May 10, 2013

क्या प्रजातंत्र मूर्खो का शासन है ?

शेक्सपियर ने कहा था प्रजातंत्र मूर्खो का शासन है। कुछ ऐसा ही दिखता है हाल में हुए कुछ राज्यों के चुनावी परिणामो पर।   एक तरफ देखता हूँ प्रतिदिन न्यूज पेपर में बढती हुई मंहगाई पर चर्चा हो रही होती है, चर्चा हो रही होती है बढ़ते हुए अपराधो पर । चिंता व्यक्त की जा रही होती है कि इस कदर बढती हुई मंहगाई की । मंहगाई सुरसा के मुंह की तरह बढती जा रही है। दूसरी तरफ केंद्र की सरकार के नित्य नए घोटाले →आगे पढ़ें ..

बहुत देर से दर पे आँखें लगी हैं

मित्रों,वर्ष 2004 में जब कांग्रेस की मनमोहिनी सरकार सत्ता में आई थी तो आपको याद होगा (क्योंकि जनता की याद्दाश्त कतई कमजोर नहीं होती है) कि तय हुआ था कि हर 100-200 दिनों पर प्रधानमंत्री मंत्रियों की कक्षा लगाएंगे और उनको बताएंगे कि मंत्री के काम में कहाँ कमी रह गई। इतना ही नहीं यह तय हुआ था कि मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन कर उनको अंक भी दिए जाएंगे। परन्तु मंत्रियों की कक्षाएं तो कभी ली ही →आगे पढ़ें ..

अन्ना जी से निवेदन

मित्रों,टीम अन्ना की पटना रैली ऐतिहासिक गांधी मैदान में 30 जनवरी को सम्पन्न हो चुकी है हालाँकि उसकी सफलता और विफलता को लेकर अभी भी बहस जारी है और जारी रहेगी। यह तथ्य है कि इस रैली में उतनी भीड़ जमा नहीं हो पाई जितनी की उम्मीद की जा रही थी। परन्तु मेरी समझ से परम आदरणीय अन्ना हजारे जी की मूल समस्या अपेक्षित भीड़ का जमा नहीं पाना नहीं है बल्कि यह है कि अन्ना की टीम एक बार टूट चुकने के बावजूद →आगे पढ़ें ..

यशवंत सिन्हा के अप्रत्याशित तेवर

ज्यादा दिन  नहीं हुए राजनाथ सिंह को भारतीय जनता पार्टी की कमान संभाले हुए और उन्हें आभास भी होगा कि उनकी ताजपोशी के चंद दिनों के भीतर ही पार्टी में प्रधानमंत्री पद की रार इतनी बढ़ जाएगी कि अन्य सहयोगी दल भी उससे झुलसने लगेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी की सरकार में वित्त मंत्री रहे और वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने तीसरी बार गुजरात में भगवा फहराने वाले नरेंद्र मोदी →आगे पढ़ें ..
January 22, 2013

राहुल-राज-तंत्र

हमें अंग्रेजो से आजादी मिली थी या सत्ता का हस्तांतरण हुआ था। यह एक गंभीर विषय है कि क्या हमें आजादी मिली थी। सच तो यह है की 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजो ने सत्ता कांग्रेस की तरफ से जवाहर लाल नेहरु को सौंप दी थी। और नेहरु जी ने अपनी पुत्री इंदिरा गाँधी को , इंदिरा गाँधी अपने छोटे पुत्र संजय गाँधी को सौंपने की तैयारी कर रही थीं पर उनकी अकाल म्रत्यु हो जाने के कारण सत्ता राजीव गाँधी के हाथो पहुँच →आगे पढ़ें ..

भारत अविलंब अपनाये अध्यक्षीय शासन-प्रणाली

मित्रों,जब भारत के संविधान का निर्माण हो रहा था तब संविधान-निर्माताओं के समक्ष भी यह प्रश्न उठा था कि नवोदित राष्ट्र भारत के लिए कौन-सी शासन-प्रणाली अच्छी रहेगी। काफी विचार-विमर्श के बाद स्थायित्व पर उत्तरदायित्व को वरीयता दी गई और इंग्लैंड की तर्ज पर संसदीय शासन-प्रणाली को स्वीकार कर लिया गया। हमारे संविधान-निर्माता तपःपूत थे और स्वतंत्रता-आंदोलन की देन थे इसलिए उन्होंने सोंचा →आगे पढ़ें ..
December 25, 2012

प्रधानमंत्री जी , कुछ भी ठीक नहीं है !

सालों पुराना एक किस्सा याद आया है। बात 1987 की है, उस वक्त हम देश के हृदय प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के उप संपादक हुआ करते थे। उस वक्त मालिक महोदय के एक मित्र आए और अपने मकान या दुकान बेचने का एक विज्ञापन प्रकाशित करने को दिया। मालिक ने उस विज्ञापन के नीचे निशुल्क लिखकर विज्ञापन विभाग को दे दिया। विज्ञापन विभाग ने उसे कंपोजिंग के लिए भिजवा दिया। कंपोजिंग के बाद →आगे पढ़ें ..

सर्व-समाज के शिवराज

लोकेन्द्र सिंह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समाज के प्रत्येक वर्ग के करीबी हो गए हैं। जब कोई अपना हो जाता है तो उसे उसके मुख्य नाम से नहीं बुलाते। उसके लिए प्यार से एक नया नाम यानी निकनेम रखते हैं। प्रदेश में लिंगानुपात बहुत अधिक है। लड़का-लड़की के भेद को कम करने के लिए मुख्यमंत्री ने लाडली लक्ष्मी योजना शुरू की। इसके बाद शिवराज सिंह प्रदेशभर की बच्चियों के 'मामा' →आगे पढ़ें ..

अँधेरी आज़ादी

स्वराज के सपनों को लेकर लंबी लड़ाई के बाद आधीरात को जो सूर्योदय हुआ, उसमें इतना अन्धकार भरा ङुआ है कि अब इस अन्धेरे से मुक्ति की कोई राह नहीं। भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है और इसके शासकीय अध्यक्ष को असंवैधानिक कारपोरेट राज चलाने, मुक्त बाजार के लिए​ ​ जनसंहार की नीतियां लागू करने में किसी प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ता। पर राजधानी में हुए एक बलात्कार के विरोध में राजपथ​ ​पर जनविद्रोह →आगे पढ़ें ..
December 21, 2012

यही अंतर है कांग्रेस और भाजपा में

यह भाजपा है जो अपने एक सूबाई कार्यकर्ता को अपना देश का अध्यक्ष बना देती है। एक प्रदेश के निजाम को तीसरी फतह हासिल करने पर देश का प्रधानमंत्री बनाने की बात कह देती है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में वंशवाद और सामंतीराज का यह आलम है कि दिल्ली की निजाम श्रीमति शीला दीक्षित जो तीन बार दिल्ली पर फतह हासिल कर चुकी हैं, को प्रधानमंत्री तो दूर देश का गृह मंत्री बनाने की बात भी नहीं करती! नरेंद्र मोदी →आगे पढ़ें ..

बिहार में आरटीआई अधिकार नहीं अपराध

मित्रों,बिहार के शासन-प्रशासन की नजर में इन दिनों सूचना मांगने से बड़ा कोई अपराध नहीं है। आप अगर बिहार में सूचना का अधिकार का प्रयोग करने जा रहे हैं तो मेरी सलाह है कि ऐसा तभी करिए जब आप फुरसत में हों यानि जबकि आपको घर का कोई जरूरी काम निकट-भविष्य में नहीं करना हो। अगर सूचना देनेवाला अधिकारी/कर्मचारी दलित हुआ तब तो आपका जेल जाना लगभग निश्चित ही हो जाता है। तब आप पर सीधे भारतीय दंड संहिता →आगे पढ़ें ..

समय की धार में राजनीति

समय रूकता नहीं, समय का पहिया अनवरत, अबाध गति से आदि अनादिकाल से घूम रहा हेै। समय इतिहास रचता है लेकिन माफ नहीं कर सकता। नियति भी समय का इंतजार करती है और समय आने पर उचित अवसर भी देती है। ये बात अलग है कि समय के प्रति हम कितने चैतन्य रहते है। यही से सफलताओं और असफलताओं की कहानी शुरू होती है। समय गवाह है बडी-बडी घटनाओं का जिसने इतिहास रचा फिर बात चाहे सतयुग, क्रेता, द्वापर या कलियुग की ही क्यों →आगे पढ़ें ..

जजों के पदों को खाली रखना आपराधिक कृत्य

आचार्य कौटिल्य ने आज से लगभग ढाई हजार साल पहले ही अपनी प्रसिद्ध पुस्तक अर्थशास्त्र में कहा था कि जिस राष्ट्र में प्रजा को न्याय नहीं मिलता उस राष्ट्र में अराजकता छा जाती है और वह राष्ट्र शीघ्र ही नष्ट हो जाता है। कौटिल्य समुचित न्याय-प्रणाली को राज्य का प्राण समझते थे और उनके अनुसार राज्य का उद्देश्य ही प्रजा के जीवन तथा सम्पत्ति की रक्षा करना तथा असामाजिक तत्त्वों एवं अव्यवस्था →आगे पढ़ें ..

कैग की दीवार में सियासत की सेंध

सीएजी के पूर्व ऑडिटर के बयान ने कांग्रेस को एक अवसर मुहैया करा दिया है। संसद के शीतकालीन सत्र की अवधि अभी चल रही है यद्यपि सदन स्थगति ही रहता है किन्तु आशा है कि यदि सदन चला तो निश्चित रूप से सरकार विपक्ष को टू-जी घोटाले में दर्शायी जा रही राशि पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे अपने मंत्रियों के बयानों की याद अवश्य दिलायेगी। आरपी सिंह के बयान के बाद सियासत में गर्माहट आ गई है। सत्ता पक्ष व विपक्ष →आगे पढ़ें ..

आत्मनिरीक्षण की जरुरत कैग को नहीं सरकार को

मित्रों,इन दिनों भ्रष्टाचार के महान क्षेत्र में सारे पूर्व कीर्तिमानों को भंग कर चुकी कांग्रेस पार्टी माईक टाईसन हुई जा रही है और उसके लिए मुक्केबाजी के अभ्यास के लिए आसान पंचिंग बैग बन गई है वह संस्था जिसको संविधान ने खजाने का पहरेदार बनाया है। मौका मिला नहीं कि चला दिया एक घूसा। यह बात अलग है कि उनके घूसे अक्सर निशाने पर नहीं होते और तब वे टाईसन की तरह काट खाने की कोशिश करने लगते →आगे पढ़ें ..

कुछ निकलेगा सूरजकुंड से ?

हरियाणा का सूरजकुंड भारतीय राजनीति की दिशा-दशा बदलने का अहम पड़ाव साबित हो सकता है। पहले भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक और अब कांग्रेस का संवाद मंथन, इस छोटे से शहर से राजनीतिक शुचिता की उम्मीद नजर आ रही है। राजनीतिक पूर्वाग्रहों से इतर सूरजकुंड में दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने अपनी खामियों को पाटने का जो मन बनाया है उससे आने वाले समय में जनहितैषी राजनीतिक शुरुआत →आगे पढ़ें ..

सोनिया कांग्रेस की गंदी राजनीति से देश को खतरा

मित्रों,पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई बराबर एक कालोत्तीर्ण उक्ति कहा करते थे कि अगर गंगा को साफ करना है तो पहले हमें गंगोत्री को साफ करना होगा। वाजपेई खुद भी कुछ समय के लिए भारतीय राजनीति के शीर्ष पर पहुँचे लेकिन वे भी गंगोत्री को साफ नहीं कर सके और उनके हटने के बाद तो गंगोत्री पूरी तरह से गंदी ही हो गई। यहाँ गंगोत्री से मेरा आशय केंद्र सरकार से है और वाजपेई जी का भी यही मतलब →आगे पढ़ें ..

सियासत की नीयत

वर्तमान में देश का जो भी राजनीतिक परिदृश्य दिख रहा है वो शायद भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार , भाई भतीजावाद , परिवारवाद , और नैतिकता के पत्तन का चरम है । इससे पहले बेशक कई बार इस तरह होता दिखा है कि सत्ता में बैठी हुई सरकार , उसके मंत्री , और नुमाइंदे पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं , घपलों घोटालों की एक श्रंखला तब भी देखने को मिलती रही है । किंतु उन सबसे आगे बढकर इस बार तो जैसे बेशर्मी →आगे पढ़ें ..

महाराष्ट्र में नए राजनीतिक समीकरण

महाराष्ट्र में नए राजनीतिक समीकरणों की आहट सुनाई देने लगी है। खासकर राज्य में सशक्त क्षेत्रीय पार्टी के रूप में स्थापित शिव सेना को लेकर राजनीतिक कयासबाजियों का बाजार गर्माता जा रहा है। यह सभी को ज्ञात है कि शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे की हालत इन दिनों ठीक नहीं है। उनका स्वास्थय उनका साथ नहीं दे रहा। वहीँ पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और बाल ठाकरे के पुत्र उद्धव ठाकरे की भी हाल ही में →आगे पढ़ें ..

मजबूत होते आडवानी

भाजपा के वयोवृद्ध नेता लाल कृष्ण आडवाणी को जो लोग चुका हुआ मान रहे थे उनके लिए यह खबर बुरी हो सकती है। आडवाणी एक बार पुनः भाजपा में मजबूत हो रहे हैं। दरअसल वर्तमान भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी और उनके सहयोगियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पार्टी सहित संघ परिवार भी बैकफुट पर था। विजयदशमी के पर्व पर नागपुर में आयोजित पथ संचलन के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ से जुड़े तमाम एजेंडों →आगे पढ़ें ..