यज्ञ हो तो हिंसा कैसे ।। वेद विशेष ।।
0।। सम्पूर्ण मन्त्र यहाँ देखें ।। संकेत – अग्ने यं ……………………………………………………….. इद्देवेषु गच्छति ।। (ऋग्वेद – 1/1/4) भावार्थ – हे अग्निदेव । आप जिस हिंसा रहित यज्ञ को चारों ओर
निश्चय, विशवास की एक ऐसी कड़ी है जो वक़्त के थपेड़े खाकर ढीली तो पड़ जाती है , पर टूटने से पहले, न टूटने की समझ आ जाय तो निश्चय
एक बुज़र्ग अपनी एक सौ बीसवीं सालग्रह का जशन मना रहे थे, शहर के अज़ीज़ लोग शामिल थे और कुछ अख़बार नवीज़ भी, जिन्होंने उस बुज़र्ग से सवाल किया ”
आशाओं के उजाले को निराशा के अँधेरों में लपेट कर जीवन बिताने वाला इन्सान इतना कँगाल हो जाता है, कि उसे इस बात का इल्म ही नहीं रहता कि क़ुदरत
।। सम्पूर्ण मन्त्र यहाँ देखें ।। संकेत – अग्ने यं ……………………………………………………….. इद्देवेषु गच्छति ।। (ऋग्वेद – 1/1/4) भावार्थ – हे अग्निदेव । आप जिस हिंसा रहित यज्ञ को चारों ओर
।। मूल मन्त्र यहाँ देखें ।। आज के युग में भारतीय मेधा के प्रथम प्रदर्शन ‘वेद’ विद्या के प्रसार प्रचार की बहुत ही आवश्यकता है । वेदों के विषयों में
-एक बार भगवान शंकर व माता पार्वती विचरण करते हुए एक पर्वत पर बैठे थे ! इधर-उधर की बातें होने लगीं ! संसार के बारे में चर्चा हो रही थी
नमस्ते भारतवर्ष , सफल व्यक्तियों से इर्ष्या मत करो ,उनसे कुछ सीखो कोई सफल व्यक्ति आपका शत्रु हो या मित्र ,उससे इर्ष्या न करके ये जानने का प्रयत्न करो कि
उस दिन नए थिंकर पढ़ाए जाने वाले थे, जर्मी बैंथम। पहले दिन तो विद्यार्थियों की उपस्थिति ठीक ही रहती है। उस दिन भी अच्छी भीड़ थी। बैंथम का प्रारंभिक परिचय
जैसे कोई ड्रामा है, वैसे ही यह भी ड्रामा है, लेकिन वे हद के ड्रामा होते हैं और यह तुम्हारा ५००० वर्षों का बेहद का ड्रामा है|” [शिवबाबा] सन १९३६-३७,
नमस्ते भारतवर्ष ! चलिए मैं आपको बतातीं हूँ . हमें अपने जीवन से क्या चाहिए …….? शक्ति एवं बुद्धि , शौर्य, तेज, ओज, शांति, धन-संपत्ति , उत्तम स्वास्थ्य, दाम्पत्य जीवन
जीवन एक दौड़ है . वह बेतहाशा भाग रहा है बगैर यह जाने कि किस ओर जा रहा है ? कुछ पा लेने की ख्वाहिश मन की उत्कंठा को बढ़ा