Archive for category: दर्शन

अजर, अमर हम अविनाशी

0 विजय कुमार / 2012/02/11 11:15 pm

यूनानी साहित्य में एक मृत्युंजयी पक्षी ‘फीनिक्स’ की चर्चा आती है। उसके बारे में मान्यता है कि अपनी राख में से वह फिर-फिर जीवित हो जाता है।  दुनिया के गत

कल और आज

0 देवी नागरानी / 2012/01/22 3:25 pm

कल और आज के बीच का यह पल मेरा है और यही वह समय है जिसमें मैं उस सचाई से परिचित हुई हूँ कि मैं वो नहीं जो कुछ करती

संस्कारित जीवन

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/12/07 12:13 am

सुसंस्कारों को व्यवहार में लाना मानवता का पर्याय है , जिसे हम जिस स्तर पर जितनी अधिक मात्रा  में विकसित कर सकें तो उतने ही अनुपात में हम देवत्व की

अंतर्मन की उलझन

0 गिरिजेश कुमार / 2011/12/04 10:07 pm

सहनशीलता को बुज़दिली मत समझिए ज़िन्दगी की अनसुलझी पहेलियों के बीच खुद को तलाश करती उम्मीदें, इन उम्मीदों को पूरा करने की ख्वाहिश और इन सबके बीच अकेलेपन से जूझते

मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना

0 जयराम "विप्लव" / 2011/11/15 7:12 pm

भारतीयों में कभी भी एकता हो ही नहीं सकती !!! क्यों ? क्योंकि – “मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना” अर्थात – प्रत्येक व्यक्ति – यदि वो जीवित है तो – उस की

भिक्षा बनी रोशनी : स्वामी रामदास

0 बरुण कुमार सिंह / 2011/10/26 11:19 pm

स्वामी रामदास का यह नियम था कि वे स्नान एवं पूजा से निवृत्त हो भिक्षा मांगने के लिए केवल पांच ही घर जाते थे और कुछ न कुछ लेकर ही

राम के नाम पर

राम के नाम पर

0 ब्रज किशोर सिंह / 2011/10/14 8:23 pm

मित्रों,राम नाम भारत का सबसे ज्यादा,सबसे बड़ा नेक नाम है.यही वह नाम है जो एक रामभक्त में महासागर को कूद कर सहज ही पार कर जाने की ताकत उत्पन्न कर

मरना कठिन है, पर जीवित रहना उससे अधिक कठिन होता है।

0 Dadu / 2011/09/04 8:00 pm

मूल्य-बोध धारण किए रहने वालों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती रहती है, इसलिए उनका जीना और भी अधिक कठिन हो जाया करता है। हमारे पिता के जीवन में कठिनाइयों का अभाव

गांधीवाद पर कुछ विचार

0 मनीष कुमार वत्स / 2011/08/22 2:24 pm

नितेश झा गाँधीवाद पर बहुत चर्चाएँ होती है लोग खुद कों गाँधीवादी कहते है या उन्हें बनाया जाता है लेकिन मुझे लगता है कि लोग ठीक से गाँधी या गाँधीवाद

आधुनिक विचार वाले कृष्ण

आधुनिक विचार वाले कृष्ण

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/08/22 1:29 pm

पुष्पक पाटीदार भगवान कृष्ण इस दुनिया में सबसे आधुनिक विचारों वाले भगवान कहे जाएं तो भी गलत नहीं होगा। कृष्ण ने पूरे जीवन ऐसे समाज की रचना पर जोर दिया