बसंत पर ग्रहण का साया!
0खुशियों का रंग लेके बसंत, आया… बसंत आया यह शाश्वत कहानी, लगने लगी बेमानी, हुआ समय का फेरा, आतंकियों ने घेरा, कर अतिक्रमण, सीमा को दे चुनौती, सबल दानवता, मानवता
पुष्पक पाटीदार भगवान कृष्ण इस दुनिया में सबसे आधुनिक विचारों वाले भगवान कहे जाएं तो भी गलत नहीं होगा। कृष्ण ने पूरे जीवन ऐसे समाज की रचना पर जोर दिया
15 अगस्त, 2011 को हम आजादी की 65वीं सालगिरह मनाने जा रहे भारत में कौन कितना-कितना और किस-किस बात के लिये आजाद है? यह बात अब आम व्यक्ति भी समझने
गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व पर स्थानीय मारूति व्यायाम मंदिर के अखाड़े में परम्परागत अखाड़े का आयोजन किया गया। इसमें शहर के कईं पहलवानों ने दांव पेच आजमाए और परम्परागत
खुशियों का रंग लेके बसंत, आया… बसंत आया यह शाश्वत कहानी, लगने लगी बेमानी, हुआ समय का फेरा, आतंकियों ने घेरा, कर अतिक्रमण, सीमा को दे चुनौती, सबल दानवता, मानवता
: मनोरंजन सिंह (पिछली होली के समय उनके ब्लॉग पर प्रकाशित ) जुम्मन मियां हमारे गांव में गंगा जमुनी तहजीब के जीते जागते, चलते फिरते, बोलते चालते प्रतीक हैं। बाइस
वसंत पंचमी के आते ही गांव, नगर के चैराहों पर झंडा गाड़कर कुछ लकड़ियां रख दी जाती हैं। गांव की चैपालों पर रात में लोग एकत्रित होकर फाग गाने लगते
मार्गषीर्ष अमावस्या (5.12.2010) पर विशेष रोचक जानकारी पूरे विश्व में कार्तिक अमावस्या को दीवाली मनायी जाती है। कहते हैं कि भगवान राम, लक्ष्मण और सीता जी 14 साल के वनवास
श्रीमदभगवद्गीता में भक्ति की व्याख्या करते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि भक्ति सहजता से करो न कि हठपूर्वक.जो व्यक्ति मेरे नाम पर शरीर को कष्ट देता है वह
फिर इस वर्ष भी हमने,हम सबने लंकेश रावण के पुतले का दहन कर डाला।नव दुर्गा का उपवास रखा,शक्ति रूपों की पूजा की,माँ-स्वरूप् कन्याओं को भरपूर भोजन कराया,उन्हें भेटें दी।अब हम
हर साल की तरह इस साल भी असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक रूप ’रावण दहन’ की तैयारियां जोर – शोर से चल रही हैं । कॉमन्वेल्थ गेम्स के
रक्षा + बंधन = रक्षाबंधन आज रक्षाबंधन के पुनीत पावन पर्व पर विचारवान व्यक्ति विचार करें कि : रक्षा – (१) किस की (२) किस से (३) किस के द्वारा
बचपन की बात है, अक्सर मै अपने दादाजी से कहानियां सुनाने को कहा करता था.वर्षा रितु, सावन का महिना था. चारों ओर हरियाली,पानी की फुहार गर्मी की तपिश को कम
हर वर्ष की भांति पूरा भारत ब्रिटिश उपनिवेश शासन से हमारी आजादी की वर्षगांठ मना रहा है। लोग ई-मेल , एसएम्एस आदि के द्वारा लोगों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें