Archive for category: राष्ट्रीय

कोई भूखा ना रहे : खाद्य सुरक्षा विधेयक

कोई भूखा ना रहे : खाद्य सुरक्षा विधेयक

2 रमेश भट्ट / 2012/01/08 12:30 am

सरकार अपना महत्वकांक्षी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पेश कर चुकी है। इस विधेयक के मुताबिक केन्द्र सरकार देश की 63.5 फीसदी आबादी को सस्ती कीमत पर राशन मुहैया

राजनीति की भेंट चढ़ गया लोकपाल विधेयक

राजनीति की भेंट चढ़ गया लोकपाल विधेयक

0 तेजवानी गिरिधर / 2012/01/05 9:38 pm

हर बार किसी न किसी कारण से पारित होने से रुका लोकपाल विधेयक इस बार देशभर में कथित रूप से उठे बड़े जनआंदोलन के बावजूद राजनीति की भेंट चढ़ गया।

लोकमुद्दों के बिल में आरक्षण की राजनीति

लोकमुद्दों के बिल में आरक्षण की राजनीति

1 डॉ. शशि तिवारी / 2012/01/05 9:29 pm

42 वर्षीय प्रौढ़ लोकपाल अब सख्त लोकपाल बनने के मूड में अंततः आ ही गया है। इस उम्र में कुछ अड़ियलपन भीआ जाता है जो सभी देख भी रहे है

प्रभावशाली कानून – वर्ष २०१२ की आवश्यकता

प्रभावशाली कानून – वर्ष २०१२ की आवश्यकता

1 राजीव खंडेलवाल / 2012/01/03 8:12 pm

‘‘वर्ष २०११’’ व्यतीत हो चुका है। पूरे वर्ष अन्ना के लोकपाल की मुहिम ही राष्ट्र के राजनैतिक एवं सार्वजनिक क्षेत्र में छाई रही। ‘अन्ना’ लगातार इस बात पर अड़े रहे

जोश भरे अन्ना का होश भरा कदम

जोश भरे अन्ना का होश भरा कदम

1 ब्रज किशोर सिंह / 2011/12/29 8:03 pm

मित्रों,कोई भी आन्दोलन खड़ा करना और फिर उसे सफलतापूर्वक संचालित करना कोई बच्चों का खेल नहीं होता.कांग्रेस गाँधी के पहले भी थी.उसके पास गाँधी से भी कहीं ज्यादा योग्य नेता

यह कैसी संसद?

यह कैसी संसद?

1 जनोक्ति डेस्क / 2011/12/28 9:08 pm

राजीव खण्डेलवाल: कल देर रात तक चली संसद में अंतत: एक तरफ तो लोकपाल एवं लोकायुक्त बिल पारित कर दिया गया लेकिन दूसरी तरफ लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने वाला

लोकपाल पर नयी राजनीतिक कलाबाजी

लोकपाल पर नयी राजनीतिक कलाबाजी

0 अवधेश कुमार / 2011/12/26 6:22 pm

तमाम बाधाओं को पार करते हुए लोकपाल विधेयक संसद में पेश हो गया। लेकिन इससे राहत और संतोष का कोई कारण नहीं दिखता। इसके पूर्व सात प्रधानमंत्री के कार्यकाल में

देश की असली संसद कौन सी?

देश की असली संसद कौन सी?

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/12/22 8:45 pm

राजीव खण्डेलवाल: विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के लोकतंत्र की संवैधानिक सर्वोच्च संस्था  हमारी संवैधानिक रूप से चुनी गई ‘संसद’ है। संसद के दोनों सदन में लोकसभा, राज्यसभा

बेशर्मी के भोग का नेताओं को लगा रोग

बेशर्मी के भोग का नेताओं को लगा रोग

1 डॉ. शशि तिवारी / 2011/12/13 11:55 pm

सुरा, सुन्दरी और सत्ता अच्छे-अच्छों को पथभ्रष्ट कर देती हैं। यूं तो सुरा और सुन्दरी का चोली दामनका ही संबंध रहा है। इतिहास गवाह है कि अधिकांश घटने वाली घटनाओं

धोखों के बाद भी इरादे बुलंद हैं

धोखों के बाद भी इरादे बुलंद हैं

0 राजीव गुप्ता / 2011/12/11 10:19 pm

जब आप सच्चे दिल से किसी चीज को पाने का दृढ निश्चय कर लेते हैं तथा उसे पाने के लिए अपना कदम आगे बढ़ा देते हैं तो सबसे पहले आपकी दृढ़ता को ईश्वर