता हैं जो किसी भी तरह के व्यापार में शामिल न हो।गृह मंत्री से लेकर कृषि मंत्री तक

प्रवासी भारतीयों और डेरों की पंजाब चुनाव में बल्ले-बल्ले

प्रवासी भारतीयों और डेरों की पंजाब चुनाव में बल्ले-बल्ले

0 आर.एल फ्रांसिस / 2012/01/18 7:38 pm

पंजाब विधान सभा चुनावों में विदेशों में रहने वाले पंजाबी प्रवासी गहरी रुची ले रहे है। राज्य की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों कांग्रेस एवं अकाली दल के पक्ष में यह

लोकतान्त्रिक अधिकार है ‘राईट टू रिकॉल’

2 कौशिक राज / 2012/01/17 9:30 pm

अन्ना हजारे के जादुई दिमाग का ही एक फल है राईट टू रिकौल।इस कानून के तहत जनता को पाँच वर्षों के बीच में ही अपने द्वारा चुने गए सांसद को

सावधान ! कोई ले ना उड़े आपका वोट ..

सावधान ! कोई ले ना उड़े आपका वोट ..

4 ब्रज किशोर सिंह / 2012/01/17 9:29 am

मौसम विज्ञान के आंकड़ों पर अगर हम विश्वास करें तो भारत में सबसे ज्यादा ठंडा जनवरी का महीना होता है लेकिन अगर हम देश की राजनीतिक जलवायु की दृष्टि से

लालू के नक़्शे कदम पर चल रही है केंद्र सरकार

लालू के नक़्शे कदम पर चल रही है केंद्र सरकार

1 कौशिक राज / 2012/01/16 6:30 pm

दोस्तों, आपके दिलो-दिमाग में आज से लगभग छ: साल पहले के बिहार के बारे में कुछ भी याद होगा तो वो होगा वहाँ का कुशासन जिसके मुखिया हुआ करते थे