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	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज &#187; तकनीक</title>
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	<description>Daily news analysis , Hindi samachar ,Hindi magazine,Hindi website,a6V3sbK3z0d4m7JTOT6OQOVo1jQ</description>
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		<title>‘जुगनू’ तथा ‘एस०आर०एम० सैट’  ने अंतरिक्ष में रचा इतिहास</title>
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		<pubDate>Mon, 21 Nov 2011 19:49:28 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डॉ० मनोज मिश्र</dc:creator>
				<category><![CDATA[तकनीक]]></category>

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		<description><![CDATA[भारतीय शिक्षण संस्थाओं ने अपने-अपने उपग्रह ‘जुगनू’ तथा ‘एस०आर०एम० सैट’ को अन्तरिक्ष में भेज कर सचमुच इतिहास रच दिया है। यह वह इतिहास होगा जो देश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान केन्द्र (प्ैत्व्) द्वारा ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/11/jugnu-satelite.jpg"><img class="alignright size-full wp-image-24678" title="jugnu satelite" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/11/jugnu-satelite.jpg" alt="अंतरिक्ष में रचा इतिहास"width="265" height="230" /></a>भारतीय शिक्षण संस्थाओं ने अपने-अपने उपग्रह ‘जुगनू’ तथा ‘एस०आर०एम० सैट’ को अन्तरिक्ष में भेज कर सचमुच इतिहास रच दिया है। यह वह इतिहास होगा जो देश के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान केन्द्र (प्ैत्व्) द्वारा पी०एस०एल०वी०सी०-18 के सफल प्रक्षेपणों ने अन्तरिक्ष के शोध को एक नया आयाम दिया। पी०एस०एल०वी प्रक्षेपण यान की लगातर यह उन्नीसवीं सफलता पूर्वक उड़ान है। सन् 1993 से लेकर अब तक पी०एस०एल०वी द्वारा कुल 20 प्रक्षेपण किये गये। पी०एस०एल०वी०सी०-18 प्रक्षेपण यान से कुल चार सैटेलाइट अन्तरिक्ष की कक्षा में स्थापित किये गये जिनमें भारत-फ्रांस के सहयोग से निर्मित ‘मेघा ट्रापिक’ लक्समबर्ग का ’बेसेलसैट’, आई०आई०टी०, कानपुर का ‘जुगनू’ तथा चेन्नई के निजी विश्वविद्यालय एस०आर०एम० का ‘एस०आर०एम० सैट’ है। अभी तक लगभग 50 सैटेलाइट इन प्रक्षेपण यानों से प्रक्षेपित किये गये परन्तु इस मिशन की एक खास बात यह है इसमें दो सैटेलाइट ‘जुगनू’ तथा ‘एस०आर०एम० सैट’ भारतीय शिक्षण संस्थानों के छात्रों एवं शिक्षकों के प्रयासों से तैयार किये गये है। भारतीय शैक्षणिक इतिहास का यह गौरवशाली रूप है जब आई०आई०टी० कानपुर तथा एस०आर०एम० विश्वविद्यालय चेन्नई ने ‘इसरो’ के निर्देशन में दो उपग्रह अन्तरिक्ष की कक्षा में प्रक्षेपित करवाये और इतिहास रच दिया।</p>
<p style="text-align: justify;">अब तक भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान केन्द्र (इसरो) के द्वारा अन्तरिक्ष में भेजे गये ज्यादातर उपग्रह या तो इसरो के द्वारा निर्मित थे या फिर वे विदेशी उपग्रह थे। यह विवाद का विषय हो सकता है कि देश की आई०आई०टी० का स्तर कैसा है? परन्तु यह निर्विवाद सत्य है कि इनमें अभी भी देश की सर्वश्रेष्ठ मेधा न केवल आ रहीं है बल्कि ‘जुगनू’ जैसा नेनोसैटेलाइट बनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी कर रही है। पी०एस०एल०वी०सी-18 द्वारा प्रक्षेपित प्रमुख 4 उपग्रहों मंे से तीन भारतीय है जबकि एक लक्समवर्ग का है। भारत फ्रांस के सहयेाग सेृ 170 करोड़ की लागत का ‘मेघा ट्रापिक’ उपग्रह मानसून, बाढ़, चक्रवात तथा सूखा का अध्ययन करेगा जबकि लक्समवर्ग का उपग्रह ‘वेसेल सैट’ समुद्र में जहाजों के समुद्री रास्तो की जानकरी देगा। आई०आई०टी०, कानपुर का ‘जुगनू’ देश के किसी भी आई०आई०टी० द्वारा भेजा गया पहला स्वनिर्मित उपग्रह है। वर्ष 2008 से शुरू होकर अब तक के प्रक्षेपण के दौरान लगभग 50 छात्र का तथा 14 प्रोफेसरो का योगदान रहा है। इस पर कुल लागत ृ 3 करोड़ आई है। यह उपग्रह दूर सम्बेदन उपग्रह है। जो पृथ्वी की तस्वीरे भेजेगा जिससे अन्य जानकारियो के अलावा यह भूगर्भ जल स्रोतो की जानकारी भी देगा। यह प्रायोगिक उपग्रह है जिसकी आयु लगभग एक वर्ष अनुमानित है। यह उपग्रह कम वजन का तथा सस्ता है जिससे शोध के अन्य आयाम भी खुलेगे। आई०आई०टी०, कानपुर द्वारा तैयार ‘जुगनू’ ने आई०आई०टी० के छात्रों के प्रति सम्मान का भाव पैदा किया है। इस समय जब देश में आई०आई०टी० के स्तर पर बहस चल रही हैं तब ‘जुगनू’ का प्रक्षेपण इस संस्थानों की शाख बढ़ाने का काम करेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">इस समय जब निजी शिक्षण संस्थाओं और विश्वविद्यालयों की उपयोगिता पर प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है तब एक निजी विश्वविद्यालय एस०आर०एम०, चेन्नई द्वारा ‘एस०आर०एम० सैट’ का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण देश की शिक्षा प्रणाली के लिये राहत देने वाला साबित हो सकता है। निजी विश्वविद्यालय द्वारा किया गया यह प्रयास भारतीय उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। चेन्नई के एस०आर०एम० विश्वविद्यालय ने दो वर्ष पूर्व एक नैनो सैटेलाइट के डिजाइन तथा विकास का निर्णय लिया था जो परिणाम के तौर पर ‘एस०आर०एम० सैट’ के रूप में सामने आया। अपने विश्वविद्यालय के नाम को अंतरिक्ष में ऊॅचा कर रहा यह उपग्रह ‘एस०आर०एम० सैट’ पर्यावरण में हानिकारक ग्रीन हाउस गैसों, कार्बनडाइआक्साइड की उपस्थित का अध्ययन करेगा। विशुद्ध पर्यावरणीय यह उपग्रह विश्वविद्यालय के 50 छात्रों तथा शिक्षकों की अथक मेहनत का परिणाम है। छात्रों ने कक्षाओं की समयावधि के अलावा देर रात तक अतिरिक्त समय देकर इस उपग्रह के लिए काम किया है। कुल 10.4 किग्रा० के वजन के इस उपग्रह की लागत बेहद कम लगभग ृ 1.5 करोड़ आई है। इस निजी विश्वविद्यालय ने अन्तरिक्ष के क्षेत्र में अपना निजी उपग्रह ‘एस०आर०एम० सैट’ भेजकर सचमुच भारतीय शिक्षा जगत में इतिहास लिख दिया है।</p>
<p style="text-align: justify;">इन दोनों शिक्षण संस्थानांें के द्वारा डिजाइन तथा विकसित किये गये इन उपग्रहों से उच्चस्तरीय शोध का रास्ता भी देश की तकनीकी तथा विश्वविद्यालयी शिक्षा में खुलेगा। आई०आई०टी० की गुणवत्ता देश की अन्दर सैदव ही उच्च कोटि की मानी गई है। अतः ‘जुगनू’ का विकास और प्रक्षेपण उसी गुणवत्ता का परिणाम माना जाना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी निजी विश्वविद्यालय द्वारा इस उच्चस्तरीय प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की जानी चाहिए। देश की विश्वविद्यालयी शिक्षा में शोध का स्तर सदैव शक की नजरों से देखा गया है। इस समय एक निजी विश्वविद्यालय द्वारा किया गया यह करिश्मा सचमुच उज्जवल भविष्यि की एक तस्वीर प्रस्तुत करता है। इस प्रक्षेपण से देश के निजी संस्थाओं केा एक सार्थक एवं नई राह मिलेगी जिस पर चलकर वे भारतीय तकनीकी एवं उच्च शिक्षा को नया आयाम दे सकेंगे। निजी विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थाओं को इससे प्रेरणा लेकर अपने यहाॅ उच्चस्तरीय सामयिक शोध को बढ़ावा देने का हौसला मिलेगा। न केवल अन्तरिक्ष जगत में बल्कि बायोटेक, वैकल्पिक ऊर्जा, क्लाउड कम्प्यूटिंग तथा कृषि में उच्चस्तरीय शोधों का काम भी इन विश्वविद्यालयों को करना चाहिए। इक्कीसवीं सदीं में पर्यावरण, तकनीक, भोजन तथा पानी की समस्या जैसे विषय विश्व के पटल पर चुनौती बनने वाले है। इस समय इस तरह के प्रयास निश्चित तौर पर देश के भविष्य की उज्जवल तस्वीर हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं। यह विचारणीय विषय है कि आई०आई०टी० द्वारा उच्चस्तरीय शोध की कल्पना हम करते हैं परन्तु एक निजी विश्वविद्यालय द्वारा किया गया यह काम भारतीय शिक्षा व्यवस्था का पैमाना भी बनेगी। एस०आर०एम० विश्वविद्यालय द्वारा प्रक्षेपित इस उपग्रह के बाद अन्य निजी विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण प्रतिस्पर्धा का माहौल भी निश्चित तौर पर बनेगा, जिसका लाभ भारतीय शिक्षा व्यवस्था को मिलना तय है। एक और परिणाम निकलना तय है कि उन शिक्षण संस्थानों को भविष्य खतरे में पडे़गा जिनकी गुणवत्ता संदिग्ध है।</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
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		<title>विज्ञान एक्सप्रेस</title>
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		<pubDate>Sun, 06 Feb 2011 07:17:28 +0000</pubDate>
		<dc:creator>ब्रज किशोर सिंह</dc:creator>
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		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[इस तरह तो विज्ञान का प्रचार होने से रहा]]></category>

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		<description><![CDATA[अख़बारों में विज्ञान एक्सप्रेस ट्रेन को लेकर आ रही उत्साहपूर्ण ख़बरों ने मुझमें इतना जोश भर दिया कि कल मैं खुद को सोनपुर जाने से रोक नहीं पाया.मेरी ७० वर्षीया माँ जगरानी देवी भी मेरे साथ हो ली.हालांकि वह ज्यादा ]]></description>
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<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-13337" href="http://www.janokti.com/discussion-suggestions-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6/education-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8/attachment/img0251a/"><img class="alignright size-full wp-image-13337" title="IMG0251A" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/IMG0251A.jpg" alt="" width="176" height="144" /></a>अख़बारों  में विज्ञान एक्सप्रेस ट्रेन को लेकर आ रही उत्साहपूर्ण ख़बरों ने मुझमें  इतना जोश भर दिया कि कल मैं खुद को सोनपुर जाने से रोक नहीं पाया.मेरी ७०  वर्षीया माँ जगरानी देवी भी मेरे साथ हो ली.हालांकि वह ज्यादा पढ़ी-लिखी  नहीं है लेकिन उसके कुछ सीखने के जज्बे को देखते हुए मैं उसे साथ ले जाने  से मना नहीं कर पाया.लेकिन जब हम सोनपुर स्टेशन पहुंचे तो पाया कि रेल  प्रदर्शनी देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा है.इसमें भी ९० प्रतिशत  स्कूली बच्चे थे तो कई कूड़ा-कोयला चुननेवाली महिलाएं भी पंक्तियों में लगी  थीं.कई युवाओं को यह कहते भी सुना कि यार अगर अख़बार में यह भी छपता कि  यहाँ इतनी भीड़ जमा हो रही है तो मैं आता ही नहीं.खैर,यह तो आप भी जानते हैं  कि मैं कमजोर ईरादोंवाला तो हूँ नहीं.वो कहते हैं न कि गिरते हैं शह सवार  ही मैदाने जंग में,वो तल्ख़ क्या गिरेंगे जो घुटनों के बल चलें.सो हमने पहले  तो १ किलोमीटर लम्बी पंक्ति का सबसे पिछला सिरा खोजा और खड़े हो गए.पंक्ति  में कई परिचितों को खड़ा पाकर जोश और बढ़ गया.<br />
खैर,ये तो रहा दर्शकों का हाल.वास्तव में हमसे  ज्यादा फटी हुई थी वहां उपस्थित व्यवस्थापकों की.एक फट्टू महाशय बार-बार  कण्ट्रोल रूम को मोबाइल पर फोन किए जा रहे थे कि भीड़ काफी बढ़ गई है,क्या  करुँ?बच्चे ज्यादा हैं,कोई भी हादसा हुआ तो आपलोग समझिएगा?शायद उनकी पूरी  ज़िन्दगी किसी वातानुकूलित कमरे में गुजरी थी या फ़िर महाशय  साइबेरिया-अन्टार्क्टिका जैसे किसी निर्जन स्थल से पधारे थे.श्रीमान  बार-बार व्यवस्था में लगे एन.सी.सी. कैडेटों पर चिल्ला रहे थे जिसका  खामियाजा भुगतना पड़ रहा था पंक्ति में मस्ती में लगे गरीब बच्चों को.टाई-शू  वाले भी मस्ती कर रहे थे और इनसे कहीं ज्यादा कर रहे थे.लेकिन वे तो ठहरे  देश के भविष्य सो उन्हें कौन टोंकता?मेरे सामने मेरे मना करने पर भी कई  मैले-कुचैले कपडे पहने गरीब बच्चों को लाईन से बाहर कर दिया गया.बेचारों की  २ घन्टे की तपस्या पर इस जाड़े में ठंडा पानी डाल दिया गया.उन्होंने  चुपचाप बस्ता उठाया और भारी मन से चल पड़े,अनजाने सफ़र पर.क्या पाता वे  भविष्य में फ़िर से इस तरह की पंक्ति में खड़े होने की हिम्मत करें भी या  नहीं?<br />
जब हम १६ बोगियों वाली इस ट्रेन में दाखिल हुए तो पाया  कि अन्दर भी पंक्ति लगाकर रखी गई है और हद तो यह है कि पंक्ति को रूकने  नहीं दिया जा रहा है.मुझे गुस्सा आ गया और मैंने यह कहकर इसका विरोध किया  कि लोग कुछ सीखने-जानने आए हैं कोई बाबा हरिहरनाथ का दर्शन करने नहीं आए  हैं.फ़िर मैं अपनी माँ के साथ पंक्ति से हट गया और आराम से प्रदर्शनी देखने  लगा.प्रदर्शनी थी बड़ी ज्ञानवर्धक.विज्ञान का ऐसा कोई कोना नहीं जिसके बारे  में उसमें बताया नहीं गया हो.बीच-बीच में लड़के खड़े थे जो बता रहे थे कि  कहाँ किस चीज का मॉडल है.एक जगह हमें एक भविष्य के उपग्रह के मॉडल के बारे  में बताया गया कि यह भारत का पहला उपग्रह होगा.मैंने प्रतिवाद किया कि भारत  का पहला उपग्रह तो आर्यभट्ट था तब बताया गया कि यह पूरी तरह से भारत में  बना पहला उपग्रह होगा.देर तक मैंने हर बोगी में रूककर प्रदर्शनी देखी और  माँ को भी दिखाया.कुछ कमी-सी भी लगी.हमें लगा कि आगंतुकों को कुछ  पाठ्य-सामग्री भी देनी चाहिए थी.<br />
हम तो पंक्ति से अलग हो चुके थे लेकिन पंक्तिबद्ध  लोगों के प्रति व्यवस्था में लगे लोगों का रवैया अब भी वही था.बच्चों को इस  तरह आगे बढाया जा रहा था जैसे इस प्रदर्शनी का कोई उद्देश्य ही नहीं  हो.मैंने ऐसा करनेवाले एक वोलेंतियर से कहा भी कि भीड़ का ही डर था तो या तो  इसे बिहार में लाना ही नहीं चाहिए था या फ़िर १०-१५ दिनों के लिए लाना  था.तीन दिन के लिए लाओगे तो भीड़ तो होगी ही.गलत तो नहीं कहा.इस तरह की  जल्दीबाजी से इस प्रदर्शनी ट्रेन से न तो छात्र विज्ञान की तरफ आकर्षित हो  सकेंगे और न ही वैज्ञानिक समाज की स्थापना में ही मदद मिलेगी.मैं कई सालों  से कहता आ रहा हूँ कि अपने देश में जो भी समस्या है वह सिर्फ व्यवस्था में  है और जहाँ व्यवस्था ठीक भी है तो डरपोक अधिकारी व्यवस्था को सही नहीं रहने  देते.ऐसा क्यों है कि अमेरिका की प्रयोगशालाएँ भारतीय वैज्ञानिकों से पटी  पड़ी हैं और यहाँ देश में प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों का टोंटा पड़ा है.भारत के  पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहब भी हमारे बच्चों में विज्ञान के प्रति घटती  अभिरूचि पर कई बार चिंता व्यक्त कर चुके हैं.इस तरह के औपचारिकतावश किए गए  प्रयासों से तो ऐसा होने से रहा.इसके लिए विस्तृत योजना बनानी  पड़ेगी.सुदूर-भीतरी ग्रामीण इलाकों तक ऐसी ट्रेनों को ले जाना  पड़ेगा,वैज्ञानिकों को ले जाना पड़ेगा और फ़िर जो बच्चे विज्ञान को अपना जीवन  बनाने को तैयार होंगे उन्हें कदम-कदम पर हर तरह से प्रोत्साहित करना  पड़ेगा,सहायता करनी पड़ेगी.खर्च भी ज्यादा नहीं होगा,शायद २-जी स्पेक्ट्रम  घोटाले में गई राशि से भी कम.वरना जो चलता है वही चलता रहेगा.पढ़ाने पर  खर्च करेंगे हम और फायदा उठाएगा अमेरिका.</p>
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		<title>स्वदेशी, विदेशी गौवंश का अन्तर</title>
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		<pubDate>Mon, 05 Jul 2010 08:10:18 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डॉ राजेश कपूर</dc:creator>
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		<category><![CDATA[विषाक्त गौवंश]]></category>

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		<description><![CDATA[विदेशी गौवंश ‘ए-1’ अनेक खोजो से साबित हुआ है कि अधिकांश विदेशी गौवंश विषाक्त है। आॅकलैण्ड की ‘ए-2, कार्पोरेशन तथा प्रसिद्ध खोजी विद्वान ‘डा. कोरिन लेक् मैकने’ की खोजों के अनुसार ‘ए-1’ प्रकार की गौ के दूध में ‘बीटा कैसीन ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong><img class="alignright size-medium wp-image-4207" title="A Jersey cow in a field of grass" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/cow-300x231.jpg" alt="" width="300" height="231" />विदेशी गौवंश ‘ए-1’</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अनेक खोजो से साबित हुआ है कि अधिकांश विदेशी गौवंश विषाक्त है। आॅकलैण्ड की ‘ए-2, कार्पोरेशन तथा प्रसिद्ध खोजी विद्वान ‘डा. कोरिन लेक् मैकने’ की खोजों के अनुसार ‘ए-1’ प्रकार की गौ के दूध में ‘बीटा कैसीन ए-1, पाया गया है जिससे हमारे शरीर में ‘आई जी एफ-१, इन्सुलिन ग्रोथ हार्मोन-१० तरह अधिक निर्माण होने लगता है। यह पहले ही बताया जा चुका है कि ‘आई जीएफ-1’ से कई प्रकार के कैंसर होने के प्रमाण मिल चुके हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसके ईलावा-</strong></p>
<p style="text-align: justify;">‘ हैल्थ जनरल’ न्यूजीलैण्ड के अनुसार ‘ए-1’ दूध से हृदय रोग मानसिक रोग, मधुमेह, गठिया, आॅटिज्म (शरीर के अंगो पर नियंत्रण न रहना) आदि रोग होते हैं। सन् 2003 में ‘ए-2’ ‘कार्पोरेशन’ द्वारा किए सर्वेक्षण से पता चला है कि इन गऊओं के दूध् से स्वीडन, यूके, आस्ट्रेलिया, न्यूजिलेंड में हृदय रोग, मधुमेह रोगों में वृद्धि हुई है। फ्रांस तथा जापान में ‘ए-2’ दूध् से इन रोगों में कमी दर्ज की गई है। प्रशन है कि हानिकारक ‘ए-1’ तथा लाभदायक ए-2 दूध् किन गऊओं में है ?</p>
<p style="text-align: justify;">पश्चिमी वैज्ञानिकों के अनुसार ७०% हालिस्टीन, रेड डैनिश और फ्रिजियन गऊएं हानिकारक ‘ए-1’ प्रोटीन वाली है। जर्सी की अनेक जातियां भी इसी प्रकार की है। पर यह स्पष्ट रूप से कोई नहीं बतला रहा कि लाभदायक ‘ए-2’ प्रोटीन वाली गऊएं कौन सी है, कहां है स्वयं जरा ढूंढ़ें। विचार करें!!</p>
<p style="text-align: justify;">ब्राजील में लगभग 40 लाख भारतीय गौवंश तैयार किया गया हैं और पूरे यूरोप में उसका निर्यात हो रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">इनमें अधिकांश गऊएं भारतीय गीर नस्ल और शेष रैड सिंधी तथा सहिवाल हैं। क्या अब बताने की जरूरत है पड़ेगा कि उपयोगी ‘ए-2’ प्रोटीन वाली गऊएं भारतीय है ?</p>
<p style="text-align: justify;">क्या पशुपालन विभाग का दुरूपयोग करके, करोड़ रु. अनुदान देकर, पशु कल्याण के नाम पर भारतीय गौवंश को नष्ट  करने की गुप्त योजना पश्चिमी ताकतें चला रही हैं. भोले भारतीयों को उनका आभास तक नहीं है। दूध् बढ़ाने और वंश सुधार के नाम पर भारतीय गौवंश का बीज नाश ‘कृत्रिम गर्भाधन’  करके कत्लखानों से कई गुणा अधिक भारतीय गौवंश का विनाश आपकी सहमति, सहयोग से, आपके अपने द्वारा हो रह है। गौवंश विनाश यानी भारत का विनाश। धन व्यय करके कृत्रिम गर्भाधन से अपने अमूल्य ‘ए-2’ गौवंश को हम स्वयं नष्ट कर रहें हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">विषाक्त विदेशी गौवंश से बने संकर भारतीय गौवंश से प्राप्त किया घी, दूध्, दही ही नही, गोबर, गौमुत्रा, स्पर्श और निश्वास भी विषाक्त होगा न? दुग्ध् पदार्थो से हमारा स्वास्थ्य बरबाद नही हो रहा क्या? इनके गोबर, गौमूत्रा से बनी खाद और पंचगव्य औषधिया भी परम हानिकारक प्रभाव वाली होगी। हमारी खेती नष्ट होने, पंचगव्य औषधियों के असफल होने, घी, दूध्, दहीं खाने-पीने पर भी स्वास्थय में सुधार होने की बजाए बिगाड़ का बड़ा कारण यह संकर गौवंश हो सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>समाधान सरल है:</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><img class="alignleft size-medium wp-image-4208" title="Indian Cow" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/Cow-gomatha_vishnu-296x300.gif" alt="" width="296" height="300" />वर्तमान संकर नसल का गौवंश ‘ए-1’ तथा ‘ए-2’ के संयुक्त गुणों वाला है। इनमें ५०% से ६०% दोनो गुण हों तो स्वदेशी गर्भधन की व्यवस्था से अगली पीढ़ी में ‘ए-1’ २५% दूसरी बार १२%  तथा तीसरी बार ६% रह जाएगा। बिगाड़ने वालों ने सन् 1700 से आज तक 300 साल धैर्य से काम किया, हम 10-12 साल प्रयास क्यों नही कर सकते? करने में काफी सरल है।</p>
<p style="text-align: justify;">स्वदेशी विदेशी का अन्तर- विदेशी गौवंश तथा भारतीय गौवंश में कुछ मौलिक अंतर हमने जो जाने हैं वे निम्न है। पर यह सूचि अन्तिम नही, विद्वान और अनुभवी महानुभव इसमें संशोधन-संर्वधन करने की कृपा करें।</p>
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		<title>English to Hindi Dictionary शब्दकोष (shabdkosh) हिंदी से अंग्रेजी</title>
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		<pubDate>Tue, 23 Mar 2010 08:41:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[तकनीक]]></category>
		<category><![CDATA[English to Hindi Dictionary]]></category>
		<category><![CDATA[शब्दकोष (shabdkosh)]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी से अंग्रेजी]]></category>

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		<description><![CDATA[Here u can find English to Hindi Dictionary as well as a Hindi to English Dictionary. online hindi to english dictoinary is very useful for hindi users &#38; people from other countries . to know any language we should enhanced ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: justify;"><span style="color: #272727; font-family: Verdana, Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: x-small;">Here u can find </span><strong>English to Hindi Dictionary</strong><span style="color: #272727; font-family: Verdana, Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: x-small;"> as well as a </span><strong>Hindi to English Dictionary</strong><span style="color: #272727; font-family: Verdana, Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: x-small;">. online hindi to english dictoinary is very useful for hindi users &amp; people from other countries . to know any language we should enhanced our word stock . </span></h2>
<h3 style="text-align: justify;">शब्दकोष (shabdkosh ) हिंदी से अंग्रेजी या अंग्रेजी से हिंदी में इस पोर्टल पर आकर अपने लिए जरुरी शब्दों के अर्थ हिंदी या अंग्रेजी में ढूंढ़ सकते हैं | हिंदी पट्टी के इंटरनेट उपयोक्ताओं के लिए ये सेवा बहुत ही सुविधाजंका है और विदेशी नागरिकों के लिए भी जो हिंदी सीखना चाहते हैं | इस लिंक पर क्लिक्क करके आप इस वेबपोर्टल तक पहुँच सकते हैं : <a href="http://www.shabdkosh.com/" target="_blank">शब्दकोष (<strong>Dictionary</strong><span style="color: #272727; font-family: Verdana, Arial, Helvetica, sans-serif; font-size: x-small;">.)</span></a></h3>
]]></content:encoded>
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		<title>अपने ब्लॉग पर पाठकों को कैसे बुलाएँ ?</title>
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		<pubDate>Tue, 17 Nov 2009 10:13:32 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
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		<category><![CDATA[ब्लॉग पर पाठक कैसे बढ़ाएं]]></category>
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		<description><![CDATA[अंतरजाल पर हिंदी का सम्राज्य दिन -दिन बढ़ता ही जा रहा है . आज कम से कम ३-४ हजार सक्रीय चिट्ठाकार यहाँ निवास करते हैं . आशा है ,अब तक आपने भी अपना हिंदी ब्लॉग /चिट्ठा बना लिया होगा ,यदि ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2009/11/blog.jpg"><img alt="Blogging" class="aligncenter size-medium wp-image-1117" height="225" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2009/11/blog-300x225.jpg" title="Blogging" width="300" /></a></p>
<p style="text-align: justify;"><font size="3"><strong>अंत</strong></font><font size="3"><strong>रजा</strong></font><font size="3"><strong>ल पर हिंदी का सम्राज्य दिन -दिन बढ़ता ही जा रहा है . आज कम से कम ३-४ हजार सक्रीय चि</strong></font><font size="3"><strong>ट्ठाकार यहाँ निवास करते हैं . आशा है ,अब तक आपने भी अपना हिंदी ब्लॉग /चिट्ठा बना लिया होगा ,यदि नहीं तो अब बना लीजिये . अधिक से अधिक पाठकों </strong></font><font size="3"><strong>त</strong></font><font size="3"><strong>क</strong></font><font size="3"><strong> अपनी </strong></font><font size="3"><strong>बात को पहुंचाने की चिंता ना करें . बिलकुल भी ना</strong></font><font size="3"><strong> सोचें कि इतनी भीड़ में कोई आपके ब्लॉग तक कैसे पहुंचेगा ? तकनीक की इस मायावी दुनिया से बाबस्ता लोग जानते हैं हर दुःख का इलाज . और आपकी इस समस्या का हल है : </strong></font><font size="3">SEO यानी &#39;</font><font size="3">खोज इंजन अनुकूलन&rsquo;.</font></p>
<p style="text-align: justify;"><font size="3"><strong>हिंदी के खोज इंजनों को&nbsp; अपने चिट्ठे / ब्लॉग के बारे में सूचित करें ताकि वो अपनी खोज परिणामों में आपके ब्लॉग /चिट्ठे की जानकारी दे सके . </strong></font></p>
<div>&nbsp;</div>
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<p style="text-align: justify;"><font size="3">अपने चिट्ठे या ब्लॉग(Blog) पर ज्यादा पाठक कैसे लाये जायें इस पर अंग्रेजी में तो इंटरनेट पर ढेरों लेख मिल जायेंगे। हिंदी में इस बारे में बहुत ही कम लिखा गया है। और अगर लिखा गया है तो ज्यातार वही तरीके लिखे गये हैं जो अंग्रेजी में लिखे गये हैं। आज आपको बताते हैं कि भारतीय तथा हिंदी सर्च इंजिनों में कैसे अपने चिट्ठे या ब्लॉग शामिल करें। कुछ हिंदी सर्च इंजिन हैं </font><a href="http://search.webdunia.com/hindi.html" target="_blank"><font size="3">वेबदुनिया</font></a>, <a href="http://www.guruji.com/" target="_blank"><font size="3">गुरूजी</font></a>, <a href="http://www.raftaar.in/" target="_blank"><font size="3">रफ्तार</font></a><font size="3"> और <a href="http://dir.hinkhoj.com/" target="_blank">हिंदी खोज</a>&nbsp; ,<a href="http://www.sulekha.com/"><span style="color: rgb(0, 0, 255);">सुलेखा </span></a>आदि ।</font></p>
<p style="text-align: justify;"><font size="3">इन सभी सर्च इजिनों (हिंदी खोज तो एक डाइरेक्टरी भी है) में अपने चिट्ठे शामिल कीजिये। यकीन मानिये भारत में इंटरनेट पर सर्च प्रयोग में इन इंजिनों का बहुत बड़ा हिस्सा है। नीचे आपको उन पेजों के लिंक दिये जा रहे हैं जहां जा कर आप अपना हिंदी चिट्ठा इन सर्च इंजिनों में जमा करवा सकते हैं। कुछ ही दिनों में आपका चिट्ठा इन सर्च इंजिनों में नजर आने लगेगा।</font></p>
<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;<font size="3"><a href="http://search.webdunia.com/UserSubmitSite.aspx?lid=HI" target="_blank">बदुनिया</a></font></p>
<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>
<p style="text-align: justify;"><font size="3"><a href="http://dir.guruji.com/misc/SubmitSite.php" target="_blank">गुरूजी</a></font></p>
<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>
<p style="text-align: justify;"><font size="3"><a href="http://www.raftaar.in/submitpage.aspx" target="_blank">रफ्तार</a></font></p>
<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>
<p style="text-align: justify;"><font size="3"><a href="http://dir.hinkhoj.com/insertlinkclient.php?category=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A5%87" target="_blank">हिंदी खोज</a></font></p>
<div style="text-align: justify;">&nbsp;</div>
<p style="text-align: justify;"><a href="http://www.sulekha.com/">&nbsp;<font size="3">सुलेखा </font></a></p>
<p style="text-align: justify;"><font size="3">अगर आप थोड़ा बहुत तकनीकी रुझान रखते हों और अंग्रेजी समझ में आती हो तो सीधे गूगल खोज से मनचाही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं . </font></p>
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