दुनिया का महानाटक
1जैसे कोई ड्रामा है, वैसे ही यह भी ड्रामा है, लेकिन वे हद के ड्रामा होते हैं और यह तुम्हारा ५००० वर्षों का बेहद का ड्रामा है|” [शिवबाबा] सन १९३६-३७,
आशाओं के उजाले को निराशा के अँधेरों में लपेट कर जीवन बिताने वाला इन्सान इतना कँगाल हो जाता है, कि उसे इस बात का इल्म ही नहीं रहता कि क़ुदरत
जीवन की राहों पर कभी ऐसे इन्सान मिलता है जिन्हें देखकर महसूस होता है कि वह जिंदा तो है पर ज़िंदगी नहीं जी रहा है, बल्कि ज़िंदगी उसे जी रही
The translations of Rumi, the sufi mystic poet of all times are in a true sense the whispers of The Beloved. His unique message of love speaks directly to the
जैसे कोई ड्रामा है, वैसे ही यह भी ड्रामा है, लेकिन वे हद के ड्रामा होते हैं और यह तुम्हारा ५००० वर्षों का बेहद का ड्रामा है|” [शिवबाबा] सन १९३६-३७,
साभार : आईएलओ प्रकाशित पुस्तक “मुक्ति की रह” अनौपचारिक अर्थव्यवस्था मोटे तौर पर इस प्रकार परिभाषित की जा सकती है- ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें अनिगमित उद्यम, अनियत या दिहाड़ी मजदूर है। भारत सहित
मेरा उनसे कोई खून का रिश्ता नहीं था फिर भी मै उनसे बराबर मिलता था घंटो मै उनसे बातें करता था उनको भी अच्छा लगता था मझसे बातें करना। मेरा
१ जून को विश्व तम्बाकू विरोधी दिवस था, इस उपलक्ष्य में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, कहीं शिविर लगाए गए तो कहीं इसके विरोध में रैली निकाली गई लेकिन गौर
यह एक विडंबना ही है कि ‘जीवेम शरदः शतम्’ यानी हम सौ साल जिएं, इसकी कामना करने वाले समाज में मृत्यु को अंगीकार करने की आत्महंता प्रवृत्ति बढ़ रही है।
क्यों विवाह संस्था प्रेम और त्याग की जगह लड़ाई का अखाड़ा बनता जा रहा है ? क्यों पति -पत्नी के रिश्तों की गाँठ कमजोर पड़ती जा रही है ? क्यों
राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमन्त्री तक नक्सलवाद को देश की सबसे बडी या आतंकवाद के समकक्ष समस्या बता चुके हैं। अनेक लेखक भी वातानुकूलित कक्षों में बैठकर नक्सलवाद के ऊपर खूब
जगदीश की माँ का देहांत दो महीने पहले हुआ | माँ के रहते हुए जगदीश को कभी भी किसी तरह से कोई परेशानी नहीं हुई | कारण, माँ को मिलने
मानव स्वयं के होने के बोध यानि अहम् के साथ नहीं जन्म लेता हैं। अहं का भाव समय के की धारा के संग-संग दिलोदिमाग पर छा जाता है। यह
काली स्याह अंधेरे में रात को मन के चित्रपटल पर चलने वाली विडियो यूँ हीं अनायास नहीं चलती । उसके गहरे अर्थ होते हैं । हर सपना अपने भीतर कुछ