दाम्पत्य जीवन में बिखराव
0क्यों विवाह संस्था प्रेम और त्याग की जगह लड़ाई का अखाड़ा बनता जा रहा है ? क्यों पति -पत्नी के रिश्तों की गाँठ कमजोर पड़ती जा रही है ? क्यों
कभी इन्सान की जिँदगी में कुछ ऐसे लोग आते हैं जो हवा के झोंके, बारिश की बूँद, फूल के रँग, सइरा में पानी के बगैर रेत के ज़र्रे, दरख़त के
होली उमंग और उल्लास का पर्व है.सारे ग़मों को भुलाकर आगे मंजिल की ओर नए उत्साह से प्रयाण करने का अवसर है.लेकिन यह तो बात हुई होली की.होली से एक
खुशियों का रंग लेके बसंत, आया… बसंत आया यह शाश्वत कहानी, लगने लगी बेमानी, हुआ समय का फेरा, आतंकियों ने घेरा, कर अतिक्रमण, सीमा को दे चुनौती, सबल दानवता, मानवता
क्यों विवाह संस्था प्रेम और त्याग की जगह लड़ाई का अखाड़ा बनता जा रहा है ? क्यों पति -पत्नी के रिश्तों की गाँठ कमजोर पड़ती जा रही है ? क्यों
राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमन्त्री तक नक्सलवाद को देश की सबसे बडी या आतंकवाद के समकक्ष समस्या बता चुके हैं। अनेक लेखक भी वातानुकूलित कक्षों में बैठकर नक्सलवाद के ऊपर खूब
जगदीश की माँ का देहांत दो महीने पहले हुआ | माँ के रहते हुए जगदीश को कभी भी किसी तरह से कोई परेशानी नहीं हुई | कारण, माँ को मिलने
नवल अरुण की मंगल लाली ,आच्छादित ज्यों लाल गुलाल ! रंग सुनहला रूप नितहला, नित नव लाये नूतन साल !! भारतीय नूतन वर्ष ( चैत शुक्ल प्रतिपदा {16 मार्च 2010}
मानव स्वयं के होने के बोध यानि अहम् के साथ नहीं जन्म लेता हैं। अहं का भाव समय के की धारा के संग-संग दिलोदिमाग पर छा जाता है। यह
प्रकाशोत्सव के ठीक छह दिन बाद मनाए जाने वाले छठ महापर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य षष्ठी का
ब्रह्माण्ड की परम सत्ता जहां प्रकृति के बन्धन से मुक्त है, उसे निर्गुण और जहां बन्धनयुक्त है, उसे सगुण कहते हैं। सगुण में भी दो विभाग हैं। एक है उनका
जीवन एक दौड़ है . वह बेतहाशा भाग रहा है बगैर यह जाने कि किस ओर जा रहा है ? कुछ पा लेने की ख्वाहिश मन की उत्कंठा को बढ़ा
काली स्याह अंधेरे में रात को मन के चित्रपटल पर चलने वाली विडियो यूँ हीं अनायास नहीं चलती । उसके गहरे अर्थ होते हैं । हर सपना अपने भीतर कुछ