Archive for category: संसद मार्ग

वजूद खोती राजनीति

वजूद खोती राजनीति

0 अब्दुल रशीद / 2012/02/20 9:46 pm

सियासत में जीत सबसे अहम होता है। और लोक तन्त्र के लिए लोक और तन्त्र अहम होता है। दुर्भाग्य से दुनिया के सबसे बड़े लोक तन्त्र में आज लोक कि

कौन है भारत का दुश्मन-ईरान या ईस्राइल?

कौन है भारत का दुश्मन-ईरान या ईस्राइल?

2 ब्रज किशोर सिंह / 2012/02/20 7:59 pm

मित्रों,एक कहावत है और वह बिलकुल माकूल भी है कि इस दुनिया में कोई भी शह टुच्ची राजनीति से बचकर नहीं रह सकता.राजनीति की जद में परिवार से लेकर विश्व

माया का राज पिछले 28 वर्षो का …

माया का राज पिछले 28 वर्षो का …

0 पूजा शुक्ला / 2012/02/20 1:11 pm

बहुजन समाज पार्टी के पिछले 28 वर्षो के सफ़र पर नज़र डाले तो ये जानने में ज्यादा समय नहीं लगेगा की बसपा के संस्थापक कांशीराम की तरह ही मायावाती पार्टी

यूपी के चुनावी रंगमंच पर नेताओं की नौटंकी

यूपी के चुनावी रंगमंच पर नेताओं की नौटंकी

2 पूजा शुक्ला / 2012/02/18 4:04 pm

कहा जाता है कि दुश्मनी में भी एक अंदाज़ होना चाहिए परन्तु आजकल राजनीति में ऐसी बात कहाँ ? एक वो समय था जब विपक्ष में बैठे लोग पक्ष वालो

वाह मंत्री जी! बहुत खूब रिकॉर्ड बनाया है आपने।

वाह मंत्री जी! बहुत खूब रिकॉर्ड बनाया है आपने।

0 कौशिक राज / 2012/02/15 9:04 pm

दोस्तों, रिकॉर्ड तो रिकॉर्ड होता है।रिकॉर्ड चाहे सबसे ज्यादा रन बनाने का हो या सबसे अधिक बार शून्य पर आउट होने का, रिकॉर्ड बनाने वाले पर तो सभी की निगाहें

मालदीव के बहाने “जम्बूद्वीप अवधारणा” पर विचार

मालदीव के बहाने “जम्बूद्वीप अवधारणा” पर विचार

0 जयदीप शेखर / 2012/02/15 11:20 am

मालदीव से अबतक जो खबरें आयी हैं, उनके आधार पर दो अनुमान लगाये जा सकते हैं- 1. अपदस्थ राष्ट्रपति नशीद “उदारवादी” सोच के नेता हैं और व्यक्तिगत जीवन में वे

उत्तराखण्ड में कांग्रेसी और भाजपाई खेमे में नतीजों को लेकर धड़कने तेज

उत्तराखण्ड में कांग्रेसी और भाजपाई खेमे में नतीजों को लेकर धड़कने तेज

0 समीर "गुड्डू" / 2012/02/14 10:43 pm

देहरादून: 15 फरवरी, 2012 उत्तराखण्ड में सत्ता पर कौन काबिज होगा इसको लेकर तमाम तरह की अटकले बाज़ार में गर्म है… कोई कांग्रेस कि सरकार बना रहा है तो कोई

मुद्दा-ए-जवाबदेही: ‘विकास यात्रा’ कहीं भीड़ तंत्र का हिस्सा न बन जाए।

मुद्दा-ए-जवाबदेही: ‘विकास यात्रा’ कहीं भीड़ तंत्र का हिस्सा न बन जाए।

1 डॉ. शशि तिवारी / 2012/02/12 7:18 pm

सत्य हमेशा कड़वा होता है और सत्य को सुनने के लिए विवेक की आवश्यकता होती है। शिवराज के राज में भी अब यू तो चुनावी पदचाप का आभास एवं अभ्यास,

उस्तरे की धार पर लोकतंत्र की मूछें

उस्तरे की धार पर लोकतंत्र की मूछें

0 पूजा शुक्ला / 2012/02/11 11:06 pm

ब्रह्मदत्त द्विवेदी याद है ? नहीं ? पर मायावती को सदैव याद रहेंगे ये वही व्यक्ति है जिन्होंने सर्किट हॉउस में बसपा नेत्री की रक्षा के थी .वृद्ध हो चुके

बदल गया है चुनावों का अंदाज

बदल गया है चुनावों का अंदाज

0 पूजा शुक्ला / 2012/02/11 9:55 am

बचपन में चुनाव आते ही, मज़ा आ जाता था, चुनाव के बिल्ले  लगाकर स्कूल जाना, बिल्लो को एकत्र कर कार्ड्स की तरह खेलना, बढ़िया स्टीकर्स अपने भूसाघर के पुराने किवाड़