Archive for category: धर्म-अध्यात्म

दाम्पत्य जीवन में बिखराव

दाम्पत्य जीवन में बिखराव

0 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/05/14 3:11 pm

क्यों विवाह संस्था प्रेम और त्याग की जगह लड़ाई का अखाड़ा बनता जा रहा है ? क्यों पति -पत्नी के रिश्तों की गाँठ कमजोर पड़ती जा रही है ? क्यों

नक्सलवाद की असली तस्वीर

नक्सलवाद की असली तस्वीर

0 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/03/20 9:10 am

राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमन्त्री तक नक्सलवाद को देश की सबसे बडी या आतंकवाद के समकक्ष समस्या बता चुके हैं। अनेक लेखक भी वातानुकूलित कक्षों में बैठकर नक्सलवाद के ऊपर खूब

चिराग दिल  का जलाओ बहुत अंधेरा है

चिराग दिल का जलाओ बहुत अंधेरा है

1 अनिकेत प्रियदर्शी / 2010/03/19 5:40 pm

जगदीश की माँ का देहांत दो महीने पहले हुआ | माँ के रहते हुए जगदीश को कभी भी किसी तरह से कोई परेशानी नहीं हुई | कारण, माँ को मिलने

भारतीय नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

भारतीय नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/17 3:25 pm

नवल अरुण की मंगल लाली ,आच्छादित ज्यों लाल गुलाल ! रंग सुनहला रूप नितहला, नित नव लाये नूतन साल !! भारतीय नूतन वर्ष ( चैत शुक्ल प्रतिपदा {16 मार्च 2010}

आत्ममुग्धता की बढ़ती भावना खतरनाक है

आत्ममुग्धता की बढ़ती भावना खतरनाक है

0 दीपाली पाण्डेय / 2009/10/28 10:40 pm

  मानव स्वयं के होने के बोध यानि अहम् के साथ नहीं जन्म लेता हैं। अहं का भाव समय के की धारा के संग-संग दिलोदिमाग पर छा जाता है। यह

छठ पूजा : सूर्य की आराधना की प्राचीन परम्परा

छठ पूजा : सूर्य की आराधना की प्राचीन परम्परा

4 नरेन्द्र निर्मल / 2009/10/24 5:43 am

प्रकाशोत्सव के ठीक छह दिन बाद मनाए जाने वाले छठ महापर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य षष्ठी का

ब्रह्माण्ड की परम सत्ता

ब्रह्माण्ड की परम सत्ता

1 जनोक्ति डेस्क / 2009/10/20 4:47 pm

ब्रह्माण्ड की परम सत्ता जहां प्रकृति के बन्धन से मुक्त है, उसे निर्गुण और जहां बन्धनयुक्त है, उसे सगुण कहते हैं। सगुण में भी दो विभाग हैं। एक है उनका

आइये खोजें मानव जीवन के रहस्य को {भाग -१}

आइये खोजें मानव जीवन के रहस्य को {भाग -१}

1 जयराम "विप्लव" / 2009/10/17 6:45 pm

जीवन एक दौड़ है . वह  बेतहाशा भाग रहा है बगैर यह जाने कि किस ओर जा रहा है ? कुछ पा लेने की ख्वाहिश मन की उत्कंठा को बढ़ा

सपनों का भरपूर लुत्फ़ उठाइए

1 जनोक्ति डेस्क / 2009/07/04 12:58 pm

काली स्याह अंधेरे में रात को मन के चित्रपटल पर चलने वाली विडियो यूँ हीं अनायास नहीं चलती । उसके गहरे अर्थ होते हैं । हर सपना अपने भीतर कुछ