अजर, अमर हम अविनाशी
0यूनानी साहित्य में एक मृत्युंजयी पक्षी ‘फीनिक्स’ की चर्चा आती है। उसके बारे में मान्यता है कि अपनी राख में से वह फिर-फिर जीवित हो जाता है। दुनिया के गत
अब्दुल रशीद सिंगरौली मध्य प्रदेश ईदमिलादुन्नबी यानी पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. की पैदाईश का दिन, आज ही के दिन अल्लाह के महबूब और अव्वल व आखिर पैगम्बर ह. मुहम्मद सल्ल. का
कल और आज के बीच का यह पल मेरा है और यही वह समय है जिसमें मैं उस सचाई से परिचित हुई हूँ कि मैं वो नहीं जो कुछ करती
योग सूत्र के अनुसार अविद्या , अस्मिता , राग-द्वेष के कारण जीव को दुःख प्राप्त होता है | उपनिषदों के अनुसार के कण-कण में सत् चित् आनंदस्वरूप परमात्मा ही सर्वत्र हैं तो
यूनानी साहित्य में एक मृत्युंजयी पक्षी ‘फीनिक्स’ की चर्चा आती है। उसके बारे में मान्यता है कि अपनी राख में से वह फिर-फिर जीवित हो जाता है। दुनिया के गत
अब्दुल रशीद सिंगरौली मध्य प्रदेश ईदमिलादुन्नबी यानी पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. की पैदाईश का दिन, आज ही के दिन अल्लाह के महबूब और अव्वल व आखिर पैगम्बर ह. मुहम्मद सल्ल. का
कल और आज के बीच का यह पल मेरा है और यही वह समय है जिसमें मैं उस सचाई से परिचित हुई हूँ कि मैं वो नहीं जो कुछ करती
योग सूत्र के अनुसार अविद्या , अस्मिता , राग-द्वेष के कारण जीव को दुःख प्राप्त होता है | उपनिषदों के अनुसार के कण-कण में सत् चित् आनंदस्वरूप परमात्मा ही सर्वत्र हैं तो
सुसंस्कारों को व्यवहार में लाना मानवता का पर्याय है , जिसे हम जिस स्तर पर जितनी अधिक मात्रा में विकसित कर सकें तो उतने ही अनुपात में हम देवत्व की
सहनशीलता को बुज़दिली मत समझिए ज़िन्दगी की अनसुलझी पहेलियों के बीच खुद को तलाश करती उम्मीदें, इन उम्मीदों को पूरा करने की ख्वाहिश और इन सबके बीच अकेलेपन से जूझते
भारतीयों में कभी भी एकता हो ही नहीं सकती !!! क्यों ? क्योंकि – “मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना” अर्थात – प्रत्येक व्यक्ति – यदि वो जीवित है तो – उस की
स्वामी रामदास का यह नियम था कि वे स्नान एवं पूजा से निवृत्त हो भिक्षा मांगने के लिए केवल पांच ही घर जाते थे और कुछ न कुछ लेकर ही
आज धनतेरस हैं। 5 दिन के दिपोत्सव का आगाज धनतेरस से ही होता है। हिन्दू पंचाग के अनुसार कार्तिक बदी तेरस को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। आज
मित्रों,राम नाम भारत का सबसे ज्यादा,सबसे बड़ा नेक नाम है.यही वह नाम है जो एक रामभक्त में महासागर को कूद कर सहज ही पार कर जाने की ताकत उत्पन्न कर