Archive for category: राष्ट्रीय

ममता तूं तो गयी बंगाली जनता के मन से

ममता तूं तो गयी बंगाली जनता के मन से

0 ब्रज किशोर सिंह / 2012/04/20 12:01 pm

मित्रों, ममता बहुत ही महान शब्द है, महान भाव है और महान अनुभूति तो है ही. परन्तु इस आलेख में हम जिस ममता का नीर-क्षीर-विश्लेषण करने बैठे हैं वह ममता

ममता ने घुटनों पर खड़ा किया कांग्रेस को!

ममता ने घुटनों पर खड़ा किया कांग्रेस को!

1 लिमटी खरे / 2012/04/17 4:12 pm

कांग्रेस से टूटकर अलग हुंईं ममता बनर्जी इस समय पूरी दादा गिरी पर आमदा हैं। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार और अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा ममता बनर्जी की नैतिक और अनैतिक

जाति की राजनीति में दबते अपराध

जाति की राजनीति में दबते अपराध

2 श्याम एन रंगा / 2012/04/12 4:07 pm

जातिगत राजनीति वर्तमान में भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस देश में जाति के नाम पर राजनैतिक पार्टियां  टिकट वितरण करती है, जाति के नाम

ढ़ाक के तीन पात जैसे हैं यूपी में कांग्रेस के हालात

ढ़ाक के तीन पात जैसे हैं यूपी में कांग्रेस के हालात

0 डॉ. शशि तिवारी / 2012/04/11 10:02 pm

कहते हैं कि 12 साल में घूरे के भी दिन फिर जाते हैं लेकिन उत्तरप्रदेश में तो दूने वर्ष बीतने पर भी कांग्रेस पार्टी की ढ़ाक के तीन पात की

2G घोटाले पर प्रेसिडेंशियल रिफरेंस लेने का प्रस्ताव पास

2G घोटाले पर प्रेसिडेंशियल रिफरेंस लेने का प्रस्ताव पास

2 जितेन्द्र प्रताप सिंह / 2012/04/11 4:45 pm

कांग्रेस अब इस देश के न्यायपालिका पर भी बिलकुल विश्वास नही करती | कांग्रेस के लिए असली तीर्थ स्थान या असली सुप्रीम कोर्ट १० जनपथ है | आज के पहले

राहुल की नजरों से उतर गए दिग्गी, कनिष्क

राहुल की नजरों से उतर गए दिग्गी, कनिष्क

0 लिमटी खरे / 2012/04/08 11:08 pm

कल तक राहुल गांधी के अघोषित द्रोणाचार्य की भूमिका निभाने वाले कांग्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह का शनि भारी होता दिख रहा है। राहुल के दरबार में अब दिग्गी

‘वेतन फर्स्ट, वतन लास्ट’

‘वेतन फर्स्ट, वतन लास्ट’

0 कुन्दन पाण्डेय / 2012/04/07 12:02 pm

पण्डित दीनदयाल उपाध्याय का एक कथन है कि “राजनीतिज्ञों को नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट” के उदात्त आदर्श को ध्यान में रखकर राष्ट्र सेवा की राजनीति करनी चाहिये, परन्तु

32 साल की भाजपा और राजनीति की रपटीली राहें

32 साल की भाजपा और राजनीति की रपटीली राहें

0 पंकज झा / 2012/04/06 9:41 pm

जुलाई का महीना दिल्ली के लिए काफी गर्म होता है. पर यह धूप तब और कष्टकर हो जाता है जब आप बायो-डाटा लेकर नौकरी की तलाश में दिल्ली की सड़कों

आंदोलन के एक साल,क्या बदल गया देश?

आंदोलन के एक साल,क्या बदल गया देश?

0 गिरिजेश कुमार / 2012/04/06 9:20 pm

कल आधी रात के बाद मेरे मोबाईल पर एक मैसेज आया- “अन्ना के आंदोलन का एक साल पूरा हो गया। क्या बदल गया देश?” मेरा जवाब था “बड़े परिवर्तन में

कितनी बदल गयी है वामपंथी पार्टियां ,सीपीएम की 20वीं कांग्रेस में 7 करोड का अनुमान

कितनी बदल गयी है वामपंथी पार्टियां ,सीपीएम की 20वीं कांग्रेस में 7 करोड का अनुमान

0 चाणक्य चिंतन / 2012/04/06 9:09 pm

शरद जोशी ने वर्षों पहले अपने एक व्यंग में लिखा था ”  जब तक पक्षपात ,निर्णयहीनता,ढीलापन ,दोमुंहापन ,पूर्वाग्रह ,ढोंग ,दिखावा ,सस्ती आकांक्षा और लालच कायम हैं | तब तक कांग्रेस