कंगाल
0आशाओं के उजाले को निराशा के अँधेरों में लपेट कर जीवन बिताने वाला इन्सान इतना कँगाल हो जाता है, कि उसे इस बात का इल्म ही नहीं रहता कि क़ुदरत
‘‘श्रद्धा भाव है श्राद्ध’’| पितर हमारे किसी भी कार्य में अदृश्य रूप से सहायक की भूमिका अदा करते। क्योंकि अन्ततः हम उन्हीं के तो वंशज हैं। ज्योतिष विज्ञान की मान्यता
वृद्धाश्रम, श्राद्ध की संस्कृति को मरणामंत्रण श्राद्ध का अर्थ होता है, श्रद्धा से जो कुछ दिया जाय। किन्तु आज-कल श्राद्ध का अर्थ है पितरों के उद्देश्य से पिण्डदानादि की क्रिया।
देवर्षि नारद खीझ-से गये थे, क्योंकि तीनों लोकों में राधा की स्तुति हो रही थी। वे स्वयं भी श्रीकृष्ण से कितना प्रेम करते हैं। इसी मानसिक संताप को मन में
आशाओं के उजाले को निराशा के अँधेरों में लपेट कर जीवन बिताने वाला इन्सान इतना कँगाल हो जाता है, कि उसे इस बात का इल्म ही नहीं रहता कि क़ुदरत
जीवन की राहों पर कभी ऐसे इन्सान मिलता है जिन्हें देखकर महसूस होता है कि वह जिंदा तो है पर ज़िंदगी नहीं जी रहा है, बल्कि ज़िंदगी उसे जी रही
8 मई यानी मदर्स डे, इसकी कल्पना करते ही मन में मां के प्रति श्रद्धा और सम्मान की भावना जागृत हो जाती है। संतान की खुशी और सुख माँ के
दुनियां के बाज़ार में बनती बिगड़ती क़िस्मतों के रोज़ मेले लगते हैं और हम ही प्रतिबिम्ब बनकर कभी उस मेले में खो जाते हैं, कभी साथियों के संग मुस्कराते हैं,
The translations of Rumi, the sufi mystic poet of all times are in a true sense the whispers of The Beloved. His unique message of love speaks directly to the
भारत देवी, देवताओं और अवतारों की भूमि है। यहां समय-समय पर अनेक महापुरुषों ने जन्म लेकर मानवता के कल्याण के लिए अपना जीवन अर्पण किया है। ऐसे ही एक श्रेष्ठ
गुरु और शिष्य रेगिस्तान से गुज़र रहे थे. गुरु यात्रा में हर क्षण शिष्य में आस्था जागृत करने के लिए ज्ञान देते रहे थे. “अपने समस्त कर्मों को ईश्वर
भगवान श्री राम के जन्मोत्सव पर आप सब को हार्दिक शुभकामनायें मैं इस अवसर पर प्रार्थना करता हूँ कि देश से दुष्टों का विनाश हो सब सुखी व सम्पन्न हूँ
बिना नागा दारू पिया, घर खर्चे का क्या होगा? बच्चों को नहीं दूध दही, उनके स्वास्थ्य का क्या होगा? बताओ तो, स्कूल की फीस? उनकी किताब का क्या होगा? तू